दिल्ली में तिरंगा मार्च के दौरान अभिजीत दिपके और AISA प्रमुख नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा है। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, एमके स्टालिन और अरविंद केजरीवाल ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध है। कांग्रेस ने कहा कि वह गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है। वहीं बीजेपी ने प्रदर्शनों को अराजकता फैलाने की कोशिश बताया। 
तिरंगा मार्च से पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को उनके दिल्ली स्थित आवास से हिरासत में ले लिया गया। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की प्रमुख नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया। दोनों युवा नेताओं की हिरासत के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और राष्ट्रीय ध्वज फहराने की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।

ममता बोलीं- 'आपकी दीदी आपके साथ है'

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अभिजीत दिपके की हिरासत पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज थामने के लिए दिपके को हिरासत में लिया गया है। ममता बनर्जी ने कहा कि स्वतंत्र भारत में युवाओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का शांतिपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हिरासत में लिया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे 'अघोषित आपातकाल' बताते हुए केंद्र सरकार पर असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
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ममता ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज से डर रही है और युवाओं को चुप कराने की कोशिश कर रही है। CJP के तीन नेताओं अभिजीत दिपके, अशुतोष रांका और सौरव दास का नाम लेते हुए ममता ने कहा कि वे देश के युवाओं के साहस, विवेक और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने लिखा, 'आपकी दीदी आपके साथ मजबूती से खड़ी है।'

अखिलेश ने नेहा बोरा की लोकेशन पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि दिल्ली पुलिस देर रात तक यह क्यों नहीं बता रही थी कि नेहा बोरा को कहां रखा गया है। अखिलेश के सवाल का मुख्य केंद्र हिरासत में लिए गए व्यक्ति की स्थिति और उसके ठिकाने की जानकारी था। विपक्षी नेताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार, सहयोगियों और कानूनी प्रतिनिधियों को उसकी स्थिति की जानकारी मिलनी चाहिए।

दोनों को तुरंत रिहा किया जाए: स्टालिन

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने की जानकारी नहीं देना गैरकानूनी और अमानवीय है। स्टालिन ने केंद्र सरकार से दोनों को तत्काल रिहा करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन को कुचलने की कोशिश उसे और मजबूत कर सकती है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने पर भी सवाल उठाया और उनके इस्तीफे की मांग की। स्टालिन का बयान तब आया है जब विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

केजरीवाल बोले- 'क्या तिरंगा लहराना अपराध है?'

आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कार्रवाई को 'तानाशाही' करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध है। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी दिखाती है कि सरकार उनसे डरी हुई है। एक अन्य पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि अगर भारत में तिरंगा नहीं लहराया जाएगा तो क्या पाकिस्तान में लहराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्हें भारतीय तिरंगे से परेशानी है, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।
केजरीवाल का कहना था कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना देश के प्रति सम्मान और नागरिकों के अधिकार से जुड़ा मामला है। उनके बयान का निशाना केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई थी। हालांकि, इस पूरे विवाद में पुलिस का कहना है कि कार्रवाई राष्ट्रीय ध्वज लहराने के कारण नहीं, बल्कि बिना अनुमति मार्च निकालने और भीड़ जुटाने की आशंका को लेकर की गई।

प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है पार्टी: कांग्रेस

कांग्रेस ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान जारी किया। पार्टी ने कहा कि वह शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है। कांग्रेस ने एक्स पर लिखा कि विपक्ष लोकतंत्र को कमजोर करने और लोगों के वोट देने के अधिकार पर हमला करने की कथित कोशिशों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा।
कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को उठाने वाले लोगों को दबाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। पिछले दो हफ्तों से वे चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं। राहुल गांधी पहले कह चुके हैं कि इन सभी विरोध-प्रदर्शनों का मुद्दा एक ही है।

दिल्ली पुलिस ने दिपके के घर जाकर दिया था नोटिस

अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने से पहले दिल्ली पुलिस के 20 से अधिक कर्मचारी उनके घर पहुंचे थे और उन्हें एक नोटिस दिया था। नोटिस में उनसे ऐसी किसी गतिविधि से दूर रहने को कहा गया था जिससे नागरिकों, व्यापारियों, राहगीरों, मरीजों और अन्य लोगों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
पुलिस ने कहा था कि कनॉट प्लेस के आसपास निषेधाज्ञा लागू है और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी NDMC ने प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं दी है। पुलिस अधिकारियों ने दिपके को यह भी बताया था कि राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है, लेकिन बिना अनुमति मार्च निकालना और भीड़ जुटाना कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा कर सकता है। इस दौरान दिपके ने सवाल किया था कि अगर वे नई दिल्ली नहीं जा सकते तो क्या किसी दूसरी जगह भी नहीं जा सकते। उन्होंने पूछा था, 'मैंने कौन-सा कानून तोड़ा है?' इसके बाद उन्हें झंडे के साथ कनॉट प्लेस जाने से पहले दिल्ली के झंडेवालान स्थित आवास से हिरासत में ले लिया गया।
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नेहा बोरा मंडी हाउस के पास हिरासत में 

AISA प्रमुख नेहा बोरा भी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रही थीं। उन्हें मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया गया। यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब जंतर-मंतर को पिछले सप्ताह विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों की सूची से हटा दिया गया था। प्रदर्शनकारियों और छात्र संगठनों ने इस फैसले पर भी आपत्ति जताई है। जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। इसे प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के बाद विरोध करने वाले समूहों ने सवाल उठाया कि अब वे अपनी मांगें कहां और किस तरह रखेंगे।

तिरंगा मार्च का विवाद क्यों?

यह विवाद केवल अभिजीत दिपके और नेहा बोरा की हिरासत तक सीमित नहीं है। इसके पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा विरोध भी है। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूची में नामों को जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी मतदाता का नाम उचित प्रक्रिया के बिना नहीं हटाया जाना चाहिए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को 'वोट चोरी' के आरोपों से भी जोड़ा है। वहीं, बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक बताती रही है और कहती है कि विपक्ष चुनावी हार स्वीकार नहीं कर पा रहा है। इस बीच, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और कनॉट प्लेस में प्रस्तावित मार्च की अनुमति नहीं मिलने से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर भी बहस तेज हुई है।