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मोदी 2.0 का एक साल: देश के नाम पीएम की चिट्ठी, कहा - ‘मुझमें कमियाँ हो सकती हैं’

मोदी सरकार 2.0 के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने छह साल की उपलब्धियाँ गिनाई हैं। इसके लिए उन्होंने देश के नाम संबोधन के तौर पर पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने ख़ुद को जनता का प्रधानसेवक बताया है। प्रधानमंत्री ने अपनी उपलब्धियों में उन मुद्दों को भी बताया है जिसपर उनकी जमकर आलोचना होती रही है और कुछ लोग उनको विफल बताते रहे हैं। इन मुद्दों में अनुच्छेद 370 में बदलाव करने से लेकर नागरिकता संशोधन क़ानून, लोकतंत्र, विकास, ‘सबका साथ, सबका विकास सबका विश्वास’ शामिल हैं। उन्होंने इतिहास के सबसे बड़े संकटों में से एक कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन का सामना कर रहे अप्रवासी मज़दूरों की दिक्कतों का बस कुछ लाइनों में ज़िक्र भर किया।

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पिछले साल 30 मई को मोदी सरकार 2.0 बनी थी। अपने पत्र में उस तारीख़ के बारे में प्रधानमंत्री ने लिखा है, ‘इसी तारीख़ ने पिछले साल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय शुरू किया। यह कई दशकों के बाद था कि देश के लोगों ने पूर्ण बहुमत के साथ पूर्ण सरकार को वापस वोट दिया।’ उन्होंने लिखा कि सामान्य दिनों में वह जनता के बीच होते लेकिन फ़िलहाल की परिस्थितियाँ उन्हें ऐसा करने की इजाज़त नहीं देती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज 130 करोड़ लोग देश के विकास मार्ग से जुड़े हैं और एकीकृत महसूस करते हैं। 'जन शक्ति' और 'राष्ट्र शक्ति' के प्रकाश ने पूरे देश को प्रज्वलित किया है। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विकास’ के मंत्र से संचालित भारत सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।"

प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र की तारीफ़ में लिखा, ‘आपने जिस तरह से लोकतंत्र की सामूहिक ताक़त का प्रदर्शन किया है वह पूरी दुनिया के लिए एक राह दिखाने वाली रोशनी है।’

मोदी ने कहा, 'पिछले पाँच वर्षों में देश ने देखा कि कैसे प्रशासनिक तंत्र ने ख़ुद को यथास्थिति और भ्रष्टाचार के दलदल से मुक्त किया और साथ ही कुशासन से भी।’

मोदी ने लिखा, ‘2014 से 2019 तक भारत का क़द काफी बढ़ गया। ग़रीबों की गरिमा बढ़ गई।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘2019 में भारत के लोगों ने न केवल निरंतरता के लिए मतदान किया, बल्कि भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के एक सपने के लिए भी। भारत को एक वैश्विक नेता बनाने का सपना। पिछले एक साल में लिए गए फ़ैसले इस सपने को पूरा करने की दिशा में हैं।’

पिछले एक साल में कुछ फ़ैसलों के बारे में प्रधानमंत्री ने लिखा कि इन पर व्यापक रूप से चर्चा हुई। उन्होंने लिखा, ‘अनुच्छेद 370 ने राष्ट्रीय एकता और एकीकरण की भावना को आगे बढ़ाया। भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सर्वसम्मति से दिया गया राम मंदिर का फ़ैसला, सदियों से चली आ रही बहस का एक सौहार्दपूर्ण अंत लेकर आया। तीन तलाक़ की बर्बर प्रथा को इतिहास के कूड़ेदान तक सीमित कर दिया गया है। नागरिकता अधिनियम में संशोधन भारत की सहानुभूति और समावेश की भावना की अभिव्यक्ति था।’

इस साल के हर दिन मेरी सरकार ने इन फ़ैसलों को लेने और लागू करने के लिए चौबीसों घंटे पूरे जोश के साथ काम किया है।


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने कोरोना का भी ज़िक्र किया, लेकिन इतिहास में सबसे बड़े संकट से गुज़र रहे प्रवासी मज़दूरों की समस्या पर ज़्यादा कुछ नहीं बोला। उन्होंने सिर्फ़ इतना ही लिखा, 'इतने बड़े संकट में यह निश्चित रूप से दावा नहीं किया जा सकता है कि किसी को भी असुविधा या मुश्किल नहीं हुई होगी। लघु उद्योगों में हमारे मज़दूर, प्रवासी कामगार, कारीगर और शिल्पकार, फेरीवाले और ऐसे साथी देशवासी ज़बरदस्त पीड़ा से गुज़रे हैं। हम उनकी परेशानियों को कम करने के लिए एकजुट और दृढ़ तरीके से काम कर रहे हैं।'

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प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज और आत्मनिर्भर भारत का भी उल्लेख किया।

मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, ऋण योजना, जल जीवन मिशन, आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल खोलने, मुफ़्त गैस, बिजली कनेक्शन, आवास आदि योजनाओं की सफलता के गुणगान किए। उन्होंने  पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए तूफ़ान का ज़िक्र किया। 

प्रधानमंत्री ने पत्र के आख़िरी हिस्से में लिखा, 'मैं दिन-रात काम कर रहा हूँ। मुझमें कमियाँ हो सकती हैं लेकिन हमारे देश में ऐसी कुछ भी कमी नहीं है।'

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