टेलीग्राम सीईओ पावेल दुरोव ने आशंका जताई है कि अगर रिलायंस और वॉट्सऐप मिलकर भारत में टेलीग्राम पर पूरी तरह से बैन लगाने की कोशिशों के पीछे शामिल हों, तो उन्हें कोई हैरानी नहीं होगी।
रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी और वाट्सऐप के मालिक मार्क जुकरबर्ग
टेलीग्राम (Telegram) के संस्थापक और सीईओ पावेल दुरोव (Pavel Durov) ने भारतीय टेलीकॉम दिग्गज रिलायंस (Reliance) पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। दुरोव का दावा है कि रिलायंस इंटरनेट कनेक्टिविटी में दखलंदाजी कर रहा है, जिससे भारत के बाहर कई देशों में यूजर्स के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए दुरोव ने आरोप लगाया कि रिलायंस इसके लिए 'बीजीपी हाइजैकिंग' (Border Gateway Protocol Hijacking) नाम की एक अवैध तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी इसके कारण टेलीग्राम की सर्विस बाधित हुई है।
- (बीजीपी हाईजैकिंग (BGP Hijacking) एक साइबर हमला है जिसमें हैकर्स इंटरनेट के ट्रैफिक को गलत दिशा में मोड़ने के लिए बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (BGP) की राउटिंग जानकारी में हेरफेर करते हैं।)
वॉट्सऐप को फायदा पहुँचाने की व्यावसायिक जंग
पावेल दुरोव ने अपनी पोस्ट में लिखा: "भारतीय टेलीकॉम कंपनी रिलायंस एक गैर-कानूनी तरीके 'BGP हाइजैकिंग' के जरिए भारत के बाहर (यूएई समेत) लाखों यूजर्स के लिए टेलीग्राम तक पहुँच को बाधित (sabotage) कर रही है।"दुरोव का मानना है कि यह सब कुछ जानबूझकर किया जा रहा है क्योंकि इस संबंध में रिलायंस को कई बार रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन कंपनी ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने इस पूरे मामले को मैसेजिंग ऐप्स के बीच चल रही व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा (Business Competition) से जोड़ा। दुरोव ने इशारा किया कि रिलायंस के फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी 'मेटा' (Meta) के साथ कमर्शियल संबंध हैं, और मेटा की रिलायंस में हिस्सेदारी भी है। दुरोव ने कहा कि यह टेलीग्राम को नुकसान पहुँचाकर वॉट्सऐप को फायदा पहुँचाने की एक 'प्रतिस्पर्धात्मक जंग' (Competitive War) का हिस्सा हो सकता है।
भारत सरकार के फैसले पर दुरोव की नाराजगी
टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर पावेल दुरोव ने भारत सरकार की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम को ब्लॉक करने से पेपर लीक करने वाले अंदरूनी लोगों (Insiders) पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, बल्कि वो बस दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो जाएंगे। दुरोव ने लिखा: "यह कदम भारत में मौजूद टेलीग्राम के 15 करोड़ (150 मिलियन) से अधिक आम यूजर्स को सजा देने जैसा है, न कि उन लोगों को जिन्होंने वास्तव में परीक्षा सामग्री को लीक किया है।"इतना ही नहीं, दुरोव ने अपने बयान में यहाँ तक आशंका जताई कि अगर रिलायंस और वॉट्सऐप मिलकर भारत में टेलीग्राम पर पूरी तरह से बैन लगाने की कोशिशों के पीछे शामिल हों, तो उन्हें कोई हैरानी नहीं होगी। हालाँकि, उन्होंने इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। भारत टेलीग्राम के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है जहाँ इसके 150 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं।
क्या होती है BGP हाइजैकिंग?
बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (BGP) इंटरनेट का एक मुख्य रूटिंग सिस्टम होता है, जो दुनिया भर के अलग-अलग नेटवर्कों के बीच डेटा को सही रास्ते से भेजने का काम करता है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नेटवर्क द्वारा बिना अनुमति के रूट बदलना या गलत रूट की घोषणा करना (अनधिकृत रूट अनाउंसमेंट) एक बेहद गंभीर मामला है। ऐसा करने से इंटरनेट ट्रैफिक अपने सही रास्ते से भटक जाता है।रिलायंस टेलीग्राम के आरोपों पर मौन
दुरोव ने दुनिया भर के नेटवर्क ऑपरेटरों से अपील की है कि वे रिलायंस के नेटवर्क से आने वाले ऐसे अनधिकृत BGP अनाउंसमेंट को रिजेक्ट करें ताकि इंटरनेट रूट हाइजैक न हो सके और कनेक्टिविटी सामान्य बनी रहे। इस पूरे मामले पर फिलहाल रिलायंस की तरफ से कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत में पहले से ही मुश्किलों में है टेलीग्राम
पावेल डुरोव का यह सनसनीखेज आरोप ऐसे समय में आया है जब टेलीग्राम भारत में पहले से ही चौतरफा कानूनी दिक्कतों का सामना कर रहा है।
- NEET लीक मामले में पाबंदी: इसी हफ्ते भारतीय अधिकारियों ने टेलीग्राम पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध बढ़ा दिया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क (Cheating Networks) परीक्षा के पेपर लीक करने के लिए टेलीग्राम ग्रुप्स का इस्तेमाल कर रहे थे। 21 जून को होने वाली NEET 2026 की री-एग्जामिनेशन (दोबारा परीक्षा) को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
- मैसेज एडिट करने पर रोक: सरकार ने प्रतिबंध अवधि के दौरान टेलीग्राम को पहले से पोस्ट किए गए मैसेजेस को एडिट (संशोधित) करने का फीचर भी ब्लॉक करने का निर्देश दिया है।
- सरकार का रुख: सरकार का कहना है कि यह कदम भारतीय आईटी कानूनों के तहत एक 'आखिरी उपाय' (Last-resort measure) के रूप में उठाया गया है, क्योंकि आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के पिछले प्रयासों के बाद भी मनमुताबिक नतीजे नहीं मिल रहे थे।