सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की कार्रवाई को 'बाहरी कारणों' से प्रभावित बताया है। उन्होंने अदालत में दलील दी है कि ईडी ने जिस तरह कार्रवाई शुरू की, वह उसकी अपनी अब तक की कानूनी स्थिति से अलग है। गांधी परिवार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि यह देश का ऐसा अकेला मामला है, जिसमें ईडी ने एक निजी शिकायत के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे बढ़ाई। उनके मुताबिक, बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने 2014 में निजी शिकायत की थी, लेकिन ईडी ने उस समय ईसीआईआर दर्ज नहीं की। करीब सात साल बाद 30 जून 2021 को ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की। पुलिस की एफ़आईआर की तरह ईडी ईसीआईआर दर्ज करती है।

सोनिया और राहुल गांधी ने इसी देरी को अपनी दलील का अहम आधार बनाया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है कि ईडी का यह आचरण खुद बताता है कि एजेंसी की उस समय की समझ थी कि केवल निजी शिकायत के आधार पर पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू नहीं की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई अब 12 अक्टूबर को होगी।

सोनिया-राहुल की दलील क्या?

गांधी परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की याचिका के जवाब में कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करने के लिए संबंधित ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ में एफ़आईआर का होना जरूरी है। उनके मुताबिक, ईडी खुद लंबे समय तक यही कानूनी रुख अपनाती रही है। उनकी दलील है कि अगर किसी मूल अपराध में एफ़आईआर ही दर्ज नहीं हुई है तो केवल किसी व्यक्ति की निजी शिकायत के आधार पर ईडी पीएमएलए के तहत अपनी जाँच शुरू नहीं कर सकती।
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सोनिया और राहुल गांधी के जवाब के मुताबिक़ सुब्रमण्यम स्वामी ने 2014 में मजिस्ट्रेट के सामने निजी शिकायत दाखिल की थी। लेकिन ईडी ने उस शिकायत के आधार पर तुरंत ईसीआईआर दर्ज नहीं की। 30 जून 2021 को यानी क़रीब सात साल बाद ईसीआईआर दर्ज की गई। गांधी परिवार का कहना है कि अगर निजी शिकायत अपने आप ईडी की जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त होती तो एजेंसी को सात साल तक इंतजार करने की जरूरत नहीं थी। उनका तर्क है कि इस देरी को ईडी की अपनी कानूनी समझ के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

ED पर 'चुनिंदा' कार्रवाई का आरोप

सोनिया और राहुल गांधी ने अपने जवाब में कहा है कि ईडी ने नेशनल हेराल्ड मामले में जिस तरह का रुख अपनाया है, उससे यह सवाल उठता है कि इस मामले को अलग तरीके से क्यों देखा गया। उनकी ओर से अदालत में कहा गया कि ईडी ने ट्रायल कोर्ट में बहस के दौरान और हाईकोर्ट में भी यह साफ़ नहीं किया कि इस मामले को निजी शिकायत के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए अलग क़ानूनी आधार क्या है।

गांधी परिवार ने इसे बाहरी कारणों से प्रभावित मामला बताया है। हालांकि यह उनकी ओर से अदालत में की गई कानूनी दलील है और इस पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।

2014 की शिकायत से शुरू हुआ मामला

नेशनल हेराल्ड मामला मूल रूप से सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत से शुरू हुआ था। स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और गांधी परिवार से जुड़ी कंपनी यंग इंडियन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और संपत्ति के कथित दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए थे।

मामले का संबंध एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL और उसके द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले नेशनल हेराल्ड अखबार से है। यंग इंडियन में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की हिस्सेदारी को लेकर भी इस मामले में लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। ईडी ने बाद में इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की और अपनी अभियोजन शिकायत अदालत में दाखिल की।

ईडी ने पिछले साल सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। इसके बाद मामला दिल्ली की ट्रायल कोर्ट में पहुंचा। हालांकि 16 दिसंबर 2025 को विशेष अदालत ने ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि मामले में ईडी की अभियोजन शिकायत ऐसी एफआईआर पर आधारित नहीं थी, जो पीएमएलए की अनुसूची में शामिल मूल अपराध से जुड़ी हो। ट्रायल कोर्ट के इस आदेश के बाद ईडी ने उसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। ईडी की चुनौती के खिलाफ अब सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने अपना जवाब दाखिल किया है।

हाईकोर्ट के सामने बड़ा सवाल

अब दिल्ली हाईकोर्ट के सामने विवाद का एक बड़ा पहलू यह है कि क्या ईडी किसी निजी शिकायत के आधार पर, बिना संबंधित मूल अपराध की एफआईआर के, पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच और अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ा सकती है? इसके साथ ही अदालत को यह भी देखना होगा कि ट्रायल कोर्ट ने ईडी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार करते समय कानून की सही व्याख्या की थी या नहीं। मले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।
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मामला सिर्फ नेशनल हेराल्ड तक सीमित नहीं

नेशनल हेराल्ड विवाद पिछले कई वर्षों से राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में रहा है। इस मामले में एक तरफ ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच और उसकी ओर से लगाए गए आरोप हैं तो दूसरी तरफ सोनिया गांधी और राहुल गांधी लगातार ईडी की कार्रवाई के कानूनी आधार और प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं।