सुप्रीम कोर्ट ने NCERT किताब में न्यायपालिका वाले विवादित पाठ पर अपने पुराने वाले फ़ैसले को पलट दिया। इसने शुक्रवार को NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार वाले विवादित अध्याय लिखने वाले तीन प्रोफेसरों पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें इन तीनों प्रोफेसरों को केंद्र या राज्य के विश्वविद्यालयों और सरकारी शिक्षा संस्थानों के किसी भी शैक्षणिक प्रोजेक्ट से जुड़ने पर रोक लगा दी गई थी। ये तीन प्रोफेसर हैं- प्रोफेसर मिशेल दानिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें अब इन तीनों प्रोफ़ेसरों को शैक्षणिक कामों में शामिल करने का फ़ैसला स्वतंत्र रूप से ले सकती हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत की पहले की नकारात्मक टिप्पणी भी हटा दी गई।
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पुराने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि इन तीनों ने 'जानबूझकर ग़लत तथ्य पेश किए ताकि कक्षा 8 के छात्रों के मन में न्यायपालिका की नकारात्मक छवि बने।' अब यह टिप्पणी भी वापस ले ली गई है। हालाँकि कोर्ट ने फिर भी कहा कि यह अध्याय 'पूरी तरह अनुचित' था।

क्या हुआ था पहले?

सुप्रीम कोर्ट ने फ़रवरी में NCERT की कक्षा 8 की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और देरी' वाले अध्याय पर पूरी तरह रोक लगा दी थी और किताब से उस अध्याय को हटाने का आदेश दिया था। मार्च 11 के आदेश में इन तीनों प्रोफ़ेसरों पर बैन भी लगा दिया गया था।

सुनवाई में क्या-क्या हुआ?

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। तीनों प्रोफेसरों की तरफ़ से वरिष्ठ वकीलों ने दलीलें दीं-
  • वरिष्ठ वकील श्याम दिवान ने कहा कि यह अध्याय किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि पूरी समिति का सामूहिक फ़ैसला था। उन्हें बिना सुने आदेश दे दिया गया था।
  • वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कक्षा 6 और 7 की किताबों का यह अध्याय आगे बढ़ाया गया था। मीडिया में न्यायपालिका की समस्याओं पर खुलकर चर्चा होती है तो छात्रों को भी वास्तविकता पता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'समस्याओं को छुपाने से समाधान नहीं निकलेगा।'
  • वरिष्ठ वकील जे साई दीपक ने कहा कि सुपर्णा दिवाकर की भूमिका बहुत सीमित थी।
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सरकार की दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार इन तीनों को भविष्य में किसी काम में शामिल नहीं करना चाहती। उन्होंने यह भी कहा कि अध्याय समिति के सभी सदस्यों के पास नहीं भेजा गया था। लेकिन अदालत ने अब इन तीनों प्रोफेसरों के पक्ष में फ़ैसला दिया है। 

कोर्ट का अंतिम फ़ैसला

पीठ ने तीनों प्रोफेसरों के स्पष्टीकरण से संतुष्टि जताते हुए बैन हटा दिया। कोर्ट ने कहा कि अब केंद्र, राज्य या अन्य संस्थान स्वयं फ़ैसला करेंगे। हालाँकि, अध्याय को 'अनुचित' बताते हुए उसे हटाए रखने का पुराना फ़ैसला बरकरार रखा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि NCERT की किसी अन्य किताब में आपत्तिजनक सामग्री है तो उसे जस्टिस इंदु मल्होत्रा की समिति के सामने रखा जा सकता है।

विवादित अध्याय बहाल नहीं होगा

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तीन प्रोफेसरों पर लगा प्रतिबंध तो हटा दिया, लेकिन न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार वाले अध्याय को किताब से हटाने का फ़ैसला बरकरार रखा। अब इन प्रोफेसरों के भविष्य के काम पर केंद्र और राज्य सरकारें खुद फैसला लेंगी। यह फैसला शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की छवि से जुड़े बड़े सवालों को फिर से उठाता है।