मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार से कहा कि वो दो हफ्ते में मंत्री पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने का फैसला करे। यह मामला भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। मंत्री ने कर्नल सोफिया को आतंकवदियों की बहन कहा था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय सेना का चेहरा थीं। हालांकि बाद में मंत्री ने माफी मांग ली लेकिन एमपी हाईकोर्ट ने मंत्री के खिलाफ फौरन एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की देरी पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा, "आप (राज्य सरकार) अगस्त 2025 से एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठे हैं। कानून के तहत यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप इस पर निर्णय लें।"

मंत्री विजय शाह का पूरा मामला क्या है? 

मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह पर आरोप है कि उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद मीडिया में आईं सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट पेश की है। एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (सांप्रदायिक नफरत और वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत मंत्री के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार से अनुमति मांगी है।
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माफी पर अदालत का रुख 

शाह के वकील ने तर्क दिया कि मंत्री ने सार्वजनिक माफीनामा जारी किया था, जिसे ऑनलाइन साझा किया गया था और इसे अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा- "ऑनलाइन माफीनामा क्या होता है? हमें उनकी मंशा और ईमानदारी पर संदेह होने लगा है। आप माफीनामे को रिकॉर्ड में दर्ज करें। हमें इसे देखना होगा।" चीफ जस्टिस ने कहा, "अब माफी मांगने के लिए बहुत देर हो चुकी है। हमने पहले भी देखा है कि किस तरह की माफी पेश की गई थी।" इससे पहले कोर्ट ने शाह को फटकार लगाते हुए कहा था कि वे अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।

अदालत का अगला कदम 

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को शाह द्वारा दिए गए कुछ अन्य कथित आपत्तिजनक बयानों की भी जांच करने और उस पर एक अलग रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अब मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर यह तय करना होगा कि क्या वह अपने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देती है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट दाखिल होने के बाद होगी।