राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में हुए गबन का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। साल 2005 में अयोध्या के अस्थायी रामलला मंदिर पर हुए आतंकवादी हमले के बाद जो रुख वकीलों ने अपनाया था, इतिहास ने खुद को एक बार फिर दोहराया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने आमराय से फैसला किया है कि कोई भी वकील इस दान चोरी मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में हुई चोरी की घटना पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है।

बार एसोसिएशन का कड़ा रुख

बार एसोसिएशन की गवर्निंग बॉडी की बैठक के बाद एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने सोमवार को मीडिया को बताया कि 
इस मामले में कोई भी सरकारी या निजी वकील आरोपियों का प्रतिनिधित्व नहीं करेगा। यदि कोई भी वकील इस आदेश का उल्लंघन करता है और आरोपियों का केस लड़ता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव अयोध्या छोडेंः बार

इसके साथ ही बार एसोसिएशन ने एक और बेहद नाटकीय फैसला लेते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ने के लिए कहा है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि ये तीनों तीन दिन के अंदर शहर नहीं छोड़ते हैं, तो पूरी अयोध्या की नाकेबंदी कर दी जाएगी और किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। हालाँकि, अध्यक्ष मिश्रा ने यह भी कहा कि जाँच पूरी होने तक चंपत राय को अयोध्या से बाहर जाने की अनुमति भी नहीं मिलनी चाहिए।
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सभी 8 आरोपी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे गए

सोमवार को इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आठ आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एंटी-करप्शन कोर्ट (भ्रष्टाचार निवारण अदालत) के समक्ष पेश किया गया। करीब 30 मिनट तक चली इस सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों की और कस्टोडियल रिमांड (पुलिस कस्टडी) नहीं मांगी। इसके बाद अदालत ने सभी आठों आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी और तब तक ये सभी आरोपी सलाखों के पीछे रहेंगे।

गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों के नाम:

अविनाश शुक्ला

अनुकल्प मिश्रा

लव कुश मिश्रा

मनीष कुमार यादव

करुणेश पांडे

राम शंकर मिश्रा

सुभाष श्रीवास्तव

रामशंकर उर्फ टीन्नू यादव
  • ये सभी आरोपी राम मंदिर में आने वाले कैश की गिनती करने और कीमती सामानों को सुरक्षित रखने के काम में तैनात थे।

पुलिस पूछताछ के बाद चंपत राय दिल्ली रवाना

मामले की जाँच कर रही टीम ने ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ की है और उनके बयान दर्ज किए हैं। हालांकि एफआईआर (FIR) में अभी इन तीनों का नाम बतौर आरोपी शामिल नहीं है। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चंपत राय दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पहले ही ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है, जिस पर ट्रस्ट आगामी 11 जुलाई (पूर्व निर्धारित तारीख 7 जुलाई से बदलकर) को होने वाली बैठक में अंतिम फैसला लेगा।

पुलिस ने खंगाले बैंक खाते, एसबीआई कर्मियों को नोटिसः सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे अयोध्या पुलिस की एक टीम एसबीआई (SBI) अयोध्या धाम शाखा पहुंची। जेल में बंद 8 आरोपियों में से 7 के खाते इसी ब्रांच में हैं। पुलिस ने इन सभी के बैंक स्टेटमेंट्स अपने कब्जे में ले लिए हैं। अब इस बात की गहनता से जाँच की जाएगी कि राम मंदिर में काम शुरू करने के बाद से इन आरोपियों के खातों में कितना पैसा जमा हुआ। इस सिलसिले में स्टेट बैंक के दो कर्मचारियों को भी नोटिस जारी किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार

अयोध्या बार एसोसिएशन ने इस पूरे घोटाले की सीबीआई (CBI) जाँच की मांग की है और कहा है कि वे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। इस बीच, वकील अनूप अवस्थी द्वारा मामले की सीबीआई जाँच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने तात्कालिकता पर सवाल उठाते हुए कहा, "इसमें इतनी क्या जल्दबाजी है?" और स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई अदालत की छुट्टियों (vacation) के बाद ही की जाएगी।

"चढ़ावा दूसरे राज्य में भेज दिया गया"- अखिलेश यादव

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रयागराज में तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
"जब गरिमा और मूल्यों को बनाए रखने की बात आती है, तो आपको किसी कानून की नहीं बल्कि ईमानदारी की जरूरत होती है। आपकी नीयत साफ होनी चाहिए। मैंने तो पहले भी कहा था कि भगवान राम आपको माफ कर देंगे। बस सीसीटीवी कैमरे बंद करिए, आंखें मूंदिए और रात के अंधेरे में भगवान राम का जो भी चढ़ावा लिया गया है, उसे चुपचाप वापस कर दीजिए।" अखिलेश यादव ने आगे आरोप लगाया, "भारतीय जनता पार्टी तो भगवान राम से माफी भी नहीं मांगना चाहती। आज भी जिन लोगों ने मंदिर का चढ़ावा चुराया और उसे दूसरे राज्य में भेज दिया, उन्हें वहां के सीसीटीवी कैमरे बंद करके चुपचाप वह चढ़ावा वापस लौटा देना चाहिए। भगवान राम बड़े दयालु हैं, वे अब भी उन्हें माफ कर देंगे।"

मामले का घटनाक्रम (Timeline)

7 जून: मंदिर में दान चोरी का मामला पहली बार सामने आया।

13 जून: उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जाँच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया।

23 जून: एसआईटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी।

25 जून: ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर रामशंकर यादव उर्फ तिन्नू सहित 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। कुछ ही घंटों में सभी 8 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए।

26 जून: सीजेएम (CJM) कोर्ट ने सभी आरोपियों को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा। इसी दिन चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया।

29 जून: रिमांड खत्म होने पर कोर्ट ने सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।