कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और 5 किलो वाले छोटे सिलेंडरों के दाम में बढ़ोतरी विधानसभा चुनाव ख़त्म होते ही क्यों हो गयी? क्या अब गैस के बाद डीजल-पेट्रोल की बारी है? लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तो कम से कम यही कहा है। उन्होंने एलपीजी के दाम बढ़ाए जाने को 'चुनावी बिल' बताया और कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर बोझ डाल दिया है। राहुल ने लिखा, 'पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीज़ल पर।' राहुल की पोस्ट के बाद ही मीडिया में सूत्रों के हवाले से ख़बर आ गई कि सरकार डीजल-पेट्रोल पर 4-5 रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस पर 40-50 रुपये बढ़ाने पर विचार कर रही है।
राहुल का यह हमला तब आया है जब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की क़ीमतों में एक दिन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो गई है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 993 रुपये बढ़कर 3071.50 रुपये हो गई है। पहले यह 2078.50 रुपये थी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बढ़ोतरी पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
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राहुल गांधी का हमला

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, 'मैंने पहले ही कहा था कि चुनाव के बाद महंगाई का असर दिखेगा। आज कमर्शियल गैस सिलेंडर 993 रुपये महंगा हो गया। एक ही दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी। यह चुनावी बिल है। फरवरी से अब तक- 1380 रुपये की बढ़ोतरी। सिर्फ 3 महीनों में 81% का उछाल।'
राहुल ने चेतावनी दी कि यह बढ़ोतरी चाय की दुकानों, ढाबों, बेकरी, होटलों और मिठाई की दुकानों पर असर डालेगी। आखिरकार आम आदमी की थाली भी महंगी हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'पहला प्रहार गैस पर, अगला प्रहार पेट्रोल-डीजल पर होगा।'

पिछले तीन महीनों में कितनी बढ़ी कीमत?

कमर्शियल गैस सिलेंडर पर मार्च में 100 रुपये से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद अप्रैल में क़रीब 200 रुपये की बढ़ोतरी और 1 मई को 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई। इस तरह तीन महीनों में कुल बढ़ोतरी 1300 से ज्यादा की हो चुकी है।

एलपीजी

घरेलू गैस पर कोई असर नहीं

घरेलू इस्तेमाल के 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में यह अभी भी 913 रुपये में मिल रहा है। सरकार ने आम परिवारों को इस बढ़ोतरी से बचाया है, लेकिन छोटे खाने-पीन के कारोबार वालों पर बोझ बढ़ गया है।

अन्य विपक्षी नेताओं का आरोप

कांग्रेस के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही मोदी सरकार ने कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में करीब 1000 रुपये की बढ़ोतरी कर दी। इससे करोड़ों छोटे खाने वाले व्यवसाय और लोग प्रभावित होंगे।
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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सिलेंडर महंगा होने से रोटी-थाली महंगी हो जाएगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "सिलेंडर महंगा नहीं होता, रोटी-थाली महंगी होती है। ये बात वही जानता है जो ख़ुद ख़रीदकर खाता है, वो नहीं जो दूसरों के यहाँ जाकर खाता है या दूसरों की थाली से चुराता है। सिलेंडर महंगा करना था तो सीधे 1000 रुपये महंगा कर देते। 1000 में 7 रुपये कम करके ये भाजपावाले किस पर एहसान कर रहे हैं? भाजपा ‘महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी व मंदी’ पर निंदा प्रस्ताव कब लाएगी?"
शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने एलपीजी दाम बढ़ाने जाने की ख़बर को साझा करते हुए लिखा है कि 'तो अब इसकी शुरुआत होती है। चुनाव की वजह से मिली राहत अब खत्म हो रही है।'
तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई के नेताओं ने भी कहा कि चुनाव के तुरंत बाद कीमत बढ़ाना सरकार की 'जन-विरोधी सोच' को दिखाता है।

हमने पहले ही कहा था: टीएमसी

टीएमसी ने कहा है कि गैस के दाम में बढ़ोतरी को लेकर हमने यह पहले ही कहा था और अब वह हो गया। इसने कहा, 'बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के महज कुछ दिनों के अंदर भाजपा सरकार ने पूरे देश में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी है। एक सिलेंडर की कीमत 993 रुपये तक बढ़ा दी गई है। इसके अलावा ऑटो में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की कीमत भी 6.44 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी गई है। यह छोटे कारोबारियों, गरीब और मजबूर मजदूरों, ऑटो ड्राइवरों, दफ्तर जाने वालों और रोजाना सफर करने वाले आम लोगों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत है।'
टीएमसी ने कहा, "पूरे चुनाव अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट ने लोगों से साफ-साफ झूठ बोला। उन्होंने जानबूझकर इन कीमतों में बढ़ोतरी को टाल दिया ताकि वोटिंग के समय लोगों में गुस्सा न फैले और लोग बेखबर रहें। अब चुनाव खत्म होते ही ‘महंगाई वाला मोदी’ ने एक बार फिर आम लोगों की पीठ में छुरा घोंप दिया है। प्रधानमंत्री के लिए यह बेहद शर्मनाक बात है! और यह सिर्फ पहला वार है। जैसे ही चुनाव के नतीजे आएंगे, भाजपा घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें भी बढ़ा देगी। लोग इस धोखे को कभी नहीं भूलेंगे।"

विपक्ष का कहना है कि पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुदुचेरी में विधानसभा चुनावों के मतदान खत्म होने के सिर्फ दो दिन बाद यह बढ़ोतरी की गई है।

क्यों बढ़ी कीमत?

तेल कंपनियां हर महीने अंतरराष्ट्रीय कीमतों और डॉलर की कीमत के आधार पर एलपीजी की कीमत तय करती हैं। हाल के महीनों में चुनाव चल रहे थे और इस बीच बढ़ोतरी ज़्यादा नहीं हुई है। इस समय पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रास्तों पर दिक्कतों की वजह से कच्चे तेल और गैस की कीमतें विश्व स्तर पर बढ़ गई हैं। भारत अपनी ज़रूरत की अधिकतर एलपीजी विदेश से आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का असर यहां भी पड़ रहा है।
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क्या कहते हैं छोटे व्यापारी?

चाय की दुकान, ढाबा और छोटे रेस्तरां चलाने वाले लोगों में चिंता है। वे कह रहे हैं कि खाना पकाने का खर्च बढ़ने से उन्हें या तो कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी या मुनाफा कम करना पड़ेगा। दोनों ही हालत में आम ग्राहक पर बोझ आएगा।

अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन राहुल गांधी और विपक्ष का आरोप है कि पहले गैस, फिर ईंधन की बारी आने वाली है। सरकार की तरफ से अभी तक इस बढ़ोतरी पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। तेल कंपनियों ने कहा है कि कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से संशोधित की गई हैं।