भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर देश में मंत्रियों के बयानों में विरोधाभास नज़र आ रहा है। विदेशमंत्री एस जयशंकर के पास पूरी जानकारी नहीं है, जबकि दूसरे मंत्री पीयूष गोयल बयान देते नजर आ रहे हैं। जबकि अमेरिका में हर कोई इस डील को जीत बताते हुए बयान दे रहा है।
केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर और पीयूष गोयल
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर दोनों देशों के मंत्रियों-अधिकारियों के बयानों में अस्पष्टता और विरोधाभास देखने को मिल रहे हैं। यह डील मुख्य रूप से टैरिफ कटौती, रूसी तेल खरीद पर रोक और अमेरिकी उत्पादों में निवेश पर केंद्रित है। इस सिलसिले में विदेश मंत्री एस जयशंकर और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बयानों पर गौर किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ अमेरिका में व्हाइट हाउस की प्रवक्ता केरोलीन लेविट से लेकर उसके वाणिज्य मंत्री और अन्य सांसदों को इस डील की पूरी जानकारी है। अमेरिका में इसे जीत बताकर प्रचारित किया जा रहा है।
जयशंकर ने क्या कहा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि प्रस्तावित समझौते पर विस्तृत बातचीत चल रही है और इसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा संभाला जा रहा है। एएनआई के मुताबिक जयशंकर ने कहा, "मैं सीधे तौर पर नहीं जुड़ा था, क्योंकि इसे वाणिज्य और उद्योग मंत्री संभाल रहे हैं। प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच बातचीत हुई थी, जिससे कुछ घोषणाएं सामने आईं। उसके बाद, जैसा कि हम बात कर रहे हैं, व्यापार वार्ता का विवरण तैयार किया जा रहा है।" समझौते की समयसीमा पर उन्होंने कहा कि इसका बेहतर जवाब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल दे पाएंगे, जो सीधे तौर पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ जुड़े हुए हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बारीक जानकारियां अभी भी गुप्त हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों द्वारा अगले सप्ताह एक संयुक्त बयान जारी कर समझौते पर प्रकाश डालने की उम्मीद है। इस बहुप्रतीक्षित बयान से उस गोपनीयता के पर्दे के हटने की संभावना है जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के साथ व्यापार समझौते की एकतरफा घोषणा करने और टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने के बाद से इस व्यापार समझौते पर छाया हुआ है। सवाल ये है कि भारत की तरफ से ऐसी गोपनीयता क्यों बरती जा रही है।
पीयूष गोयल ने क्या कहा
बुधवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के तुरंत बाद, उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए नियमित चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों की वार्ता टीमों ने पिछले एक साल में कई स्तरों पर गहनता से काम किया है। गोयल ने कहा, "दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए, यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।" उन्होंने आगे कहा कि बातचीत के दौरान, भारतीय पक्ष ने यह सुनिश्चित किया कि कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की रक्षा की जाए, जबकि अमेरिका के पास भी चिंता के अपने संवेदनशील क्षेत्र थे। गोयल ने ट्रेड डील की कोई अन्य जानकारी न तो संसद में और न ही पत्रकारों को दी। इसका मतलब ये हुआ कि या तो पीयूष गोयल को डील की पूरी जानकारी नहीं है या फिर वो देश की संसद और जनता को बताना नहीं चाहते। अलबत्ता इस डील की घोषणा के बाद पीएम मोदी का सम्मान हो रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर 2 फरवरी को भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के साथ बात करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं। वे मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं। हमने व्यापार और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर चर्चा की। उन्होंने रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका तथा संभावित रूप से वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई। इससे यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी। मोदी के अनुरोध पर, तत्काल प्रभाव से हमने व्यापार समझौता किया, जिसमें अमेरिका भारत पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करेगा। भारत अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य करेगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों में 500 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने का वादा किया। हमारा रिश्ता और मजबूत होगा।"
इस बयान से ट्रंप ने डील को अमेरिका की मांगों की स्वीकृति के रूप में पेश किया।
व्हाइट हाउस प्रवक्ता कैरोलीन लेविट का बयान
कैरोलीन लेविट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "राष्ट्रपति (ट्रंप) ने भारत के साथ एक और शानदार व्यापार समझौता किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे बात की। भारत अब रूसी तेल नहीं खरीदेगा, बल्कि अमेरिका और शायद वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा होगा। इसके अलावा, मोदी ने अमेरिका में परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पादों में 500 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया। अमेरिका भारत पर टैरिफ 18% रखेगा, लेकिन अमेरिकी निर्यात पर भारत में 0% टैरिफ होगा। यह अमेरिकी श्रमिकों, व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए बड़ी जीत है।"
लेविट ने इसे ट्रंप की कूटनीति की सफलता बताया और 2 फरवरी की मोदी-ट्रंप कॉल का जिक्र किया।
3 फरवरी को पीयूष गोयल का बयान
विपक्ष के सवालों पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि वे डील की पूरी जानकारी नहीं दे सकते क्योंकि अंतिम विवरण पर काम चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया, "अमेरिका ने पहले पारस्परिक टैरिफ लगाए थे, इसलिए कटौती की घोषणा ट्रंप से आई। समझौता अंतिम चरण में है, जल्द ही भारत-अमेरिका संयुक्त बयान जारी होगा। कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह डील एमएसएमई, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर गुड्स जैसे क्षेत्रों के लिए अवसर खोलेगी। मछुआरों, किसानों और युवाओं के लिए बड़ा लाभ होगा।" गोयल ने यही बयान 4 फरवरी को भी दोहराया।
अमेरिका में क्या कहा जा रहा है
अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के प्रमुख सदस्यों जैसे चक शूमर या मिच मैककॉनेल से इशारों में खुशी जताई। लेकिन अमेरिकी व्यापार संगठनों ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद माना है। अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स ने पहले कहा था कि समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में अधिक पहुंच देगा, जिससे 2024 में 1.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कम होगा।
अटलांटिक काउंसिल के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन और मार्क लिनस्कॉट ने कहा कि यह समझौता अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव कम करेगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, जबकि भारत को भारी टैक्स से राहत मिलेगी लेकिन यह पहले की स्थिति से बेहतर नहीं है। अमेरिकी नज़रिए से, भारत का रूसी तेल बंद करना यूक्रेन युद्ध को प्रभावित करेगा और अमेरिकी ऊर्जा निर्यात बढ़ेगा।
डील से जुड़े यूस ट्रेड प्रतिनिधि (USTR) जैमिसन ग्रीर का बयान
यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने 3 फरवरी 2026 को CNBC के 'Squawk Box' इंटरव्यू में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विस्तृत बयान दिया। उन्होंने इसे अमेरिकी किसानों और निर्यातकों के लिए "बड़ी जीत" (big win) बताया। मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं।
डील की स्थिति: डील के स्पेसिफिक्स और डिटेल्स तय हो चुके हैं, अब सिर्फ "पेपरिंग" (फाइनल डॉक्यूमेंटेशन और फॉर्मलाइजेशन) बाकी है। उन्होंने कहा, "We'll finish papering it, but we know the specifics, we know the details. It's a very exciting opportunity."
भारत की तरफ से टैरिफ कटौती:भारत औद्योगिक सामानों (industrial goods) पर औसत टैरिफ 13.5% से घटाकर शून्य (zero) करेगा, लगभग "वर्चुअली सभी" (virtually all, 98-99%) सामानों पर।
- कृषि उत्पादों (agricultural goods) में "विशाल श्रेणी" (vast array) पर टैरिफ जीरो होगा, जैसे tree nuts (सूखे मेवे), fruits (फल), vegetables (सब्जियां), wine, spirits (शराब), dry fruits आदि।
- अन्य क्षेत्रों जैसे manufactured goods, chemicals, medical equipment पर भी टैरिफ में कमी आएगी।
अगर इन सभी बयानों को पूरे संदर्भ से मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका में इस डील को स्पष्टता शुरू से ही बनी हुई है लेकिन भारत में इस पर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं है। न किसी मंत्री को कुछ पता है औ न ही सरकारी अधिकारी इस पर बोलने को तैयार हैं। पीएम मोदी का स्वागत इस पर हो चुका है लेकिन मोदी भी डील के बारे में कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।