भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है। यह वास्तविक विकास है या खोखला दावा? एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की असाधारण आर्थिक उपलब्धि बताया है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर आंकड़ों की बाजीगरी करने और आम लोगों की वास्तविक आर्थिक समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार केवल आँकड़ों का जश्न मना रही है, जबकि देश की जनता बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती आर्थिक असमानता से जूझ रही है। वहीं कांग्रेस के अन्य नेताओं ने जीडीपी के आँकड़ों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं।

विपक्ष ने ये सवाल तब उठाने शुरू किए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी वृद्धि को देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि यह आंकड़ा उन लोगों के दावों का जवाब है जो लगातार भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहे थे।

आम आदमी जश्न नहीं मना रहा: खड़गे

प्रधानमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भले ही जीडीपी ग्रोथ का जश्न मना रहे हों, लेकिन आम लोगों के पास ऐसा करने की कोई वजह नहीं है। खड़गे ने कहा कि देश के लोग तीन बड़ी समस्याओं से परेशान हैं-
  1. अभूतपूर्व बेरोजगारी
  2. असहनीय महंगाई
  3. लगातार बढ़ती आर्थिक असमानता
उनका आरोप है कि इन तीनों समस्याओं के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। खड़गे ने कहा, "बेहिसाब 'क्रोनी कैपिटलिज़्म' (खास दोस्तों को फायदा पहुँचाने वाला पूंजीवाद) ही आपकी इकलौती आर्थिक नीति है। आपकी सरकार ने 2014 से अब तक 16 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के कॉर्पोरेट लोन माफ़ किए हैं। और हाल ही के एक चौंकाने वाले मामले में 22,006 करोड़ रुपये के माने गए दावों के बदले लेनदारों को सिर्फ़ 6.5 करोड़ रुपये ही मिल पाए, यानी 99.97% का नुकसान हुआ।" खड़गे ने कहा कि भारतीयों को सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने की आपकी बार-बार की नसीहतें ज़मीनी हकीकत को दिखाती हैं।

खड़गे ने दावा किया कि देश में बेरोजगारी पिछले 50 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर है। उन्होंने कहा कि लगभग 40 प्रतिशत युवा स्नातक बेरोजगार हैं और जुलाई 2026 तक 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हर छह युवाओं में से एक के पास रोजगार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा पूरा नहीं हुआ।

महंगाई को लेकर सरकार पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि खुदरा महंगाई 19 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाद्य तेल, चावल, दूध और रसोई में इस्तेमाल होने वाली दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी भी आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। उनका कहना था कि मध्यम वर्ग किसी तरह अपना खर्च चला रहा है, जबकि गरीबों की स्थिति और भी कठिन हो गई है।

आर्थिक असमानता पर भी निशाना

खड़गे ने आरोप लगाया कि देश में आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि देश की कुल संपत्ति का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा केवल शीर्ष एक प्रतिशत लोगों के पास है, जबकि निचले 50 प्रतिशत लोगों के हिस्से में केवल 15 प्रतिशत संपत्ति है। उनका आरोप है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से अमीर और अमीर हुए हैं, जबकि गरीबों की स्थिति कमजोर हुई है।

'कागजी शेर का कागजी विकास': पवन खेड़ा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार के जीडीपी आँकड़ों को 'कागजी शेर का कागजी विकास' बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की 2025 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय आय के आँकड़ों को पद्धति और आँकड़ों की गुणवत्ता के आधार पर 'सी' ग्रेड दिया गया था।

खेड़ा ने कहा कि अगर 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को सही भी मान लिया जाए तब भी यह देखना ज़रूरी है कि इसका फायदा आखिर किसे मिला। उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी आबादी युवा और कृषि पर निर्भर है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या इस आर्थिक वृद्धि का लाभ इन वर्गों तक पहुंचा है।

जयराम रमेश ने कहा- आंकड़ों की बाजीगरी

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार पर जीडीपी की गणना का तरीका बदलकर वास्तविक आर्थिक स्थिति छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पूरी तरह पारदर्शी आंकड़े जारी करे तो वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर इससे काफी कम हो सकती है। जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार ने इस वर्ष जीडीपी की गणना की पद्धति में दो बार बदलाव किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार वास्तविक और नाममात्र जीडीपी के बीच का अंतर केवल 2.3 प्रतिशत है, जबकि इसी अवधि में थोक महंगाई लगभग 9 प्रतिशत रही। उनके अनुसार, इन दोनों आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर कई सवाल खड़े करता है।
AAP दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पीटीआई से कहा, "चाहे राम मंदिर के चंदे में गड़बड़ी हो या चंडीगढ़ मेयर चुनाव में धांधली... क्या आप उस सरकार से GDP के आंकड़े ईमानदारी से पेश करने की उम्मीद कर सकते हैं? यह उम्मीद करना ही गलत है। सरकार निश्चित रूप से आंकड़ों में हेर-फेर कर रही है क्योंकि वह किसी तरह अपने खिलाफ लोगों के गुस्से को शांत करना चाहती है। इसीलिए ये झूठे आंकड़े बनाए और पेश किए जा रहे हैं।"

CJP ने भी साधा निशाना

कॉकरोच जनता पार्टी CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक आदिवासी गांव के सरकारी स्कूल के जर्जर शौचालय की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'सर, 7.8 प्रतिशत ग्रोथ।' उनका इशारा यह था कि आर्थिक वृद्धि के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

बीजेपी ने किया सरकार का बचाव

बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर इसलिए और भी अहम है क्योंकि इसी दौरान दुनिया कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही थी।

उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव, तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता, सप्लाई चेन में बाधाएँ और वैश्विक आर्थिक दबाव के बावजूद भारत ने मज़बूत आर्थिक प्रदर्शन किया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इसी अवधि में कई बड़े देशों की आर्थिक वृद्धि भारत से काफी कम रही। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कनाडा की वृद्धि दर लगभग 1.5 प्रतिशत रही, जर्मनी की करीब 1 प्रतिशत, ब्रिटेन की लगभग 2.1 प्रतिशत, अमेरिका की करीब 2 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया की लगभग 3.7 प्रतिशत, और मलेशिया की करीब 6 प्रतिशत रही। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इन आंकड़ों से साफ़ है कि भारत ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।

सरकार ने आर्थिक प्रबंधन को बताया सफलता की वजह

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि प्रभावी आर्थिक प्रबंधन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री और सरकार की आर्थिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती से आगे बढ़ रही है।

जीडीपी के दावे पर बहस तेज़

बहरहाल, 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े सामने आने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। सरकार इसे मजबूत अर्थव्यवस्था और बेहतर आर्थिक प्रबंधन का प्रमाण बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल जीडीपी के आंकड़े आर्थिक स्थिति की पूरी तस्वीर नहीं दिखाते।

विपक्ष का तर्क है कि जब तक बेरोजगारी, महंगाई, आय में असमानता और आम लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं दिखेगा, तब तक विकास के दावों पर सवाल उठते रहेंगे। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।