आई-पैक पर ईडी छापे वाले पूरे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीजेआई सूर्यकांत के सामने अपील की कि वह लोगों को निशाना बनाने वाली एजेंसियों से बचाएँ। कलकत्ता हाई कोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के एक भवन के उद्घाटन समारोह में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और सीजेआई सूर्यकांत व अन्य जज साथ मौजूद थे।

मंच पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य जजों की ओर मुड़कर ममता ने कहा, 'मेरा मुख्य न्यायाधीश और सभी न्यायाधीशों से अनुरोध है- कृपया संविधान, लोकतंत्र, न्यायपालिका, इतिहास, भूगोल और देश की सीमाओं को आपदा से बचाएं।' मुख्यमंत्री की यह अपील तब आई है जब ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान ममता द्वारा दस्तावेज और लैपटॉप लेकर चले जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस भेजा है। ईडी की दलीलों पर कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में बड़े सवाल उठते हैं और अगर उनका जवाब नहीं दिया गया तो अराजकता फैल जाएगी।
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बहरहाल, जलपाईगुड़ी में कार्यक्रम में सीजेआई के सामने ममता ने जोर देकर कहा, 'देखिए, इतनी सारी एजेंसियां बदनाम कर रही हैं... जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। कृपया लोगों को बचाएं। मैं यह खुद के लिए नहीं कह रही हूं। मैं कह रही हूं कि लोगों को बचाएँ, न्यायपालिका को बचाएँ, संविधान को बचाएँ और देश को बचाएँ।' ममता ने आगे कहा, 'हम आपके संरक्षण में हैं। आप संविधान के रक्षक हैं। आपसे ऊपर कोई नहीं है।' उन्होंने यह भी अपील की कि मीडिया ट्रायल की यह प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए।

ईडी छापे पर सुप्रीम कोर्ट क्या बोला?

ममता का यह बयान ईडी की छापेमारी में हस्तक्षेप के आरोप पर दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा और विपुल पंचोली की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुरुवार को कहा था कि यह एक गंभीर मुद्दा उठा है। हस्तक्षेप के आरोपों पर कोर्ट ने कहा, 'बड़े सवाल उठते हैं और अगर उनका जवाब नहीं दिया गया, तो अराजकता फैल जाएगी। अगर केंद्रीय एजेंसियां गंभीर अपराध की जांच में ईमानदारी से काम कर रही हैं तो सवाल है- क्या उन्हें पार्टी की गतिविधियों से रोका जा सकता है?'
बेंच ने ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार को नोटिस जारी किया। ईडी ने इनके खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है, क्योंकि आरोप है कि उन्होंने छापेमारी में बाधा डाली।

आईपैक पर छापे की कार्रवाई क्यों?

यह सब 9 जनवरी को राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के दफ्तर और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी से शुरू हुआ। यह छापेमारी कथित कोयला घोटाले से जुड़ी थी। ममता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं और छापेमारी का मक़सद तृणमूल की रणनीति तक पहुँचना था, जिसमें आई-पैक मदद कर रहा था।
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छापे के अगले दिन कोलकाता में 6 किलोमीटर लंबी रैली निकालते हुए ममता ने कहा कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया और ईडी, सीबीआई जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है।

कोई मारता है तो मैं फिर ज़िंदा हो जाती हूँ...: ममता

रैली में समर्थकों के बीच ममता ने कहा था, 'अगर कोई मुझे राजनीतिक रूप से मारने की कोशिश करता है, तो क्या मेरे पास खुद की रक्षा करने का अधिकार नहीं है... सभी एजेंसियां कब्जा ली गई हैं। आपने जबरन महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार पर कब्जा किया। क्या आपको लगता है कि आप बंगाल पर भी कब्जा कर लेंगे? अगर कोई मुझे राजनीतिक रूप से मारता है तो मैं राजनीतिक रूप से फिर से जिंदा हो जाती हूं।'
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बीजेपी का ममता पर हमला

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद बीजेपी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और जांच में हस्तक्षेप हो रहा है। बीजेपी नेता संजय सरावगी ने एएनआई से कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की सच्चाई उजागर कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अराजकता फैल जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां खुद बंगाल की कानून-व्यवस्था की स्थिति दिखाती हैं... मुख्यमंत्री खुद आई-पैक जांच में हस्तक्षेप करती हैं, फाइलें ले जाती हैं... सुप्रीम कोर्ट का बयान साफ करता है कि वहां कितनी अराजक स्थिति है।'

पश्चिम बंगाल में यह सब आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हो रहा है। इन घटनाओं को इस चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। ममता बनर्जी की ताज़ा अपील से केंद्र और राज्य के बीच तनाव और बढ़ सकता है। यह मामला संविधान और एजेंसियों के इस्तेमाल पर बहस छेड़ सकता है।