तेजाब हमलों की घटनाओं और बाजार में तेजाब की आसानी से उपलब्धता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 31 अगस्त को बेहद गंभीर रुख अपनाया। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि तेजाब की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए या इसे बेहद सख्त नियामकीय शर्तों के तहत ही बेचने की अनुमति दी जाए। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि 2013 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय सुरक्षा उपायों के बावजूद तेजाब की खुदरा बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है।
यह मामला तेजाब हमले की पीड़िता शाहीन मलिक की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तेजाब हमले के पीड़ितों के लिए उचित पुनर्वास योजनाएं तैयार करने और उन्हें छह सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।

2013 के नियम क्यों हुए अप्रभावी?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसे बताया गया है कि 2013 में तेजाब की बिक्री को लेकर जो दिशानिर्देश बनाए गए थे, वे अब “लगभग अप्रासंगिक” हो चुके हैं और उनका प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि केवल दिशानिर्देश बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके वास्तविक क्रियान्वयन की निगरानी भी जरूरी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ किरपाल ने अदालत को बताया कि स्वयंसेवकों की ओर से किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि तेजाब अब भी आसानी से खरीदा जा सकता है और उसकी बिक्री पर लगभग कोई प्रभावी नियामकीय निगरानी नहीं है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इस्तेमाल के लिए तेजाब की जरूरत हो सकती है, लेकिन घरेलू सफाई जैसे खुदरा इस्तेमाल के लिए बाजार में दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं। इसलिए खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाए सख्त विकल्प

अदालत ने कहा कि यदि खुदरा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है तो इसे अत्यंत सख्त नियमों के तहत नियंत्रित करना होगा। सुनवाई के दौरान संभावित उपायों पर भी चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप सेः
  • तेजाब खरीदने वाले व्यक्ति की उम्र का दायरा तय करने की संभावना।
  • खरीदार से लिखित रूप में यह बताने की व्यवस्था कि उसे तेजाब किस उद्देश्य से चाहिए।
  • तेजाब खरीदने वालों का रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से रखना।
  • बाजार में प्रवेश करने और बिकने वाले तेजाब की मात्रा को ट्रैक करने के लिए ऑटोमेटेड और रियल-टाइम व्यवस्था बनाना।
  • बिक्री की निगरानी के लिए प्रभावी नियामकीय तंत्र विकसित करना।
अदालत ने केंद्र से यह भी जानना चाहा कि तेजाब का उत्पादन कैसे होता है और वह बाजार में इतनी आसानी से उपलब्ध कैसे हो जाता है।

केंद्र ने राज्यों पर फोड़ा ठीकराः केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के बाद केंद्र ने एडवाइजरी जारी करने के साथ मॉडल नियम तैयार किए थे और उन्हें राज्यों को भेजा गया था। लेकिन कई राज्यों ने आवश्यक समितियों का गठन तक नहीं किया और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू भी नहीं किया।

केंद्र ने अदालत को बताया कि वह राज्यों को पत्र लिखकर नियमों के अनुपालन की स्थिति का जायजा लेगा। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, करीब 20 राज्यों में इन नियमों के पालन में कमी की बात सामने आई है।

तेजाब पीड़ितों के लिए पुनर्वास योजना

सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की बिक्री के सवाल के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से छह सप्ताह के भीतर ऐसी योजनाएं तैयार करने को कहा है जिनमें- मुआवजा, पुनर्वास, मेडिकल सहायता और उच्चस्तर तक मुफ्त शिक्षा जैसे उपाय शामिल हों।अदालत ने केंद्र सरकार को एक मॉडल पुनर्वास योजना तैयार करने और राज्यों को उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सहायता देने पर विचार करने को भी कहा है।

राज्यों से तेजाब हमलों का पूरा आंकड़ा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से तेजाब हमलों से जुड़े मामलों की जानकारी भी मांगी है। उनसे पूछा गया है कि कितने मामले दर्ज हुए, कितने मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई, कितने मामले अभी ट्रायल में लंबित हैं और कितने मामले अपील के स्तर पर लंबित हैं। इससे अदालत तेजाब हमलों के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहती है।

तेजाब पीड़ितों के अधिकारों का सवाल

बार एंड बेंच के मुताबिक शाहीन मलिक की याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि उन पीड़ितों को भी कानूनी संरक्षण और लाभ मिलना चाहिए जिन्हें जबरन तेजाब पिलाया गया हो या जिनके शरीर के भीतर तेजाब के कारण गंभीर चोटें आई हों, लेकिन बाहर से उनके शरीर पर स्पष्ट विकृति दिखाई न देती हो। केंद्र की ओर से पहले 14 जुलाई को अदालत को बताया गया था कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बदलाव किए गए हैं, ताकि जबरन तेजाब पिलाए जाने से आंतरिक चोट झेलने वाले पीड़ितों को भी कानून के तहत लाभ मिल सके।

पीड़िता ने खुद उठाई खुदरा बिक्री पर रोक की मांग

तेजाब हमले की पीड़िता शाहीन मलिक ने अदालत के सामने खुदरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की जोरदार मांग की। उनका कहना था कि अदालत के बार-बार निर्देशों के बावजूद 2013 के सुरक्षा नियम प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर और तत्काल ध्यान देने योग्य बताते हुए कहा कि वह इसकी निगरानी जारी रखेगा और उम्मीद जताई कि इस मामले को “तार्किक निष्कर्ष” तक पहुंचाया जाएगा।

क्या अब तेजाब की बिक्री पूरी तरह बंद होगी?

अभी सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की खुदरा बिक्री पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केंद्र से इस सवाल पर स्पष्ट जवाब मांगा है कि खुदरा बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित क्यों न की जाए या फिर इसे अत्यंत सख्त नियमों के तहत क्यों न रखा जाए। इसलिए अगला महत्वपूर्ण चरण केंद्र की प्रतिक्रिया और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए जाने वाले नियामकीय ढांचे का होगा। मामले की सुनवाई जारी रहेगी।