प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में बुधवार को नहीं आए। बीजेपी की ओर से कहा गया कि मोदी को खतरा था। अब स्पीकर ओम बिड़ला ने गुरुवार को कहा कि मैंने पीएम को नहीं आने को कहा था, क्योंकि उन्हें खतरा था। पीएम ने कैसे इतिहास बनाया, जानिएः
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने गुरुवार 5 फरवरी को एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा में न आने की सलाह दी थी, क्योंकि विपक्षी सांसदों, खासकर कांग्रेस के सदस्यों ने उनकी कुर्सी को घेर लिया था और हंगामा किया था। स्पीकर ने इस घटना को संसद के इतिहास में 'काला धब्बा' करार दिया है। हालांकि इन्हीं लाइन पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी का बयान बुधवार देर रात आ चुका है। मीडिया के एक बड़े हिस्से में इन्हीं लाइन पर खबरें चल रही हैं कि पीएम मोदी को खतरा था, इसलिए वे सदन में नहीं आए। यानी कुल मिलाकर सत्ता पक्ष यह कहना चाहता है कि नेता विपक्ष राहुल गांधी से डर कर लोकसभा में नहीं आए, क्योंकि राहुल पीएम को एक किताब भेंट करने वाले थे। भारत-चीन के बीच हालिया संघर्षों पर रोशनी डालती ये किताब जनरल मुकुंद नरवणे ने लिखी है। जिसके बारे में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह का दावा है कि किताब तो छपी नहीं है।
बुधवार 4 फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान भारी हंगामा हुआ था। प्रधानमंत्री मोदी का जवाब देने का समय शाम 5 बजे तय था, लेकिन सदन में कथित अराजकता के कारण सदन स्थगित कर दिया गया और पीएम का भाषण नहीं हो सका। स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि उन्हें विश्वसनीय सूचना मिली थी कि कांग्रेस पार्टी के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास पहुंचकर कोई अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते थे।
ओम बिड़ला ने कहा, "ऐतिहासिक रूप से राजनीतिक असहमति को सदन के फ्लोर पर नहीं लाया जाता। मुझे विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते थे। यदि ऐसा होता तो राष्ट्र की गरिमा को गंभीर क्षति पहुंचती। इसलिए मैंने प्रधानमंत्री को संसद न आने की सलाह दी।"
स्पीकर ने आगे कहा कि कुछ सांसदों ने सदन के अंदर 'अशोभनीय व्यवहार' किया और यह संसद की परंपराओं के खिलाफ था। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक मतभेदों को स्पीकर के पद तक नहीं लाया जाना चाहिए और बुधवार की घटना संसद के इतिहास में एक काला अध्याय है।
घटना के दौरान विपक्षी सांसदों, मुख्य रूप से महिला कांग्रेस सांसदों ने वेल ऑफ द हाउस में जाकर नारेबाजी की, बैनर लहराए और ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़ते हुए प्रधानमंत्री की कुर्सी को घेर लिया। यह विरोध अमेरिका के साथ ट्रेड डील और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े मुद्दों पर था। सदन में कागज फाड़कर फेंकने और हंगामा करने के आरोप भी लगे।
इस बीच, भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया ताकि पीएम मोदी बोल न सकें। वहीं, कांग्रेस और विपक्ष का कहना है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। मोशन ऑफ थैंक्स को पीएम के जवाब के बिना ही पास कर दिया गया। स्पीकर के इस बयान से संसद में जारी राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
स्पीकर के बयान पर कुछ सवाल
स्पीकर ओम बिड़ला के बयान के बाद कई सवाल उठ खड़े हुए हैं, जिनका जवाब बिड़ला को देना चाहिए। बिड़ला ने कहा कि उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि पीएम मोदी को खतरा है। इसलिए मैंने उन्हें आने से मना किया। लेकिन अब सवाल ये हैः
- क्या ओम बिड़ला मार्शल के जरिए कथित अराजकता फैलाने वाले कांग्रेस सांसदों को सदन के बाहर नहीं भेज सकते थे?
- स्पीकर ओम बिड़ला ने आखिर मार्शल का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। जवाब बिड़ला को ही देना है?
- स्पीकर ओम बिड़ला को किन विश्सनीय एजेंसियों से जानकारी मिली कि पीएम को संसद के अंदर खतरा था?
- बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को किन एजेंसियों से पता चला कि पीएम की जान को संसद के अंदर खतरा था?
2004 के बाद यह पहली बार हुआ है कि लोकसभा ने गुरुवार को बजट सत्र के दौरान संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन को प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने की उम्मीद थी। हालांकि, विपक्षी सदस्यों द्वारा बार-बार व्यवधान डालने और नारेबाजी करने के बाद, अध्यक्ष ने लोकसभा स्थगित कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बि[]ला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा। विपक्षी सदस्यों द्वारा नारेबाजी के बावजूद, प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हो गया।
2004 में क्या हुआ था?
2004 में, भाजपा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोक दिया था।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सिंह के 10 मार्च, 2005 के अभिभाषण का एक वीडियो साझा किया। वीडियो में, पूर्व प्रधानमंत्री 10 जून, 2004 की उस घटना का जिक्र करते हैं जब उन्हें धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने की अनुमति नहीं दी गई थी।