गुजरात के एक RTI एक्टिविस्ट ने पूछा है, 'अगर अभिजीत दिपके के पिता को 60000-65000 रुपये की सैलरी मिलती थी तो वे अमेरिका में दिपके की पढ़ाई का खर्च कैसे उठा पाए?' दिपके ने दो दिन पहले ही आरोप लगाया है कि उनके परिवार को धमकियाँ दी गईं।
अभिजीत दिपके और नरेंद्र मोदी
अभिजीत दिपके ने जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगने की मांग की है, वहीं सीजेपी विरोधियों ने एक आरटीआई के माध्यम से दिपके के परिवार की आर्थिक स्थिति और उनकी पढ़ाई के खर्च को लेकर जांच की मांग की है। दिपके ने दो दिन पहले ही आरोप लगाया है कि 'बीजेपी की तरफ़ से उन्हें पार्टी में शामिल होने के कई ऑफर मिले थे और इनकार करने पर मुझे और मेरे परिवार को धमकियाँ दी गईं'। हालाँकि, बीजेपी ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है।
प्रधानमंत्री से माफी की मांग
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में दिपके ने पीएम मोदी के हालिया उस वीडियो संदेश का जिक्र किया जिसमें प्रधानमंत्री ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अपशब्द बोलने वाले छात्रों को 'भटके हुए बच्चे' बताते हुए माफ करने की बात कही थी। दिपके ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री एक और वीडियो जारी करेंगे और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगेंगे।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कम उम्र के बच्चों और छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया। उनके अनुसार कुछ छात्राओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ और कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रों को अपना मानती है तो उनके साथ हुई कथित हिंसा पर भी जवाब देना चाहिए।
और इन आरोपों के बीच ही अब एक आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड यानी सीबीआईसी को शिकायत भेजकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके एक सरकारी कर्मचारी के रूप में 60-65 हजार रुपये मासिक वेतन पाते थे तो उन्होंने अपने बेटे की अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया।
एएनआई के अनुसार सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दावा किया कि उन्होंने तीन अलग-अलग संस्थाओं को शिकायत भेजी है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आय और संपत्ति की जांच कराई जाए। तिवारी का सवाल है कि एक जूनियर इंजीनियर के वेतन पर बच्चों की विदेश में पढ़ाई कैसे संभव हुई। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आता है तो उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
चुनाव आयोग और CBIC से भी शिकायत
अमित तिवारी ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी एक पंजीकृत राजनीतिक दल है। उनका कहना है कि यदि संगठन राजनीतिक दल की तरह काम कर रहा है और चंदा जुटा रहा है तो इसकी कानूनी स्थिति साफ़ होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के कानूनी सहायता कोष पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने सीबीआईसी से यह जांच करने की मांग की है कि इस राशि पर जीएसटी लागू होता है या नहीं।जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार या मुकदमों का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों की कानूनी मदद के लिए कपिल सिब्बल ने एक करोड़ रुपये के फंड की घोषणा की थी। इसी फंड को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
दिपके ने पहले लगाए थे बीजेपी पर गंभीर आरोप
इससे पहले अभिजीत दीपके ने हाल ही में छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान बीजेपी की तरफ से उन्हें पार्टी में शामिल होने के कई ऑफर मिले, और इनकार करने पर धमकियाँ दी गईं। उनके अनुसार, संदेश कुछ इस तरह था- "बीजेपी में आ जाओ, तुम्हारे और परिवार के लिए अच्छा रहेगा।"दिपके की मां अनीता दिपके और पिता भगवानराव दिपके ने भी मीडिया से बातचीत में कहा था कि परिवार को कथित धमकियाँ मिली थीं और सुरक्षा कारणों से उन्हें कुछ समय के लिए अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां रहना पड़ा।
बीजेपी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
भारतीय जनता पार्टी ने दिपके के सभी आरोपों को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी को पार्टी में शामिल होने के लिए धमकाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दिपके से आरोपों के समर्थन में नाम और सबूत सार्वजनिक करने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि यदि कोई ठोस शिकायत सामने आती है तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।जंतर-मंतर आंदोलन के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब कई स्तरों पर पहुंच चुका है। एक ओर आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस जारी है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े नेताओं और उनके वित्तीय मामलों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल अभिजीत दिपके के परिवार की आर्थिक जांच की मांग पर संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिपके द्वारा लगाए गए धमकी और पुलिस कार्रवाई संबंधी आरोपों पर भी सरकार की ओर से विस्तृत जवाब आना बाकी है।