SIR ECI Latest: चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समय सीमा 11 दिसंबर तक बढ़ा दी है। बीएलओ पर अत्यधिक दबाव और आत्महत्याओं की खबरें आ रही थीं। संसद में 1 दिसंबर को हंगामे की आशंका थी।
चुनाव आयोग (ईसीआई) ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की समय सीमा एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। अब अंतिम तारीख 4 दिसंबर की जगह 11 दिसंबर कर दी गई है। आयोग ने रविवार 30 नवंबर को तीन-पेज के आदेश में यह घोषणा की है। इस संवेदनशील मुद्दे पर 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बड़ा टकराव होने की पूरी संभावना है। इस दौरान एसआईआर के खिलाफ देश में एक माहौल बन गया है। विपक्ष लगातार इसे टालने या ज्यादा समय की मांग कर रहा था। इस पर चुनाव आयोग ने घुटने टेक दिए। हालांकि एक हफ्ता भी पर्याप्त नहीं है। एसआईआर इतने कम समय में संभव नहीं है।
चुनाव आयोग की नई तारीखें
चुनाव आयोग ने समय सीमा बढ़ाने का बचाव करते हुए कहा कि यह विस्तार चुनाव अधिकारियों को मतदाताओं की मसौदा सूची प्रकाशित करने के लिए अतिरिक्त समय देने के लिए किया गया है।
- गणना अवधि (Enumeration): अब 4 दिसंबर के बजाय 11 दिसंबर को समाप्त होगी।
- मसौदा सूची का प्रकाशन: 9 दिसंबर के बजाय अब 16 दिसंबर को होगा।
- अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 14 फरवरी को किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने इसी सप्ताह दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। एसआईआर प्रक्रिया को बेहतर ढंग से फिर से तय करने का आग्रह किया था। यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब फील्ड से बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) पर अत्यधिक दबाव की खबरें मिल रही हैं। उन्हें कम समय में घर-घर जाकर इस बड़े काम को पूरा करने के लिए भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से बीएलओ द्वारा आत्महत्या से मौतें (death by suicide) भी सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे यहाँ यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
आखिर विवादों में क्यों है एसआईआर प्रक्रिया
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया बिहार के बाद अब 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुड्डुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप में हो रही है। जहां, 51 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जा रहा है। ECI का कहना है कि SIR का उद्देश्य "कोई योग्य मतदाता बाहर न रहे और कोई अयोग्य नाम न रहे" सुनिश्चित करना है। लेकिन विपक्षी दल (ग्रेस, TMC, SP, DMK, RJD आदि इसे "वोट चोरी" का हथियार मानते हैं, जो भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है। एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। लेकिन इस दौरान बिहार का चुनाव हो गया और सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया। अब अगले चुनाव पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल आदि में अलग-अलग तारीखों पर हैं। सुप्रीम कोर्ट में बस सुनवाई ही चल रही है।
SIR पहली बार 2003 के बाद पूरे देश में हो रहा है, और यह मतदाता सूची को 2002-2004 की पुरानी रिकॉर्ड्स के आधार पर सत्यापित करता है। विवाद के मुख्य कारण:
वोटर डिलीशन का डर: बिहार में 65 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से ज्यादातर अल्पसंख्यक, प्रवासी और ग्रामीण मतदाता बताए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह NRC/CAA जैसा "नागरिकता परीक्षण" है, जो भाजपा के एजेंडे को पूरा करता है। राहुल गांधी ने इसे "संस्थागत वोट चोरी" कहा है।
प्रवासी और महिलाओं पर असर: प्रवासी मजदूर दस्तावेजों की कमी से नाम हटने का शिकार हो रहे हैं। शादीशुदा महिलाओं को नाम बदलने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज लगाने पड़ रहे हैं।
राजनीतिक पूर्वाग्रह: TMC का कहना है कि पश्चिम बंगाल में BJP के दबाव में नाम काटे जा रहे हैं। SP नेता अखिलेश यादव ने UP में 50,000 नाम प्रति विधानसभा क्षेत्र काटने का आरोप लगाया।
ECI की चुप्पी और सुप्रीम कोर्ट: ECI ने आरोपों को खारिज किया, लेकिन विपक्ष के सवालों पर मौन साधा। SC ने कहा कि SIR करना ECI की पावर के दायरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने आधार को 12वां दस्तावेज बनाने को कहा। लेकिन ईसीआई आधार के खिलाफ बयान दे रहा है। सरकार ने आधार की वैधता लगभग खत्म कर दी है। यूपी, महाराष्ट्र ने आधार न मानने को लेकर हाल ही में नए आदेश जारी किए हैं।
BLO को SIR में असली दिक्कत क्या आ रही है?
बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), ज्यादातर स्कूल टीचर या सरकारी कर्मचारी हैं। एक BLO को औसतन 956-1200 मतदाताओं को कवर करना पड़ता है, जिसमें घर-घर जाकर फॉर्म बांटना, एकत्रित करना और डिजिटाइजेशन शामिल है।
अत्यधिक वर्कलोडः 3 बार घर विजिट, रात 2-3 बजे तक मीटिंग्स, डिजिटल एंट्री। सामान्य ड्यूटी के साथ अतिरिक्त। मानसिक/शारीरिक तनाव। टारगेट न पूरा होने पर धमकी, FIR, वेतन कटौती की धमकियां।
- बंगाल में खुदकुशी करने वाली बीएलओ रिंकू तरफदार ने लिखा था कि उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण नहीं मिला। पुरानी वेबसाइट से डेटा नहीं मिला। ऑनलाइन फॉर्म जटिल प्रक्रिया है। कुछ ने लिखा- देर रात फील्ड वर्क, कोई मेडिकल सपोर्ट नहीं।
- BLO प्रोटेस्ट कर रहे हैं, जैसे बंगाल में CEO कार्यालय के बाहर धरना दिया गया। ECI ने इसके बाद हेल्प कैंप लगाए, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह अपर्याप्त है।
SIR लोकतंत्र की मजबूती का दावा करता है, लेकिन BLO की मौतें, वोटरों का डर और ECI की चुप्पी से संदेह बढ़ रहा है। यह 51 करोड़ मतदाताओं का भविष्य प्रभावित कर सकता है। इसकी आड़ में वोट चोरी के आरोपों ने चुनाव आयोग की विश्सनीयता को खत्म कर दिया है। इस संबंध में तमाम वरिष्ठ पत्रकारों और चुनाव विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कोई भी बीएलओ इतने कम समय में एसआईआर पूरी नहीं कर सकता। हालांकि चुनाव आयोग ने रविवार को एक हफ्ता समय बढ़ा दिया है लेकिन वो भी पर्याप्त नहीं लग रहा है।