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चीन से तनाव: प्रधानमंत्री की सर्वदलीय बैठक में आरजेडी, आप आमंत्रित नहीं

लद्दाख में चीनी घुसपैठ के मामले में प्रधानमंत्री मोदी की सर्वदलीय बैठक में लालू यादव की पार्टी आजेडी और अरविंद केजरीवाल की पार्टी को आमंत्रित नहीं किया गया है। उस बैठक से बाहर रखे जाने पर दोनों दलों में नाराज़गी है। उन्होंने पूछा है कि आख़िर इसके लिए क्या मानक रखा गया है और क्या इतने महत्वपूर्ण मसले पर उनकी राय कोई मायने नहीं रखती।

चीन पर सर्वदलीय बैठक आज शाम 5 बजे होना प्रस्तावित है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी सहित कई नेताओं के भाग लेने की संभावना है। इस बैठक में भाग लेने वाले दलों के अध्यक्षों को आमंत्रित करने के लिए गुरुवार को ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ़ोन किया। 

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इस बीच जब चीन पर सर्वदलीय बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रण नहीं गया तो राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसकी शिकायत की। उन्होंने ट्वीट पर लिखा, 'प्रिय रक्षा मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय गलवान वैली पर सर्वदलीय बैठक के लिए राजनीतिक दलों को आमंत्रित करने के लिए मापदंड जानना चाहता हूँ। मेरा मतलब है- शामिल/बाहर करने का आधार क्या है। क्योंकि हमारी पार्टी आरजेडी को अब तक कोई संदेश नहीं मिला है।'

हालाँकि इस पर सरकार या बीजेपी की ओर से कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई, लेकिन सूत्रों के हवाले से ख़बर आई कि जिन दलों के कम से कम पाँच सांसद होंगे उनको ही आमंत्रित किया गया है। 

आरजेडी नेता मनोज कुमार झा ने आरजेडी के पाँच सांसद होने की ओर इशारा कर ट्वीट किया, "फाइव का विचार फिक्शन है.. कोई भी राज्य सभा की वेबसाइट देख सकता है।'

आमंत्रित नहीं किए जाने से ग़ुस्साए आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा कि केन्द्र में एक अजीब अहंकार ग्रस्त सरकार चल रही है।

बता दें कि चीन पर सर्वदलीय बैठक की घोषणा तब हुई है जब सीमा विवाद बढ़ता जा रहा है और चीनी सेना की कार्रवाई का जवाब देने के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री पर भी इसका दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह कुछ ठोस क़दम उठाएँ। 

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए हैं। यह झड़प सोमवार यानी 15 जून की रात को हुई थी। 

सवाल तो इस पर उठाए जा रहे हैं कि देश को सीमा के वास्तविक हालात के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही है। ताज़ा विवाद इस पर उठा है कि चीनी सैनिकों के साथ मुठभेड़ के दौरान भारतीय सैनिकों को कथित तौर पर निहत्थे क्यों भेजा गया। राहुल गाँधी ने सवाल पूछा कि 'हमारे निहत्थे जवानों को वहाँ शहीद होने क्यों भेजा गया?' इस पर जब विदेश मंत्री ने जवाब दिया तो और विवाद खड़ा हो गया। 

राहुल के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा है, 'आइये हम सीधे तथ्यों की बात करते हैं। सीमा पर सभी सैनिक हमेशा हथियार लेकर जाते हैं, ख़ासकर जब पोस्ट से जाते हैं। 15 जून को गलवान में उन लोगों ने ऐसा किया। फेसऑफ़ (झड़प) के दौरान हथियारों का उपयोग नहीं करना लंबे समय से परंपरा (1996 और 2005 के समझौते के अनुसार) चली आ रही है।'

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लेकिन विदेश मंत्री के इस जवाब पर सेना के सेवानिवृत्त अफ़सरों ने ही सवाल खड़े कर दिए। रिटायर लेफ़्टिनेंट जनरल एच. एस. पनाग ने इस पर कहा कि यह तो सीमा प्रबंधन के लिए बनी सहमति है, रणनीतिक सैन्य कार्रवाई के दौरान इसका पालन नहीं होता है। उन्होंने कहा है कि जब किसी सैनिक की जान का ख़तरा होता है, वह अपने पास मौजूद किसी भी हथियार का इस्तेमाल कर सकता है।

इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोग इसके लिए आलोचना कर रहे थे कि प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री सहित तमाम मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। मंत्रियों की यह आरोप लगाकर भी आलोचना की जा रही है कि देश को चीन से लगी सीमा पर वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही है। इन्हीं आरोपों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बुधवार को ट्वीट आया। उन्होंने ट्वीट में कहा कि मुश्किल वक़्त में देश कंधे से कंधा मिलकर खड़ा है। इसके बाद प्रधानमंत्री का भी बयान आया और उन्होंने कहा कि हम शांतिप्रिय देश हैं लेकिन कोई उकसाए तो हम जवाब देने में सक्षम हैं। बाद में गृह मंत्री अमित शाह का भी बयान आया। और फिर चीन पर सर्वदलीय बैठक की जानकारी दी गई।

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