नफ़रत के ख़िलाफ़ तनकर खड़े होने वाले उत्तराखंड के कोटद्वार के बहादुर जिम मालिक 'मोहम्मद दीपक' ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाक़ात की। मुलाक़ात के बाद दीपक ने कहा कि राहुल गांधी ने उनको बहुत प्रोत्साहन दिया और कहा कि वे जल्द ही कोटद्वार आएंगे और उनके जिम की सदस्यता लेंगे। दीपक कुमार मुस्लिम के ख़िलाफ़ नफ़रत का विरोध कर सुर्खियों में आए थे। इसके बाद उनको भी विरोध झेलना पड़ा और उनके जिम की सदस्यता अचानक घट गई और उनकी आर्थिक हालत ख़राब हो गई।

इस बीच, राहुल गांधी ने खुद दीपक को फोन किया और मिलने के लिए बुलाया। मुलाकात में राहुल गांधी ने दीपक से कहा कि आपने कोई गलत काम नहीं किया, जो किया बहुत अच्छा किया। उन्होंने दीपक की तारीफ की और कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं। दीपक ने कहा, "राहुल जी ने वादा किया कि वे कोटद्वार आएंगे और जिम में सदस्य बनेंगे। राहुल जी ने मेरे परिवार से भी बात की। अगर वे मेरे जिम में आएंगे और व्यायाम करेंगे तो मुझे बहुत खुशी होगी।"
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राहुल गांधी ने दीपक को सोनिया गांधी से भी मिलवाया। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की और लिखा कि दीपक ने एकता, भाईचारा और बहादुरी का उदाहरण दिया है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा है। राहुल गांधी ने दीपक को 'मोहब्बत की दुकान का योद्धा' कहा।

मोहम्मद दीपक कौन?

मोहम्मद दीपक तब सुर्खियों में आए जब 26 जनवरी को कोटद्वार में एक 70 साल के बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान पर कुछ लोग पहुंचे। दुकान का नाम था 'बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर'। उन लोगों ने दुकानदार से कहा कि नाम से 'बाबा' हटा दो, क्योंकि यह शब्द सिर्फ हिंदू देवताओं के लिए है। बताया जाता है कि ये लोग बजरंग दल से जुड़े थे। बुजुर्ग दुकानदार डर गए थे। उसी समय पास में दीपक कुमार अपने दोस्त की दुकान पर थे। उन्होंने यह सब देखा और आगे आकर विरोध किया। 

नफ़रत के ख़िलाफ़ खड़े हुए दीपक से जब भीड़ ने नाम पूछा तो उन्होंने बहादुरी से कहा, 'मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।' यह वीडियो वायरल हो गया और लोगों ने उनकी बहुत तारीफ की। उन्होंने इंसानियत दिखाई और उनकी मदद की।

जिम पर क्या असर पड़ा?

इस घटना के बाद दीपक के 'हल्क जिम' पर बहुत बुरा असर हुआ। पहले जिम में रोज 150 सदस्य आते थे, लेकिन फिर सिर्फ 12-15 लोग ही आने लगे। लोग डर गए। 31 जनवरी को कथित तौर पर बजरंग दल के कुछ लोग जिम के बाहर जमा हुए और उन्होंने विरोध किया। पुलिस ने उन्हें रोका, लेकिन सदस्यों में डर फैल गया। कई सदस्यों ने जिम छोड़ दिया।

दीपक का जिम किराए की इमारत की दूसरी मंजिल पर है, जहां हर महीने 40 हजार रुपये किराया देना पड़ता है। उनकी फैमिली की यही कमाई है। छह महीने पहले उन्होंने घर बनवाया था, जिसका लोन हर महीने 16 हजार रुपये चुकाना पड़ता है। पैसे की बहुत तंगी हो गई। इस तनाव से दीपक की सेहत भी बिगड़ गई। उनकी बेटी ने स्कूल जाना बंद कर दिया था, अब वे खुद उसे छोड़ने जाते हैं। वह कहते हैं कि पहले उन्हें धमकियां मिल रही थीं, लेकिन अब वे बंद हो गई हैं।
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वकीलों से भी मिला समर्थन

जब यह खबर फैली कि जिम की सदस्यता बहुत कम हो गई, तो कई लोगों ने मदद की। सुप्रीम कोर्ट के 15 सीनियर वकीलों ने आगे आकर उनके जिम की सदस्यता ली। हर वकील ने 10 हजार रुपये देकर एक साल की सदस्यता ली। यह पैसे जरूरतमंद युवाओं की सदस्यता के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे जिम को सहारा मिला।

दीपक की आगे की योजना क्या?

मोहम्मद दीपक अब देश में बढ़ती नफ़रत के ख़िलाफ़ 'इंसानियत जोड़ो यात्रा' शुरू करने की योजना बना रहे हैं। उनके दोस्त विजय रावत के साथ उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो डाला। इसका मक़सद एकता, मानवता, प्यार और करुणा का संदेश फैलाना है। वे लोगों से राय मांग रहे हैं कि क्या यह यात्रा करनी चाहिए। यह घटना दिखाती है कि अच्छे काम का सम्मान होता है और लोग साथ देते हैं। दीपक की बहादुरी ने कई दिल जीते हैं।