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फ़ोटो क्रेडिट- @UnivofDelhi

फ़्री वैक्सीन के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देने वाले आदेश पर विवाद

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उस आदेश पर विवाद हो गया है जिसमें उसने देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से कहा है कि वे फ़्री वैक्सीन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने वाले पोस्टर लगाएं। कई शिक्षकों ने इस फरमान का विरोध किया है और कहा है कि टीकाकरण अभियान का राजनीतिकरण किया जा रहा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात को लेकर आलोचना होती रही है कि वे किसी भी काम का ज़्यादा प्रचार करते हैं। 

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‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने कहा है कि यूजीसी की ओर से तमाम विश्वविद्यालयों को भेजे गए ई-मेल में कहा गया है कि केंद्र सरकार 21 जून से 18 साल से ऊपर के लोगों को फ़्री वैक्सीन लगाने जा रही है। इसलिए सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज अपने संस्थानों में हिंदी और अंग्रेजी में इसे लेकर होर्डिंग्स-बैनर लगवाएं। सूचना मंत्रालय की ओर से मंजूर किए गए होर्डिंग्स-बैनर के डिजाइन को भी ई-मेल में अटैच किया गया है। 

इस डिजाइन में हिंदी और अंग्रेजी में लिखा है- थैंक यू पीएम मोदी। दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों ने ऐसा मेल आने की बात स्वीकार की है। 

नहीं आया ई-मेल 

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में इसके पोस्टर्स लगवाए गए हैं। जबकि डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने कहा है कि उन्हें यूजीसी की ओर से ऐसा कोई ई-मेल नहीं आया है और उन्होंने ये पोस्टर्स लोगों को जागरूक करने के लिए लगाए हैं। जामिया मिल्लिया इसलामिया की ओर से भी ऐसे पोस्टर्स को लेकर यूजीसी से निर्देश मिलने की बात कही गई है। 

केंद्र से सहायता प्राप्त तकनीकी संस्थानों को भी इस तरह का संदेश भेजा गया है। हालांकि महाराष्ट्र और दिल्ली के कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने ऐसा किसी निर्देश मिलने से इनकार किया है। 

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टीचर्स ने जताया एतराज

डीयू के एसोसिएट प्रोफ़ेसर राजेश झा ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ से कहा है कि ऐसे वक़्त में जब विश्वविद्यालय माली संकट का सामना कर रहे हैं, जर्नल्स को रिन्यू करवाने और लैब के उपकरणों के लिए पैसा नहीं है, यूजीसी हमसे पोस्टर लगवाने के लिए कह रहा है। झा ने कहा कि इसकी क्या ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज सरकार के राजनीतिक एजेंडे के प्रचार के लिए नहीं हैं। 

इसी तरह डीयू टीचर्स एसोसिएशन की सदस्य आभा देव हबीब ने कहा कि तालीमी इदारे पिछले 6-7 साल से हुक़ूमत के एजेंडे के प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के पोस्टर लगवाने का हुकुम सिर्फ़ प्रोपेगेंडा है। 

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