अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के आपातकालीन टैरिफ को रद्द करने के फैसले के बाद, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। मोदी सरकार क्या ट्रेड डील पर फिर से बातचीत के लिए ट्रंप प्रशासन से कहेगी।
नमस्ते ट्रंप का आयोजन पीएम मोदी ने ही किया था
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले (6-3 के बहुमत से) में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ (Tariffs) को अवैध घोषित कर दिया है।
US कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के पास 'आपातकालीन शक्तियों' का उपयोग करके इस तरह के अनिश्चितकालीन टैक्स लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है; यह अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है। इससे ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए वे भारी-भरकम टैरिफ (जो 50% तक पहुँच गए थे) कानूनी रूप से कमजोर पड़ गए हैं।
ट्रंप का अड़ियल रुख: "डील जारी रहेगी"
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने हार मानने के बजाय और आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने तुरंत एक नया कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी कर सभी देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि भारत के साथ जो हालिया ट्रेड डील (फरवरी 2026 की शुरुआत में तय हुई) हुई है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, "वे (भारत) टैरिफ देंगे और हम नहीं देंगे।" ट्रंप का मानना है कि भारत ने पहले ही रूसी तेल कम खरीदने और अमेरिकी सामान खरीदने की सहमति दे दी है, इसलिए अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।मोदी सरकार के सामने क्या विकल्प हैं?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारत के हाथ में एक 'बारगेनिंग चिप' (सौदा करने की ताकत) दे दी है। अब सरकार के पास ये रास्ते हैं:
- डील को रद्द या री-नेगोशिएट करना: चूंकि अब वह कानूनी आधार (Emergency Tariffs) ही खत्म हो गया है जिसके दबाव में भारत ने 18% टैरिफ स्वीकार किया था, भारत कह सकता है कि अब उसे पुराने (कम) टैरिफ रेट ही चाहिए।
- कड़ा स्टैंड (Reciprocity): भारत अपनी 'टैक्स फ्री' पहुंच की मांग दोबारा कर सकता है, क्योंकि अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक माना है।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) का रुख: भारत इस फैसले को आधार बनाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिकी दबाव को चुनौती दे सकता है।
क्या मोदी ट्रंप को चुनौती देंगे?
यूएस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सवाल पूछा जा रहा है कि क्या भारतीय प्रधानमंत्री अब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को चुनैती देंगे।
- रणनीतिक संबंध: भारत को चीन के खिलाफ और तकनीक/रक्षा क्षेत्र में अमेरिका की जरूरत है।
- रूसी तेल का मुद्दा: ट्रंप ने भारत को $500 बिलियन के अमेरिकी उत्पाद खरीदने और रूसी तेल छोड़ने पर राजी किया है। अगर भारत डील रद्द करता है, तो ट्रंप दोबारा कड़े प्रतिबंध लगा सकते हैं।
- आर्थिक स्थिरता: भारतीय निर्यातकों (कपड़ा, इंजीनियरिंग, रसायन) को अनिश्चितता से बचाने के लिए सरकार शायद पूरी तरह से टकराव के बजाय 'बीच का रास्ता' ढूंढना चाहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने निश्चित रूप से ट्रंप की 'टैरिफ नीति' की हवा निकाल दी है, जिससे भारत को बातचीत की मेज पर मजबूती मिली है। अब गेंद मोदी सरकार के पाले में है, क्या वो इस कानूनी जीत का फायदा उठाकर भारत के लिए बेहतर शर्तें मनवाएगी, या रणनीतिक रिश्तों की खातिर ट्रंप की शर्तों को ही निभाते रहेगी?