नॉर्वे में पीएम मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय विदेश मंत्रालय और वहां की मीडिया में विवाद हो गया। मोदी बिना कोई सवाल लिए सिर झुकाकर चले गए। नार्वे में भारतीय मीडिया की आज़ादी और मानवाधिकार चर्चा में है।
नार्वे में मोदी मीडिया का सामना नहीं कर सके
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान संयुक्त प्रेस बयान के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेल्ले लिंग स्वेंडसन (Helle Lyng Svendsen) ने पीएम मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की। मोदी के बिना जवाब दिए वहां से चले जाने के वीडियो ने विवाद खड़ा कर दिया। इसी दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) के सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज की नॉर्वे के पत्रकारों के साथ तीखी बहस हुई। सिबी जॉर्ज ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं, प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकारों का मजबूत बचाव किया। उन्होंने कहा, "अगर किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वे कोर्ट जा सकते हैं। हम अपने लोकतंत्र पर गर्व करते हैं।" सोशल मीडिया पर इसको लेकर खासी चर्चा हो रही है, जिसमें भारत की प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटनाक्रम पर टिप्पणी की है।
18 मई 2026 को ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त प्रेस स्टेटमेंट के बाद पीएम मोदी जब वहां से निकल रहे थे, तब पत्रकार और कमेंटेटर हेल्ले लिंग ने जोर-जोर से पूछा: "प्राइम मिनिस्टर मोदी, दुनिया के सबसे आजाद प्रेस (freest press in the world) से कुछ सवाल क्यों नहीं ले रहे हैं?" पीएम मोदी ने कोई जवाब नहीं दिया और चले गए। नॉर्वे की पत्रकार ने इस वीडियो को X पर शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें इसकी उम्मीद थी। उन्होंने नॉर्वे को वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नंबर 1 और भारत को 157वें स्थान पर होने का जिक्र भी किया।
इस घटना ने MEA की बाद की प्रेस ब्रिफिंग में तनावपूर्ण माहौल बना दिया। उसी नॉर्वे की पत्रकार ने MEA अधिकारियों से पूछा: "हम भारत पर भरोसा क्यों करें?" और भारत में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों तथा प्रेस फ्रीडम पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पीएम मोदी भारतीय प्रेस के कठिन सवालों का जवाब देंगे।
MEA के जवाब
MEA सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने पत्रकार को जवाब देते हुए कहा:भारत 5000 साल पुरानी सभ्यता है, जिसने दुनिया को बहुत कुछ दिया है। हम दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार सुनिश्चित करता है। महिलाओं को स्वतंत्रता के पहले दिन से ही मताधिकार और समान अधिकार मिले। "हम समानता में विश्वास करते हैं, मानवाधिकारों में विश्वास करते हैं। अगर किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वे कोर्ट जा सकते हैं। हम लोकतंत्र पर गर्व करते हैं।" भारत में मीडिया का बड़ा ईको सिस्टम है। दिल्ली में ही 200 से ज्यादा टीवी चैनल अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भाषाओं में सक्रिय हैं। हर दिन सैकड़ों ब्रेकिंग न्यूज आती हैं। "लोग भारत के पैमाने को नहीं समझते। कुछ ignorant NGOs की एक-दो रिपोर्ट पढ़कर सवाल पूछ आते हैं।"
सिबी जॉर्ज ने पत्रकार को बीच में बोलने से रोका और कहा, "कृपया मुझे जवाब पूरा करने दें।" उन्होंने भारत के COVID सहायता, G20, AI समिट जैसे मंचों पर वैश्विक विश्वास बनाने के प्रयासों का भी जिक्र किया।
यह घटना पीएम मोदी की 5 राष्ट्रों (UAE, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे, इटली) की यात्रा के दौरान हुई। यह नॉर्वे की पहली पीएम स्तर की यात्रा 43 वर्षों में थी। पीएम मोदी ने यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों, ग्रीन एनर्जी, ट्रेड और आर्कटिक सहयोग पर चर्चा की। नॉर्वे के राजा Harald V ने भी पीएम मोदी को सम्मानित किया।
राहुल गांधी की कड़ी टिप्पणी
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम पर कड़ी टिप्पणी की है। राहुल ने एक्स पर लिखा- जब छिपाने के लिए कुछ नहीं होता, तो डरने की कोई बात नहीं होती। जब दुनिया एक समझौतावादी प्रधानमंत्री (Compromised PM) को कुछ सवालों से घबराते और भागते हुए देखती है, तो भारत की छवि पर क्या असर पड़ता है? राहुल गांधी ने यह बात स्पष्ट नहीं किया कि छिपाने से उनका आशय किस बात से है। राहुल ने नार्वे की उस महिला पत्रकार का वीडियो शेयर किया तो उसने राहुल गांधी से इंटरव्यू देने को कहा। नार्वे की पत्रकार ने राहुल को संबोधित करते हुए ट्वीट भी किया।
हेल्ले लिंग कौन हैं?
हेल्ले लिंग स्वेन्डसन नॉर्वे के अखबार Dagsavisen की कमेंटेटर और पत्रकार हैं। उन्होंने विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा कि नॉर्वे इस सूचकांक में पहले स्थान पर है, जबकि भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारिता में सत्ता से सीधे जवाब मांगना जरूरी है, भले ही यह confrontational (टकरावपूर्ण) हो। उन्होंने मानवाधिकार मुद्दों पर भी सवाल उठाए। उनके और एक सहयोगी ने भारत पर मानवाधिकारों के मुद्दे पर विश्वास करने का सवाल पूछा, लेकिन जवाब में भारत के कोविड प्रबंधन, योग आदि का जिक्र किया गया। स्पाई (जासूस) होने के आरोप का खंडन करते हुए लिंग ने लिखा: “मैं किसी विदेशी सरकार द्वारा भेजी गई जासूस नहीं हूं। मेरा काम पत्रकारिता है।”
भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी की मीडिया इंटरैक्शन की अपनी शैली है और MEA अधिकारी नियमित रूप से ब्रीफिंग करते हैं। यह घटना भारत और पश्चिमी देशों के बीच प्रेस फ्रीडम, मानवाधिकार तथा मीडिया संस्कृति के अलग-अलग नजरियों को उजागर करती है। MEA ने जोर देकर कहा कि भारत नियम-आधारित लोकतंत्र है जहां न्यायपालिका स्वतंत्र है और नागरिकों को पूर्ण अधिकार प्राप्त हैं।