loader

जेएनयू के छात्र आन्दोलन को सख़्ती से कुचलने की तैयारी में है मोदी सरकार?

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में फ़ीस बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ चल रहे आन्दोलन पर सरकार का रवैया क्या सख़्त हो रहा है? क्या सरकार अब समस्या का निपटारा करने के बजाय दबाव डाल कर आन्दोलन ख़त्म करवाने की रणनीति पर काम कर रही है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सोमवार को इसके संकेत दे दिए।
पोखरियाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फ़ीस बढ़ोतरी तो कोई मुद्दा ही नहीं है, इस पर सहमति हो चुकी है। उन्होंने 10-12 दिसंबर को हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि हॉस्टल फ़ीस में बढ़ोतरी में से ग़रीबी रेखा से नीचे के छात्रों को छूट मिलने और सेवा शुल्क का भुगतान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  की ओर से करने पर सहमति बन चुकी थी।
सम्बंधित खबरें

सरकार की नीयत पर संदेह

इसी से सरकार की नीयत पर संदेह होता है। इसकी वजह यह है कि तत्कालीन मानव संसाधन सचिव आर सुब्रमण्यम ने यह फ़ॉर्मूला दिया था, इस पर पूरी तरह राजी थे। उन्होंने फ़ोन पर दो घंटे की लंबी बातचीत में वाइस चांसलर एम. जगदीश कुमार को राजी कराया था। वे काफी मुश्किल से सहमत हुए थे। लेकिन बाद में फ़ॉर्मूला देने वाले का ही तबादला कर दिया गया। पूरी योजना ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
दूसरी बात यह है कि सोमवार को निशंक ने ज़ोर देकर कहा कि छात्रों और शिक्षकों से बात कर मामला सुलझा लिया गया है। पर उन्होंने यह नहीं बताया कि किन छात्रों से बात की गई है।
यदि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ से बात नहीं की तो मामला सुलटाने का कोई मतलब नहीं है। वामपंथी छात्र संघ आन्दोलन कर रहे हैं, यदि उनसे बात नहीं की गई तो आन्दोलन कैसे ख़त्म होगा, इस सवाल का जवाब निशंक ही दे सकते हैं।  

किससे की है बात?

लेकिन मंत्री की दूसरी बात अधिक विवादास्पद है। उन्होंने कहा कि ‘विश्वविद्यालय में दो तरह के छात्र हैं, एक वे जो पढ़ाई चाहते हैं, दूसरे वे जो पढ़ाई नहीं चाहते हैं और ऐसे छात्र ही आन्दोलन कर रहे हैं।’ यदि आप आन्दोलन करने वालों को ऐसा छात्र मानते हैं जो पढ़ाई नहीं करना चाहते तो फिर उनसे बात करने का कोई तुक भी नहीं है। 

 विश्वविद्यालय छात्र संघ ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उसने कहा है कि वाइस चांसलर पर उनका कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा : 

‘जेएनयू प्रशासन का कहना है कि इस सेमेस्टर में यूटिलिटी फ़ीस और सेवा शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगले सेमेस्टर या उसके बाद यह फ़ीस ली जा सकती है। इसका मतलब यह है कि फ़ीस वृद्धि वापस नहीं ली जा रही है।’


जेएनयूएसयू के बयान का हिस्सा

छात्र संघ का यह भी कहना है कि प्रशासन बैठक बुलाए और उसमें सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो और फ़ीस बढ़ोतरी पूरी तरह वापस ली जाए, तभी बात आगे बढ़ सकती है। ये बातें मानव संसाधन मंत्री की बातों से मेल नहीं खाती हैं। इससे साफ़ है कि सरकार छात्रों पर सिर्फ़ दबाव डाल रही है, वह खुद किसी दबाव में नहीं आ रही है।

वाइस चांसलर का मुद्दा

वाइस चांसलर जगदीश कुमार के पद पर बने रहने पर भी ज़ोरदार लड़ाई है। छात्र संघ ही नहीं, जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने भी वाइस चांसलर को हटाने की माँग की है। बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी को छोड़ कर सभी छात्र संघ जगदीश कुमार को हटाने की माँग कर रहे हैं।
मानव संसाधन मंत्री ने वाइस चांसलर को हटाने से साफ़ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जगदीश कुमार अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें हटाने की कोई ज़रूरत नहीं है। इससे यह तो साफ़ हो गया है कि सरकार छात्रों की कोई माँग नहीं मान रही है, उल्टे उन पर दबाव डाल रही है कि वह हड़ताल ख़त्म करें। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें