यूपी के पूर्व मंत्री और सपा नेता पवन पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट को फौरन भंग किया जाए। राम मंदिर में चोरी और घपले की जांच अदालत की निगरानी वाली कमेटी से कराई जाए।
अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर दान चोरी के मामले में कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर में कथित दान चोरी का यह बड़ा मामला केवल इसलिए सामने आ पाया क्योंकि चोरी में शामिल लोगों के बीच पैसों के बंटवारे को लेकर आपस में भारी विवाद हो गया था।
पवन पांडेय ने दावा किया कि एक कूड़े के ढेर से 80 लाख रुपये की बरामदगी और कई अन्य ठिकानों से मिला कैश इस गड़बड़ी का पुख्ता सबूत है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में चल रही विशेष जांच दल (SIT) की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
यूपी तक (UP Tak) के एक विशेष पॉडकास्ट में पवन पांडेय ने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर में चल रही इन कथित अनियमितताओं के बारे में सबसे पहले जानने वाले लोगों में वह खुद भी शामिल थे। अयोध्या के पूर्व विधायक ने यह अनोखा दावा भी किया कि भगवान राम ने इस पूरे मामले को उजागर करने के लिए खुद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को चुना।
अखिलेश यादव को पहले से ही थी भनक
पवन पांडेय के अनुसार, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चल रही कथित अनियमितताओं की भनक पहले ही लग चुकी थी। उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए पवन पांडेय को फोन किया था। पड़ताल के पलों को याद करते हुए पांडेय ने बताया: "अखिलेश जी ने मुझसे पूछा कि क्या मंदिर में चढ़ावे, आभूषणों और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बातें सच हैं? मैंने उनसे कहा कि ये बातें शत-प्रतिशत सच हैं।"
इसके बाद, अखिलेश यादव ने 7 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर इस कथित चोरी को लेकर एक पोस्ट साझा की, जिसने पूरे देश का ध्यान इस ओर खींचा। इस घटना पर दुख जताते हुए पूर्व मंत्री ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के कारण पूरी दुनिया में अयोध्या की एक खास पहचान है। इसका सरयू नदी, हनुमानगढ़ी, बजरंगबली और अनगिनत पूजनीय संतों-महंतों के साथ एक गौरवशाली इतिहास रहा है।"
'भगवान राम ने खुद अखिलेश यादव को चुना'- पॉडकास्ट के दौरान, साल 2012 से 2017 के बीच अयोध्या विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके पवन पांडेय ने एक बड़ा आध्यात्मिक दावा किया। उन्होंने कहा कि इस कथित घोटाले को सामने लाने के पीछे ईश्वरीय इच्छा थी। उन्होंने कहा: "यह जानकारी हमारे पास तब आई जब खुद भगवान राम को यह अहसास हुआ कि उनके मंदिर में लूट मची है। पैसे गायब हो रहे थे, चढ़ावा गायब हो रहा था और भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात किया जा रहा था।"
पांडेय ने आगे कहा कि भगवान राम ने इस काम के लिए अखिलेश यादव को इसलिए चुना क्योंकि सपा प्रमुख खुद भगवान शिव के परम भक्त हैं और एक भव्य 'केदारेश्वर महादेव मंदिर' का निर्माण करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, "आपको यह अखिलेश जी से पूछना होगा, लेकिन यह स्वयं भगवान राम ही थे जिन्होंने अखिलेश जी को सचेत किया कि उनके पवित्र मंदिर में लूट हो रही है।"
कैसे सामने आई चोरी की बात?
पवन पांडेय का आरोप है कि यह पूरा मामला सिर्फ इसलिए सार्वजनिक हो सका क्योंकि चोरी में शामिल लोग आपस में ही लड़ पड़े। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा: "चढ़ावे की गिनती करने के लिए जिम्मेदार लोग आपस में इस बात को लेकर भिड़ गए कि कौन ज्यादा पैसे ले जा रहा है। एक शख्स दूसरे पर आभूषण या कैश गायब करने का आरोप लगा रहा था।"उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के अधिकारियों ने सालों तक इन अनियमितताओं को दबाकर रखा था, लेकिन आपसी गुटबाजी और लड़ाई के कारण आखिरकार यह सच बाहर आ गया। पांडेय के मुताबिक, यह चोरी केवल इस साल मई या जून में शुरू नहीं हुई, बल्कि पिछले कई सालों से लगातार चल रही थी। उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा पर इसमें शामिल लोगों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया।
चंपत राय के इस्तीफे पर उठाए सवाल: ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए पांडेय ने तर्क दिया कि अगर कोई निर्दोष होता, तो उसे पद छोड़ने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा, "जब आप चोरी करते हैं, बेईमानी करते हैं और चोरों को बचाते हैं, तो यही अंजाम होता है।"
गौरतलब है कि एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक जांच में अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए जाने वाले दान के रख-रखाव और निगरानी में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने शुक्रवार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
पवन पांडेय ने मंदिर के पूर्व कर्मचारी महिपाल सिंह का उदाहरण भी दिया, जिन्होंने पहले दावा किया था कि रजिस्टर में दर्ज की गई राशि, दान पेटियों (दानपात्र) के अंदर वास्तव में मिलने वाले कैश से काफी कम थी। पांडेय का आरोप है कि महिपाल सिंह ने इसकी शिकायत चंपत राय और अनिल मिश्रा से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने पूछा: "अगर महिपाल सिंह झूठ बोल रहे थे, तो चंपत राय को उन पर 140 करोड़ भारतीयों के आराध्य भगवान राम के मंदिर को लेकर झूठे आरोप लगाने का मुकदमा दर्ज कराना चाहिए था। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया?" एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरे का जिक्र करते हुए पांडेय ने ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के आचरण पर तंज कसा: "राम राम जपना, पराया माल अपना।" उन्होंने कहा कि इन लोगों का असली चरित्र अब सबके सामने आ चुका है और खुद भगवान राम भी ऐसे 'लुटेरों' से घिरे होने पर शर्मिंदा महसूस कर रहे होंगे।
एसआईटी (SIT) जांच पर अविश्वास
पवन पांडेय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पर पूरी तरह अविश्वास जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खुद आरोपी ट्रस्ट ने ही इस जांच की मांग की थी और अंत में जांच रिपोर्ट भी उसी ट्रस्ट को सौंपी जाएगी जो खुद इस मामले में कटघरे में है। बता दें कि राम मंदिर में दान के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद, ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी (SIT) का गठन किया था।पांडेय ने सवाल उठाया: "एक कूड़े के ढेर से 80 लाख रुपये बरामद किए गए। लोगों के घरों से पैसे मिल रहे हैं। एसआईटी को और कितने सबूतों की जरूरत है?" उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित और प्रधानमंत्री द्वारा घोषित इस ट्रस्ट ने न केवल 140 करोड़ भारतीयों की आस्था को ठेस पहुंचाई है, बल्कि देश की शीर्ष अदालत के भरोसे को भी तोड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पवन पांडेय ने अदालत की निगरानी में जांच (Court-monitored investigation) की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो इस पूरे मामले का खुद संज्ञान (Suo motu cognisance) ले। वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करे। सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Sitting or Former Judge) की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन करे, जो यह पता लगा सके कि इस चोरी में कौन शामिल था, यह कैसे हुई और इसके पीछे किन लोगों का संरक्षण था।