अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली नहीं आएंगे, जबिक वह मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि 'हमें उम्मीद है कि मंत्री डॉ. जयशंकर दिल्ली से अन्य लोगों के साथ मुंबई में हमारे साथ शामिल होंगे।'
एस जयशंकर और मार्को रुबियो (फाइल फोटो)
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले ही मोदी सरकार की विदेश नीति पर बड़ा बवाल हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रुबियो की विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुंबई में संभावित मुलाकात को लेकर तंज में कहा कि 'मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है।'
राहुल गांधी की यह टिप्पणी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा है कि रुबियो मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों से मिलेंगे और उम्मीद है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी वहां पहुंचेंगे। कांग्रेस ने सवाल किया कि भारत के विदेश मंत्री की बैठक की जानकारी अमेरिकी राजदूत क्यों दे रहे हैं और विदेश मंत्रालय इस पर स्पष्टता क्यों नहीं दे रहा। राहुल ने आरोप लगाया कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस मामले में असमंजस में हैं और प्रधानमंत्री मोदी को इस पर स्थिति साफ़ करनी चाहिए।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। मोदी जी, आपके विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि आखिर क्या हो रहा है। आप इस बारे में कुछ साफ़ करना चाहेंगे। यदि आप नहीं चाहते कि मैं ऐसा करूं।'
राहुल गांधी के इस बयान में 'कर्मचारी' शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक तंज के तौर पर किया गया है। उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि अमेरिकी विदेश मंत्री की ओर से भारतीय विदेश मंत्री को मुंबई बुलाए जाने की बात भारत की कूटनीतिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े करती है। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि अमेरिकी विदेश मंत्री देश की राजधानी नहीं आकर मुंबई और जामनगर क्यों जा रहे हैं।
गोर ने जयशंकर की जानकारी क्यों दी?
इस विवाद की मुख्य वजह अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का वह बयान है, जिसमें उन्होंने रुबियो की मुंबई में भारतीय अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक की जानकारी दी। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में एक संवाद सत्र के दौरान गोर ने कहा था कि रुबियो मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी दिल्ली से दूसरे अधिकारियों के साथ मुंबई पहुँचकर इस बैठक में शामिल होंगे।गोर के इस बयान के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी अमेरिकी राजदूत क्यों दे रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की जानकारी आम तौर पर भारत के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता या संबंधित भारतीय अधिकारियों की ओर से दी जानी चाहिए।
कांग्रेस ने यह भी पूछा कि अगर रुबियो की जयशंकर से मुलाकात तय है तो भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बारे में साफ़ जानकारी क्यों नहीं दी है।
'भारतीय विदेश मंत्री की बैठकों की घोषणा कौन करेगा'
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत की ओर से रुबियो की आगामी मुंबई यात्रा के बारे में अतिरिक्त जानकारी देना कोई असाधारण बात नहीं है। इसी तरह, रुबियो का भारत सरकार के अधिकारियों से मिलना भी सामान्य कूटनीतिक गतिविधि हो सकती है।
लेकिन रमेश ने खास तौर पर उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें गोर ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि विदेश मंत्री जयशंकर भी दिल्ली से दूसरे अधिकारियों के साथ मुंबई पहुंचेंगे। रमेश ने सवाल किया कि आखिर कब से भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की घोषणा विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे देश के राजदूत करने लगे हैं?
कांग्रेस का कहना है कि विदेश मंत्री की बैठक से जुड़ी जानकारी भारतीय पक्ष की ओर से स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए। पार्टी ने इस मामले में विदेश मंत्रालय की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। इस विवाद का एक अहम पहलू यही है कि कांग्रेस केवल रुबियो की यात्रा के कार्यक्रम पर सवाल नहीं कर रही, बल्कि यह भी पूछ रही है कि भारत की कूटनीतिक गतिविधियों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी किसकी ओर से और किस तरीके से दी जा रही है।
पवन खेड़ा क्या बोले?
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट कर अमेरिकी राजदूत के बयान पर सवाल उठाए। खेड़ा ने दावा किया कि अमेरिकी राजदूत ने पुष्टि की है कि रुबियो दिल्ली नहीं आएंगे और उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को मुंबई बुलाया है। उन्होंने इसे मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की कूटनीतिक स्थिति का नया गिरता स्तर बताया।खेड़ा ने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम से विदेश मंत्रालय के अधिकारियों में असमंजस की स्थिति है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के भीतर से उन्हें जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक़ अधिकारी इस मामले को लेकर उलझन में हैं। खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी तंज कसा और कहा कि प्रधानमंत्री यह कहेंगे कि सब कुछ ठीक है।
रुबियो दिल्ली के बजाय मुंबई और जामनगर जाएंगे
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। वह 17 से 22 अक्टूबर के बीच उज्बेकिस्तान के समरकंद, मुंबई और गुजरात के जामनगर का दौरा करेंगे। रुबियो पहले उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे। इसके बाद उनकी भारत यात्रा के दौरान मुंबई और गुजरात के जामनगर जाने की योजना है।
जामनगर में वह रिलायंस की एक इकाई का दौरा करेंगे। इसके बाद मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इस बैठक में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में दिल्ली का उल्लेख नहीं होने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी ने पूछा है कि अमेरिकी विदेश मंत्री भारत आ रहे हैं, लेकिन दिल्ली नहीं आ रहे, और भारतीय विदेश मंत्री से मुलाकात मुंबई में प्रस्तावित है तो विदेश मंत्रालय इस बारे में साफ जानकारी क्यों नहीं दे रहा है।
भारत-अमेरिका संबंधों के बीच राजनीतिक विवाद
रुबियो की यात्रा को लेकर उठा विवाद अब भारत-अमेरिका संबंधों से आगे बढ़कर घरेलू राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे भारत की कूटनीतिक स्थिति और विदेश मंत्रालय की कार्यशैली पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में देख रही है।
बहरहाल, राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी से जवाब मांगा है, जबकि पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने अमेरिकी राजदूत के बयान और विदेश मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भारत के विदेश मंत्री की बैठक से जुड़ी जानकारी किसी दूसरे देश के राजदूत की ओर से सामने आना असामान्य है और सरकार को इस पर स्थिति साफ़ करनी चाहिए। वहीं, इस मामले में केंद्र सरकार और बीजेपी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।