होर्मुज स्ट्रेट के पास दो भारतीय झंडे वाले टैंकरों पर गोलीबारी की घटना के बाद अब ईरान के बयान में भारत-ईरान के बीच रिश्ते बेहद मज़बूत होने की दुहाई दी गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन दोनों देशों के रिश्ते 5000 साल पुराने इतिहास पर टिके हैं और ये और मज़बूत होंगे।
जब डॉ. इलाही से इस हमले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'भारत और ईरान के बीच संबंध बेहद मज़बूत हैं। मैं इस घटना के बारे में कुछ नहीं जानता जिसका आप ज़िक्र कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सब ठीक हो जाएगा और यह मामला सुलझ जाएगा।' उन्होंने आगे कहा कि ईरान युद्ध का पक्षधर नहीं है, बल्कि शांति चाहता है।
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भारत-ईरान दोस्ती की याद दिलाई!

डॉ. इलाही ने कहा कि भारत को इन संबंधों से फायदा हुआ है। उन्होंने उदाहरण दिया कि भारतीय तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच हुई सफल बातचीत का भी ज़िक्र किया। इसके साथ ही, विदेश मंत्री की ईरान के विदेश मंत्री से कई सफल बातचीत का उल्लेख किया।

डॉ. इलाही ने यह बयान न्यूज एजेंसी एएनआई को दिया है। उन्होंने कहा, 'भारत और ईरान के रिश्ते की जड़ें 5000 साल पुराने इतिहास में हैं। ईरानी लोग भारत से संस्कृति, सभ्यता, शिक्षा, मानवता और दर्शन से जुड़े हैं। हमारे संबंध बेहद मज़बूत हैं और ये और मज़बूत होते जाएंगे। हम शांति चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि दूसरी तरफ भी शांति का रास्ता अपनाए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।'

गोलीबारी पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया?

होर्मुज स्ट्रेट के पास शनिवार को दो भारतीय झंडे वाले टैंकर जग अर्नव और सनमार हेराल्ड पर ईरानी नौसेना ने गोलीबारी की। ये टैंकर इराकी तेल ले जा रहे थे, जिसमें लाखों बैरल तेल था। इस समय पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमत को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। दोनों जहाजों पर गोली चलाई गई, हालांकि क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि दोनों जहाजों को निशाना बनाया गया। इस घटना पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय यानी एमईए ने ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। ईरानी राजदूत MEA दफ्तर से बाहर निकलते देखे गए, जहां उन्होंने पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान डेस्क के संयुक्त सचिव से मुलाकात की।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश सचिव ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत व्यापारी जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को बहुत महत्व देता है। भारत ने याद दिलाया कि पहले ईरान ने कई भारत जाने वाले जहाजों को सुरक्षित गुजरने में मदद की थी।

विदेश सचिव ने ईरान के राजदूत से कहा कि वे भारत की चिंता अपने अधिकारियों तक पहुंचाएं और भारत जाने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करें।

होर्मुज में ख़तरा बढ़ा

अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमले का खतरा बढ़ गया है। ईरानी नौसेना ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इस चोकपॉइंट के पास आएगा तो उसे 'दुश्मन के साथ सहयोग' माना जाएगा और ऐसे जहाज को निशाना बनाया जाएगा।
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ईरान ने पहले होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक करता रहेगा, तब तक यह जलमार्ग बंद रहेगा।

ईरान में सत्ता की असली ताक़त कौन?

गोलीबारी तब हुई जब होर्मुज खुला है या बंद, इसको लेकर भ्रम था। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा था कि सभी जहाज ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से समन्वय कर गुजर सकते हैं। लेकिन विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि लेबनान में इसराइल-हिजबुल्लाह युद्ध के लिए संघर्षविराम होने के बाद जलमार्ग खुला है।

भारत ने इस पर ईरान के राजदूत को बुलाकर अपनी 'गंभीर चिंता और नाराजगी' जताई। सवाल उठ रहे हैं कि सिविलियन जहाजों पर गोलीबारी क्यों हुई? क्या यह आंतरिक राजनीति और भ्रम की वजह से हुआ? एक तरफ सिविलियन सरकार ने यातायात शुरू करने का संकेत दिया, लेकिन जमीन पर IRGC ही असली फैसले ले रही दिख रही है। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने विदेश मंत्री के ट्वीट को 'अधूरा और गलत' बताया और कहा कि इससे हॉर्मुज खुलने को लेकर भ्रम फैला।
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यह घटना तब हुई जब ईरान ने होर्मुज को फिर से बंद करने की घोषणा की। यह दुनिया के तेल व्यापार का बेहद अहम रास्ता है। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि वे यहां से तेल आयात करते हैं।

भारत और ईरान के पुराने और मजबूत संबंध हैं। दोनों देश संस्कृति, सभ्यता और व्यापार से जुड़े हैं। इस घटना के बावजूद डॉ. इलाही ने जोर देकर कहा कि रिश्ते मजबूत रहेंगे और शांति का रास्ता अपनाया जाएगा। उनके इस आश्वासन के बावजूद होर्मुज में तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ हैं।