नीट के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला देशभर में जारी है।
जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा- “मुझे लगता है कि अब सीबीएसई के इस मुद्दे का उचित विश्लेषण करने की जरूरत है। क्या नीट भेदभावपूर्ण है? क्या गरीब पृष्ठभूमि के छात्रों को अवसरों से वंचित किया जा रहा है? महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों ने भी NEET पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ईमानदारी और नीट को डिजाइन और संचालन करने के तरीके पर भी गंभीर सवाल हैं। पिछले दशक में एनसीईआरटी ने अपनी सारी व्यावसायिकता खो दी है।”
नीट के खिलाफ डीएमके शुरू से ही विरोध में है। डीएमके ने परीक्षा की पवित्रता को नष्ट करने के लिए एनटीए की आलोचना की है और कहा है कि मोदी सरकार एक "दर्शक" है और कोचिंग केंद्रों का समर्थन करने से ज्यादा कुछ नहीं है। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'चुप्पी' पर सवाल उठाया है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
नतीजों पर जब सवाल बढ़े तो एनटीए ने बताया कि 1563 छात्रों को गलत सवाल ट्राई करने पर ग्रेस मार्क्स दिया गया था। हालांकि उससे पहले पेपर लीक की खबर भी आ चुकी थी। एनटीए ने पहले तो ग्रेस मार्क्स देने का बचाव करने लगी। लेकिन सरकार ने छात्रों का मूड भांप लिया। सरकार ने तब सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ग्रेस मार्क्स अब रद्द कर दिए गए हैं। 1563 छात्रों को फिर से नीट यूजी परीक्षा देना होगी।