अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक प्रमुख MAGA समर्थक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के वीडियो को शेयर करने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इसमें भारत और चीन को ‘प्लैनेट का हेलहोल’ (नरक जैसा देश) बताया गया था। कांग्रेस ने मांग की थी कि पीएम मोदी इस संबंध में ट्रंप से बात करके आपत्ति जताएं। सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मांग की गई थी कि वो ट्रंप के बयान पर कड़ी आपत्ति जताएं। लेकिन मोदी और मुर्मू की ओर से इस संबंध में कोई बयान नहीं आया। लेकिन इस प्रकरण में ईरान का एक वीडियो चर्चा में है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने इन टिप्पणियों को देखा है और अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी बाद वाले बयान को भी। ये टिप्पणियां स्पष्ट रूप से अनजान, अनुचित और खराब लहजे वाली हैं। ये भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को बिल्कुल नहीं दर्शातीं, जो लंबे समय से आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहे हैं।”

ईरान ने वीडियो जारी किया, ट्रंप की बात को 'बकवास' कहा

ईरान सरकार के एक्स हैंडल जो ईरान इन मुंबई के नाम से जाना जाता है, उसने भारत को लेकर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें भारत की विविध संस्कृति को दिखाया गया है। वीडियो के साथ टिप्पणी में ईरान इन मुंबई ने लिखा है- शायद किसी को ट्रंप के लिए एकतरफ़ा सांस्कृतिक यात्रा बुक करनी चाहिए, इससे बेतरतीब बकवास कम हो सकती है। कभी इंडिया आ के देखो, फिर बोलना। ईरान के हैदराबाद हैंडल ने भी भारत की  विविधता की तारीफ करते हुए टिप्पणी लिखी है। ईरान के इस वीडियो पर भारतीय सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उनका कहना है कि भारत के नेता भारत का बचाव नहीं कर रहे हैं, लेकिन ईरान हमारे साथ खड़ा हुआ है। एक भारतीय ने लिखा कि मुंबई-दिल्ली में जो ईरानी चाय बिकती है, वो हमे बेहद पसंद है। इस पर ईरान इन मुंबई ने प्रतिक्रिया देते हुए कि हम ईरानी चाय के साथ बन मक्खन खाते हैं तो उस चाय का स्वाद बढ़ जाता है।
ट्रंप ने Newsmax की सीरीज The Savage Nation में प्रसारित माइकल सैवेज का वीडियो शेयर किया था, जिसमें बर्थराइट सिटीजनशिप (जन्म-आधारित नागरिकता) पर हमला किया गया। सैवेज ने दावा किया कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए गर्भवती महिलाएं नौवें महीने में अमेरिका आकर बच्चे को जन्म देती हैं, जिससे बच्चा तुरंत अमेरिकी नागरिक बन जाता है और फिर पूरा परिवार चीन, भारत या “प्लैनेट का कोई और हेलहोल” से लाया जा सकता है।
ट्रंप ने वीडियो के साथ मूल संदेश का स्क्रिप्ट भी शेयर किया। सैवेज ने सुप्रीम कोर्ट में बर्थराइट सिटीजनशिप पर चल रही बहस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसमें सिर्फ कानूनी शब्दावली चल रही है। उन्होंने दावा किया कि “अब यहां अंग्रेजी नहीं बोली जाती” और आधुनिक आप्रवासियों में वफादारी की कमी है। उन्होंने यूरोपीय मूल के आप्रवासियों (आयरिश, इटालियन, पोलिश आदि) की तुलना करते हुए कहा कि वे मेल्टिंग पॉट में घुल-मिल गए, लेकिन अब “मेल्टिंग पॉट खत्म हो चुका है, अब यह कैश इन पॉट बन गया है… चैंबर पॉट।”

अमेरिकी दूतावास ने बात संभालने की कोशिश की

इस विवाद के बाद अमेरिकी दूतावास ने बात संभालने के लिए बयान जारी किया। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, “राष्ट्रपति ने कहा है कि ‘भारत एक महान देश है और मेरे बहुत अच्छे दोस्त (प्रधानमंत्री) इसके शीर्ष पर हैं।”
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय आप्रवासियों को MAGA आधार पर निशाना बनाया गया हो। दिसंबर 2024 में दक्षिणपंथी कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने H-1B वीजा कार्यक्रम की आलोचना की थी और इसे “अमेरिका फर्स्ट” नीति के खिलाफ बताया था।
2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अवैध आप्रवासन ट्रंप का प्रमुख मुद्दा था, जिसमें दक्षिणी सीमा पर दीवार और बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन का वादा किया गया था। अब बहस लीगल आप्रवास और बर्थराइट सिटीजनशिप पर केंद्रित हो गई है।
MEA के मजबूत जवाब और अमेरिकी दूतावास के स्पष्टीकरण से दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को कोई नुकसान पहुंचने की संभावना नहीं है, हालांकि यह घटना भारतीय समुदाय में नाराजगी पैदा कर रही है।