लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) की एक बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को काम करने के लिए "भारतीय राज्य (स्टेट) की निष्पक्षता" की कोई ज़रूरत नहीं है। यानी कैसे भी हालात हों कांग्रेस काम करेगी।
कांग्रेस ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की इस बैठक में दिए गए राहुल गांधी के भाषण का ऑडियो और ट्रांसक्रिप्ट (लिखित पाठ) जारी किया। यह बैठक सोमवार को आयोजित की गई थी। इस भाषण के जरिए राहुल गांधी ने 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष का रोडमैप तैयार करने के साथ-साथ गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका को भी रेखांकित किया। भाषण को सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है। लोग एक्स पर राहुल की तारीफ कर रहे हैं। उनका ऑडियो वायरल है।

राहुल गांधी ने प्रतिरोध के आंदोलन की ज़रूरत क्यों बताई

भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ये संगठन भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक राजनीतिक तरीके बेअसर हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में कांग्रेस एक "प्रतिरोध (resistance) के आंदोलन" के रूप में काम कर रही है। 
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राहुल गांधी ने कहा: "कांग्रेस एक प्रतिरोध की पार्टी है। इसे काम करने के लिए भारतीय राज्य की निष्पक्षता की जरूरत नहीं है। वास्तव में, भारत की संवैधानिक संस्थाओं का जितना अधिक गला घोंटा जाएगा, कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए उतनी ही आक्रामकता से लड़ेगी।"
उन्होंने आगे कहा कि जब राजनीतिक दल पारंपरिक रूप से काम नहीं कर पाते, तब 'प्रतिरोध' काम करता है। उन्होंने अपनी 4,000 किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि इसके लिए किसी राजनीतिक ढांचे, नौकरशाही या खुफिया एजेंसियों की जरूरत नहीं होती, बल्कि सिर्फ प्रतिरोध की भावना की जरूरत होती है।

राहुल गांधी, सपा, आरजेडी और 'शिव'

बैठक में समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वामपंथी दलों (Left parties) जैसे सहयोगी दलों द्वारा कांग्रेस पर की गई आलोचनाओं का भी राहुल गांधी ने जवाब दिया। उन्होंने हिंदू पौराणिक कथाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि वह इन आलोचनाओं को सहजता से स्वीकार करते हैं। राहुल गांधी ने कहा: "यह मेरा काम नहीं है कि मैं आज कांग्रेस के बारे में कही गई बातों का जवाब दूं। मेरा काम तो शैव परंपरा की तरह सब कुछ निगल जाना है। नीलकंठ (भगवान शिव) का विचार, जिन्होंने सारा विष पी लिया था। कांग्रेस पार्टी या मेरे बारे में आपकी जो भी आलोचना है, हम उसे सहर्ष और मुस्कुराते हुए स्वीकार करेंगे।"

उन्होंने बिना किसी अहंकार के यह भी साफ किया कि गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका सभी सहयोगियों को प्यार और स्नेह के साथ एक सूत्र में बांधने की है। उन्होंने सहयोगियों से आपसी लड़ाई बंद करने और मीडिया को हमला करने का मौका न देने की अपील की।

डीएमके, सीपीएम और केरल का जिक्र क्यों किया

राहुल गांधी ने गठबंधन के भीतर के मतभेदों को छुपाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने केरल की राजनीति का उदाहरण देते हुए खुलकर कहा, "हमारे बीच लड़ाई है। अगर आप मुझसे कहें कि मैं जाकर केरल के पूर्व मुख्यमंत्री (पिनराई विजयन) को गले लगा लूं, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता और न ही करूंगा, क्योंकि उनके साथ मेरा राजनीतिक मुकाबला जारी है।" उन्होंने डीएमके (DMK) जैसी पार्टियों की प्रतिबद्धता पर पूरा भरोसा जताया।

राहुल ने चौंकाने वाला दावा किया

आगामी चुनावों पर बात करते हुए राहुल गांधी ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराना असल चुनौती नहीं है। उनके शब्दों में: "आप सोच रहे हैं कि चुनौती अगला चुनाव जीतना है। अगला चुनाव तो पहले ही जीता जा चुका है। कृपया समझें, भारत के लोगों में इतना गुस्सा है कि अगला चुनाव पहले ही खत्म हो चुका है। असली समस्या आरएसएस द्वारा भारतीय राज्य की संस्थाओं पर कब्जा करना है। समस्या यह है कि आपके पास जीतने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव ही नहीं बचेगा।"
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने राहुल गांधी के इस भाषण को उसी दिन जारी किया, जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की अयोग्यता के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। पार्टी ने इस भाषण को जारी करने के लिए जानबूझकर यह समय चुना, ताकि संस्थाओं के कथित दुरुपयोग के खिलाफ अपने रुख को और मजबूती से पेश कर सके।