अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के करीब हैं। भारत दौरे पर आये विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी यही बात कही है। लेकिन अभी तक भारत सरकार की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से अटके व्यापार समझौते को लेकर एक बार फिर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत में हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच होने वाला समझौता पहले के व्यापार समझौतों से काफी अलग हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रस्तावित डील में क्या बदलाव होंगे, किन शर्तों पर सहमति बन रही है और समझौते पर हस्ताक्षर कब होंगे। भारत की ओर से अभी इस पर कुछ नहीं कहा गया है।
ट्रंप ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से भारत के साथ व्यापार समझौते की स्थिति के बारे में पूछा गया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि भारत समझौता करना चाहता है और अमेरिका भी डील करेगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह समझौता पहले किए गए व्यापार समझौतों से काफी अलग किस्म का हो सकता है। लेकिन उन्होंने इस टिप्पणी की विस्तार से व्याख्या नहीं की।इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। हालांकि, समझौते के करीब पहुंचने के अमेरिकी दावों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी विवादित मुद्दों पर अंतिम सहमति बन चुकी है या नहीं।
रुबियो बोले- समझौते के कुछ मुद्दे बाकी, जल्द हो सकता है ऐलान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। मंगलवार, 20 अक्टूबर को भारत में अपनी दूसरी आधिकारिक यात्रा के दौरान रुबियो ने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। रुबियो के मुताबिक, समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले जितनी प्रगति हो सकती है, दोनों देश लगभग उस स्तर तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और उन्हें भी जल्द निपटाए जाने की उम्मीद है।रुबियो ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस बारे में अच्छी खबर की घोषणा की जा सकती है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि इसके बाद दोनों देशों के नेता समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। हालांकि, रुबियो ने बाकी बचे मुद्दों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया और न ही समझौते पर हस्ताक्षर की कोई निश्चित तारीख बताई।
जयशंकर और रुबियो के बीच मुंबई में बातचीत
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मार्को रुबियो ने मंगलवार को मुंबई में मुलाकात की। बातचीत में व्यापार समझौते के साथ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग और दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क जैसे मुद्दे शामिल रहे। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
अमेरिकी पक्ष की ओर से बातचीत में भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने और अमेरिकी प्रौद्योगिकियों, प्रणालियों तथा रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने पर जोर दिया गया। रुबियो का तर्क था कि अमेरिका से अधिक ऊर्जा खरीदने से भारत को अपनी आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और असैन्य परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। रुबियो के भारत दौरे में एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है।
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और एस जयशंकर
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में अब तक क्या हुआ?
भारत और अमेरिका ने इस साल फरवरी में एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा की घोषणा की थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नीति और भारत की रूसी तेल खरीद जैसे मुद्दों ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को प्रभावित किया। पिछले सप्ताह भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान कहा था कि समझौते के बड़े मुद्दों पर काम पूरा हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के करीब हैं।पीयूष गोयल ने कहा- पहले चरण का समझौता तैयार
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण अंतिम रूप ले चुका है और फिलहाल कानूनी मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। गोयल के मुताबिक, भारत को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करके समझौते को लागू किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में उचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने को महत्व देता है।गोयल का बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के सकारात्मक संकेतों के साथ भारत सरकार भी बातचीत में प्रगति की बात कह रही है। फिर भी, कानूनी मसौदे पर काम पूरा होना और समझौते का औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होकर लागू होना अलग-अलग चरण हैं।रूसी तेल और अमेरिकी प्रतिबंधों का सवाल
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। रुबियो ने भारत आने से पहले उज्बेकिस्तान के समरकंद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब है। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रतिबंधों में छूट जैसे फैसले लेते समय इस वार्ता को ध्यान में रखा जाता है।यह बयान ऐसे समय आया था, जब ट्रंप प्रशासन ने रूस से ऊर्जा खरीद से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर छूट दी थी। संबंधित अमेरिकी कानून के तहत रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान था। भारत भी इन प्रमुख खरीदार देशों में शामिल था। हालांकि, प्रतिबंधों से संबंधित कदमों को टालना उन्हें स्थायी रूप से समाप्त करना नहीं है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन भविष्य में इन प्रावधानों का इस्तेमाल करने का विकल्प अपने पास रखता है।
क्या जल्द होगी ट्रेड डील?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयानों से संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच रही है। लेकिन अभी तीन सवाल अहम हैं: समझौते की अंतिम शर्तें क्या होंगी, टैरिफ और रूसी तेल जैसे विवादित मुद्दों का समाधान कैसे निकलेगा और दोनों देशों के नेता इस पर कब हस्ताक्षर करेंगे? फिलहाल किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं हुई है और समझौते पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि भी नहीं है। इसलिए ट्रंप का बयान महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे ट्रेड डील के औपचारिक रूप से पूरा हो जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।