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केजरीवाल के अंधविश्वासी विचार से 'अपने' भी सहमत नहीं

आम आदमी पार्टी चीफ अरविन्द केजरीवाल को करंसी पर लक्ष्मी-गणेश की फोटो वाले बयान को उनके अपनों से भी समर्थन नहीं मिल रहा है। आप समर्थक विशाल ददलानी और कभी आप टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं एक्ट्रेस गुल पनाग केजरीवाल के विचार के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया पर बाकी लोग भी केजरीवाल के प्रस्ताव का मजाक उड़ा रहे हैं।
बॉलीवुड संगीतकार विशाल ददलानी को भारतीय फिल्मी दुनिया में आप समर्थक माना जाता है। लेकिन वो केजरीवाल के विचार से सहमत नहीं हैं। ददलानी ने केजरीवाल या उनकी पार्टी का नाम लिए बिना ट्वीट किया।जिसमें उन्होंने कहा कि भारत का संविधान कहता है कि हम एक धर्मनिरपेक्ष समाजवादी गणराज्य हैं। इसलिए, शासन में धर्म का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इसे मैं और साफ कर दूं कि मेरा ऐसे लोगों से कोई लेना-देना नहीं है जो किसी भी धर्म के किसी भी हिस्से को किसी भी पहलू में लाते हैं।
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आप समर्थक ददलानी का यह ट्वीट केजरीवाल के उस बयान के बाद आया, जब बुधवार को केजरीवाल ने पीएम मोदी से भारतीय मुद्राओं पर लक्ष्मी और गणेश की तस्वीरें छापने की अपील की।
यह पहली बार नहीं है जब विशाल ददलानी ने आप की आलोचना की है। 2020 में, संगीतकार ने देशद्रोह के मामले में कन्हैया कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए पार्टी की आलोचना की थी।
आप के टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं एक्ट्रेस गुल पनाग ने भी कहा कि धर्म को हर चीज में लाना, यह एक ऐसा खेल है जिसे अब हर कोई खेल रहा है। और सिर्फ राजनेता ही नहीं! जो असहमत हैं वे व्यर्थ में संविधान का आह्वान करते रह सकते हैं।
बीजेपी और आप इस समय हिन्दुत्व को कैश करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हाल ही में केजरीवाल सरकार के एक मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें हजारों लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म कथित तौर पर अपना लिया था। बीजेपी ने इस मामले को गुजरात में उछालते हुए केजरीवाल और उनकी पार्टी को हिन्दुत्व विरोधी करार दे दिया। केजरीवाल बचाव की मुद्रा में आ गए। मंत्री गौतम का इस्तीफा ले लिया गया। लेकिन अब केजरीवाल ने खुद को ज्यादा हिन्दू साबित करने के लिए भारतीय करंसी पर लक्ष्मी-गणेश के फोटो लगाने की मांग पीएम मोदी से कर दी। केजरीवाल जो चाहते थे, वही हुआ। बीजेपी ने फिर इसे मुद्दा बनाना चाहा लेकिन आप के कई नेता आप को हिन्दू समर्थक पार्टी घोषित कराने के लिए ज्यादा मुखर होते गए।
आप विधायक और केजरीवाल की खास आतिशी मारलेना ने कहा, आप चाहें तो अरविंद केजरीवाल से नफरत करना जारी रख सकते हैं, लेकिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश से कम से कम नफरत तो नहीं करें। उनके आशीर्वाद से नफरत न करें। इस देश की समृद्धि से कम से कम नफरत तो नहीं करें।

लोग उड़ा रहे मजाक

बहरहाल, सोशल मीडिया पर केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं का मजाक उड़ रहा है।

भारत की बात नामक यूजर ने केजरीवाल के आईआईटी से पास होने पर ही सवाल उठा दिया। उसने लिखा है - क्या केजरीवाल वाकई आईआईटी मैन हैं।
नसरीन इब्राहीम ने कांग्रेस सेवादल के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए टिप्पणी की है - अरविन्द केजरीवाल देश आप पर हंस रहा है। अफसोस कि चुनाव पूर्व यह आपकी ट्रिक है। भगवान आपके दिल में होना चाहिए, नोटों पर नहीं। कांग्रेस सेवादल कानपुर देहात ने टिप्पणी की थी कि फिर तो आटा चक्की पर अन्नपूर्णा देवी जी की तस्वीर लगा दो, देश से भुखमरी खत्म हो जाएगी।

कलीम नामक ट्विटर यूजर ने लिखा है - केजरीवाल के आइडिया से मुसलमानों की मुश्किल बढ़ जाएगी। इस साल जुलाई में एक मुस्लिम को इसलिए गिरफ्तार किया गया था कि उसने उस अखबार में चिकन लपेटकर दिया था, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं के फोटो थे। अब कल्पना कीजिए कि कोई चमड़े के वॉलेट में हिन्दू देवी-देवता वाले नोट लेकर जा रहा हो, या फटे हुए नोट हों या फिर उन नोट पर कुछ लिखा हो। इनसे बहुत सारे हिन्दुओं की भावनाएं आहत होंगी। 
आप विधायक आतिशी मारलेना ने नोट पर लक्ष्मी-गणेश वाले केजरीवाल के बयान को 130 करोड़ देशवासियों का प्रस्ताव बताया था। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रेकॉर्ड अनस तनवीर ने सवाल उठा दिया। अनस ने आतिशी से पूछा - अमां आतिशी ये 130 करोड़ लोगों ने आपको फोन किया था ? जनमत संग्रह हुआ था कोई? यानी देश प्रदेश छोड़ कोई जनमत भी नहीं है आपके पास। इस संख्या पर पहुंचीं कैसे? अचानक कुछ भी बोल दिया मुंह बना बनाकर। और क्या मजाल इतना सीधा सवाल कोई प्रेसवाला पूछ ले। 
राहुल ठकर सेन ने नोट पर केजरीवाल के मीम के साथ लिखा है - राजनीति में पढ़ा लिखा इंसान भी पाखंडी और अंधविश्वासी बन जाता है इसका उदाहरण केजरीवाल है। खैर धीरे धीरे ही सही किंतु पता चल रहा है केजरीवाल मनुवादी आरक्षण विरोधी है और पाखंड का समर्थक है। इससे दलितों पिछड़ों को दूर रहना चाहिए साथ ही मुसलमानों को भी।

 
भगीरथ आजाद ने ट्विटर पर केजरीवाल के बहाने मीडिया पर भी टिप्पणी कर दी है - क्योंकि वह जानता है कि आम्बेडकर वादियों की तुलना में अंधविश्वासी वोट ज्यादा है देश में। मीडिया तो मजबूर है बेचारी, अगर यही बात बीजेपी बोल देती तो मीडिया अब तक नये नोट का नक्शा तैयार कर चुकी होती। ब्राह्मणवादी मीडिया के तो मन की बात कह दी है केजरीवाल ने।

अच्छे दिन लाएंगे नामक ट्विटर यूजर ने लिखा है - केजरीवाल ने साबित कर दिया कि इंसान की अंधविश्वासी सोच और शिक्षा का कोई संबंध नहीं होता है।

केजरीवाल की मांग का मजाक उड़ाने वाले असंख्य ट्वीट में से ये चंद ट्वीट थे। हालांकि कुछ लोगों ने केजरीवाल की मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि केजरीवाल के इरादे नेक हैं। उनकी मांग सही है। कुछ लोगों ने केजरीवाल को अंधविश्वासी लिखने वालों को जवाब दिया है कि केजरीवाल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम कर रहा है इसलिए लोग उन्हें अंधविश्वासी बता रहे हैं। 
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क़मर वहीद नक़वी
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