अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हालिया टिप्पणियों से दिल्ली में बेचैनी का माहौल है, लेकिन भारतीय सरकार ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है। ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी उनसे मिलने के लिए विनम्रता से अनुरोध करते हैं और कहा, “प्राइम मिनिस्टर मोदी मेरे पास आए और बोले, ‘सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं प्लीज’।” ट्रंप के खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया जा रहा है। कांग्रेस ने इस पर कई सारे मीम और वीडियो जारी कर दिए हैं, जिन्हें एआई से तैयार किया गया है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी उनसे “उतने खुश नहीं” हैं क्योंकि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगा दिया है, जिससे टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा, ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने अपाचे हेलीकॉप्टर्स की डिलीवरी में देरी के लिए पांच साल इंतजार किया, लेकिन अब वे इसे बदल रहे हैं और भारत ने 68 अपाचे ऑर्डर किए हैं।

सरकारी सूत्रों ने ट्रंप के अपाचे हेलीकॉप्टर्स वाले दावे का खंडन किया है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने कुल केवल 28 अपाचे हेलीकॉप्टर्स खरीदे हैं, जिसमें 22 भारतीय वायुसेना के लिए और 6 भारतीय थलसेना के लिए। सभी की डिलीवरी हो चुकी है। पहला सौदा 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान हुआ था और डिलीवरी ट्रंप के पहले कार्यकाल में पूरी हुई। दूसरा सौदा फरवरी 2020 में ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान हुआ, जिसकी डिलीवरी दिसंबर 2025 तक पूरी होने वाली है।

ताज़ा ख़बरें
ट्रंप की इन टिप्पणियों का संदर्भ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और रूसी तेल खरीद से जुड़े टैरिफ से है। अगस्त 2025 में भी ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने मोदी से कहा था कि अमेरिका भारत के साथ कोई सौदा नहीं करेगा और उच्च टैरिफ की धमकी दी थी, जिसके बाद मामला जल्दी सुलझ गया। ट्रंप ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष समाप्त करने का श्रेय भी खुद को दिया था। इसे उन्होंने 75 बार दोहराया। मोदी सरकार ने ट्रंप के उस बयान का यूएस राष्ट्रपति का नाम लिए बिना खंडन किया।

दिल्ली में राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है कि ट्रंप की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जाए या नहीं। लेकिन कूटनीतिक हलकों में संयम बरतने की सलाह दी जा रही है। एक सूत्र ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति जो कुछ कह रहे हैं, उस पर बयान दर बयान कमेंट्री करने की जरूरत नहीं है। हमें अपने व्यापार वार्ताओं पर फोकस करना चाहिए, यही हमारी प्राथमिकता है।”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लक्जमबर्ग में बाहरी सलाह पर टिप्पणी करते हुए कहा, “जो लोग हमारे साथ काम करने को तैयार हैं और सकारात्मक मदद करते हैं, हमें उनके साथ उसी तरह व्यवहार करना चाहिए। जो पाकिस्तान जैसी चीजें करते हैं, उनके साथ अलग तरीके से निपटना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “दूर बैठे लोग कभी सोच-समझकर, कभी लापरवाही से, कभी स्वार्थ से बातें कहते हैं... देश तब ही कुछ करेंगे जब उन्हें सीधा फायदा हो। वे मुफ्त सलाह देते हैं।”

सरकार का मानना है कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं “काउंटर-प्रोडक्टिव” हो सकती हैं और व्यापार समझौते पर असर डाल सकती हैं। दिल्ली ने पहले भी ट्रंप के कुछ दावों का फैक्ट-चेक किया है, लेकिन फिलहाल चुप्पी साधे रखने का फैसला किया है।