भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील पर अंतरिम फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दे दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने वाला कदम बताया, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इसे 'हाउडी मोदी की जगह नमस्ते ट्रंप' कहकर आलोचना की।
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के फ्रेमवर्क पर संयुक्त बयान जारी किया गया है। व्हाइट हाउस और भारत सरकार द्वारा जारी इस बयान में कहा गया है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच पारस्परिक और संतुलित व्यापार को बढ़ावा देगा, साथ ही व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस पर कड़ा हमला किया है और मोदी-ट्रंप दोस्ती के संदर्भ में कहा- दोस्त, दोस्त न रहा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि संयुक्त बयान में विवरणों की कमी है और कई जगह इसने "चुप्पी" साधी हुई है। उन्होंने लिखा, "गले मिलने और फोटो खिंचवाने के सारे इवेंट बेकार साबित हुए। नमस्ते ट्रंप ने होडी मोदी पर बढ़त बना ली। दोस्त दोस्त न रहा!" कांग्रेस का दावा है कि भारत रूसी तेल आयात बंद करेगा, अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए आयात शुल्क घटाएगा (जिससे भारतीय किसान प्रभावित होंगे), अमेरिका से आयात तीन गुना हो जाएगा (जिससे भारत का व्यापार अधिशेष खत्म हो सकता है), और भारतीय वस्तु निर्यात पर पहले से ज्यादा शुल्क लग सकते हैं।
सोशल मीडिया पर भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ यूजर्स ने इसे भारत के लिए कूटनीतिक जीत बताया, जबकि अन्य ने ऊर्जा सुरक्षा और किसानों पर असर को लेकर चिंता जताई। एक यूजर ने कहा, "यह समझौता बराबरी का नहीं लगता है, लेकिन भारत ने अपनी लाल रेखाओं (जैसे कृषि संरक्षण) को बरकरार रखा।" वहीं, एक अन्य ने इसे "कॉस्मेटिक" करार दिया और कहा कि ट्रंप प्रशासन में बदलाव के साथ यह प्रभावहीन हो सकता है।
जयराम रमेश के 5 प्वाइंट
ट्रेड डील के सामने आए फ्रेमवर्क पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 5 प्वाइंट्स में अपनी बात कही है। जानिए-
- 1. भारत अब रूस से तेल आयात नहीं करेगा। अलग से, अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि यदि भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल खरीदता है, तो 25 प्रतिशत का दंड दोबारा लगाया जा सकता है।
- 2. भारतीय किसानों की कीमत पर अमेरिकी किसानों की मदद के लिए भारत आयात शुल्कों (import duties) में भारी कटौती करेगा।
- 3. अमेरिका से भारत का वार्षिक आयात तीन गुना हो जाएगा, जिससे वस्तुओं के व्यापार में हमारा लंबे समय से चला आ रहा सरप्लस समाप्त हो जाएगा।
- 4. अमेरिका को भारत के आईटी और अन्य सेवाओं के निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
- 5. भारत के वस्तु निर्यात को अमेरिका में पहले की तुलना में अधिक शुल्कों (duties) का सामना करना पड़ेगा।
मोदी सरकार का प्रचार युद्ध
ट्रेड डील का फ्रेमवर्क घोषित होते ही मोदी सरकार ने इसके स्वागत और समर्थन को लेकर जबरदस्त प्रचार युद्ध छेड़ दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने तो ट्वीट किया ही है लेकिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल इस डील से संबंधित लगातार ट्वीट कर रहे हैं और बार-बार कहा जा रहा है कि भारत को किस तरह इस डील से फायदा होने जा रहा है। तमाम टीवी चैनल भी सरकार के सुर में सुर मिला रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह हमारे दोनों महान राष्ट्रों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क है। मैं राष्ट्रपति ट्रंप को हमारे देशों के बीच मजबूत संबंधों के लिए उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देता हूं। यह 'मेक इन इंडिया' को मजबूत करेगा, किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप, युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।"वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसे सकारात्मक कदम बताया और कहा कि यह औपचारिक समझौता मार्च तक हस्ताक्षरित हो सकता है।