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राहुल से असहमत दो कांग्रेसी दिग्गज, मोदी का 'दानवीकरण' ग़लत

कांग्रेस पार्टी के अंदर इस वक़्त ज़बरर्दस्त मंथन चल रहा है। ख़ासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर। सवाल यह है कि उनकी किस तरीक़े से और कैसे आलोचना की जानी चाहिए। क्या नरेंद्र मोदी का ‘दानवीकरण’ यानी नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमले करना और उनकी छवि को एक ग़लत आदमी के तौर पर पेश करना सही है? कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने नरेंद्र मोदी का ‘दानवीकरण’ करने की कोशिशों का जमकर विरोध किया है और कहा है कि हर मसले पर उनका विरोध करना और व्यक्तिगत हमले करना सही नहीं है। सबसे पहले आवाज़ उठाई पार्टी के पूर्व मंत्री और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाने वाले जयराम रमेश ने। उन्होंने गुरुवार को कहा, ‘अब वक़्त आ गया है कि हम इस बात को पहचानें कि 2014 और 2019 के बीच उन्होंने क्या काम किए जिसकी वजह से उनको 30 फ़ीसदी से ज़्यादा लोगों ने अपना मत देकर दुबारा सत्ता में भेजा है।'

उनका कहना है कि जब तक हम इस बात को नहीं मानते कि वह ऐसे काम कर रहे हैं जिसको लोग स्वीकार कर रहे हैं और जो काम अतीत में नहीं हुए तब तक हम उनका मुक़ाबला नहीं कर सकते हैं।

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मोदी का जादू क्यों: जयराम

जयराम रमेश ने एक तरीक़े से पार्टी को सलाह दी है कि जब तक हम नरेंद्र मोदी की ग़लत आदमी की छवि बनाने की कोशिश करेंगे तब तक हम मोदी और उनकी राजनीति को समझ नहीं पाएँगे। उनका कहने का अर्थ है कि सबसे पहले यह समझना होगा कि मोदी का जादू क्या है और क्यों है। वह मतदाताओं के एक तबक़े पर सिर चढ़कर बोलते हैं और लोग उन्हें वोट देते हैं। 

जयराम रमेश ने नरेंद्र मोदी की उज्ज्वला योजना का विशेष तौर पर ज़िक्र किया। उनके मुताबिक़ विपक्षी पार्टियों ने और कांग्रेस ने भी उज्ज्वला योजना का मज़ाक उड़ाया। लेकिन 2019 के चुनाव की समीक्षा में बार-बार यह तथ्य सामने आया है कि इस योजना से लाभान्वित होकर करोड़ों महिलाओं ने उनको वोट दिया। यह बात 2014 के समय नहीं थी। 

अभिषेक सिंघवी भी जयराम की राह पर

जयराम रमेश के तरीक़े से पार्टी के दूसरे बड़े नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा है कि मोदी का ‘दानवीकरण’ करना ग़लत है। वह न केवल देश के प्रधानमंत्री हैं, बल्कि ऐसा करने से विपक्ष उनकी मदद ही करता है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि कोई भी काम अच्छा-बुरा या यूँ ही होता है और उसकी समीक्षा मुद्दों के आधार पर होनी चाहिए न कि व्यक्ति के आधार पर। जयराम रमेश की हाँ में हाँ मिलाते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने लिखा है कि निश्चित तौर पर उज्ज्वला योजना उनके अच्छे कामों में से एक है। 

इन दोनों नेताओं का कहने का मतलब यह है कि 2014 के बाद जिस तरह से नरेंद्र मोदी पर मुद्दों की जगह व्यक्तिगत हमले किए गए वह ग़लत था और पार्टी को अपनी लाइन बदलनी चाहिए। हम आपको बता दें कि 2019 के चुनाव के समय कांग्रेस के तब के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने रफ़ाल के ज़रिए नरेंद्र मोदी को चोर साबित करने की कोशिश की थी। कहीं इन दोनों नेताओं का कहने का यह मतलब तो नहीं कि राहुल गाँधी ने ऐसा करके ग़लत किया और उनका नुक़सान करने की जगह उनका फ़ायदा कराया।

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राहुल से अलग लाइन

कांग्रेस पार्टी इन दिनों राजनीतिक झंझावत से गुज़र रही है। उसके अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है। उसके पार्टी के कई नेता, सांसद और विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। राहुल गाँधी ने इस्तीफ़ा दे दिया है और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर पार्टी में दो फाड़ साफ़ दिखाई पड़ रहा है। इन दोनों नेताओं के बयानों से साफ़ दिखाई दे रहा है कि पार्टी का एक तबक़ा राहुल गाँधी की लाइन से असहमत है और चाहती है कि इसको बदला जाए।

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