पीएम मोदी पर 18 अप्रैल 2026 को आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) तोड़ने का मामला तूल पकड़ रहा है। शिक्षा विदों और पूर्व नौकरशाहों समेत 700 से ज्यादा चिंतित नागरिकों ने चुनाव आयोग में शिकायत की है। मोदी पर देश के नाम संबोधन में नियम तोड़ने का आरोप है।
पीएम मोदी शनिवार को देश को संबोधित करते हुए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) उल्लंघन का विवाद तेज हो गया है। इस संबोधन में मोदी ने विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण विधेयक को हराने का आरोप लगाते हुए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में चुनाव आयोग को दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
18 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। इसमें उन्होंने कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर संविधान संशोधन विधेयक को हराने का आरोप लगाया। उस विधेयक का मकसद विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण को तेजी से लागू करना था। मोदी ने विपक्षी दलों पर इस 'ईमानदार प्रयास' की 'भ्रूण हत्या' करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें इस 'पाप' की कीमत चुकानी पड़ेगी। यह संबोधन सरकारी टीवी-रेडियो, सोशल मीडिया माध्यमों पर लाइव प्रसारित किया गया, जिन पर जनता का पैसा लुटाया गया।
इस संबोधन को लेकर रविवार को सीपीएम (CPM) और सीपीआई (CPI) ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सोमवार (20 अप्रैल 2026) को 700 से अधिक चिंतित नागरिकों ने, जिनमें शिक्षाविद्, कार्यकर्ता और पूर्व नौकरशाह शामिल हैं, चुनाव आयोग को एक हस्ताक्षरित शिकायत सौंपी। शिकायत में प्रधानमंत्री पर MCC का 'स्पष्ट और बिना सोचे समझे नियमों के उल्लंघन' करने का आरोप लगाया गया है।
नागरिकों की शिकायत में कहा गया है: “प्रधानमंत्री ने 18 अप्रैल 2026 को दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का स्पष्ट उल्लंघन किया है।” शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आधिकारिक पद का इस्तेमाल कर सरकारी मशीनरी और जनसंचार माध्यमों के जरिए चुनावी प्रचार और पक्षपाती प्रचार किया गया, जो चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ पहुंचाता है और समान अवसर के सिद्धांत को प्रभावित करता है।
शिकायत में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की धारा VII के खंड 1(a), 1(b) और 4 का हवाला दिया गया है, जो सत्ताधारी दल को आधिकारिक पद, सरकारी संसाधनों, परिवहन या कर्मचारियों का चुनावी लाभ के लिए उपयोग करने से रोकते हैं। शिकायतकर्ताओं ने चुनाव आयोग से तत्काल संज्ञान लेने, संबोधन की सामग्री (ट्रांसक्रिप्ट और प्रसारण) की जांच कराने, उचित दिशा-निर्देश जारी करने और कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “हम विश्वास करते हैं कि आयोग इस शिकायत को उसकी गरिमा और तात्कालिकता के साथ लेगा, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत उसके संवैधानिक कर्तव्य के अनुरूप है, ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित हो सकें।”
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी सोमवार को इस संबोधन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और चुनाव के दौरान 'बीजेपी नेता' की तरह बोल रहे थे।
यह पहला मामला नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान के बांसवाड़ा में मोदी के एक भाषण को लेकर भी MCC उल्लंघन की शिकायत की गई थी, जिसमें कांग्रेस पर देश की संपत्ति इकट्ठा कर मुसलमानों में बांटने का आरोप लगाया गया था। उस समय चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
विपक्षी दलों का कहना है कि ऐसे संबोधन से चुनावी मैदान में समान अवसर प्रभावित होता है। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।