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लव जिहाद: क़ानून बनाने की बात क्यों कर रही है बीजेपी?

हरियाणा के फ़रीदाबाद में कुछ दिन पहले निकिता तोमर नाम की लड़की को गोली मार दी गई। उस वक़्त निकिता एग्जाम देकर कॉलेज से निकल रही थी। उसे गोली मारने वाला लड़का उसके साथ पढ़ा था। यानी निकिता उसे जानती थी। निकिता की मौत के बाद सोशल मीडिया पर इसे 'लव जिहाद' का नाम दे दिया गया। कारण था कि गोली मारने वाले लड़के का नाम तौसीफ़ और उसके साथ आए शख़्स का नाम रेहान था। 

इस घटना के बाद से ही 'लव जेहाद' के मुद्दे को बीजेपी ने फिर से उठा लिया है। अब बीजेपी शासित कुछ राज्य सरकारें ‘लव जिहाद’ को लेकर क़ानून बनाने की बात कर रही हैं और इसकी शुरुआत की है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। 

'लव जिहाद' की परिभाषा हिंदू संगठन ये बताते हैं कि इसके तहत मुसलिम युवक हिंदू लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाते हैं और फिर शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने को मजबूर करते हैं। 

योगी आदित्यनाथ ने एक सभा में 'लव जिहाद' का ज़िक्र करते हुए कहा कि जो कोई भी हमारी बहनों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेगा उसकी 'राम नाम सत्य है' की यात्रा अब निकलने वाली है। योगी ने कहा कि उनकी सरकार इसके लिए क़ानून बनाएगी। 

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हरियाणा, एमपी भी कूदे

योगी के इस बयान के बाद हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि उनकी सरकार भी 'लव जिहाद' को लेकर क़ानून बनाने पर विचार कर रही है। इसके बाद ऐसा लगने लगा कि अब एक के बाद एक सभी बीजेपी शासित राज्य इसे लेकर क़ानून बनाने की बात करेंगे और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे सही साबित कर दिया। 

बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश

चौहान ने कहा है कि लव के नाम पर जिहाद नहीं करने दिया जाएगा और अगर कोई इसमें शामिल पाया गया तो उसे सबक सिखाया जाएगा और उनकी सरकार इसके लिए क़ानून बनाएगी। इसमें कोई शक नहीं है कि बीजेपी जिन भी राज्यों में अपने दम पर सरकार में है या गठबंधन में है, वहां से भी अब ऐसे ही बयान आने शुरू हो जाएं और 'लव जिहाद' को देश के लिए सबसे ज़रूरी मुद्दे के रूप में पेश कर दिया जाए। 

असम की बीजेपी सरकार के मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का कहना है कि बीजेपी 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 'लव जिहाद' के मामलों के ख़िलाफ़ एक अभियान शुरू करेगी। असम बीजेपी का कहना है कि असमिया लड़कियां 'लव जिहाद' की शिकार हो रही हैं।

फ़रीदाबाद की घटना के बाद होना तो यह चाहिए था कि बीजेपी के समझदार नेता ये कहते कि निकिता के हत्यारे को क़ानून सम्मत कड़ी सजा दिलवाई जाएगी और महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए बने क़ानूनों पर सख़्ती से अमल करवाया जाएगा जिससे कि कोई ऐसी घटनाओं को अंजाम देने की सोच भी नहीं सके। 

राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश

'लव जिहाद' के मुद्दे को बीजेपी में सबसे पहले योगी आदित्यनाथ ने ही उठाया था। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद उसी साल सितंबर में उत्तर प्रदेश में 11 सीटों के लिए विधानसभा के उपचुनाव हुए थे। बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को इस उपुचनाव के लिए स्टार प्रचारक बनाया था।

यूपी में फ़ेल हो गया मुद्दा

प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ चुनावी रैलियों में कहते थे, ‘अब जोधाबाई अकबर के साथ नहीं जाएगी और सिकंदर अपनी बेटी चंद्रगुप्त मौर्य को देने के लिए मजबूर होगा।’ उन्होंने इस तरह के बयानों से हिंदू मतों का ध्रुवीकरण करने की पूरी कोशिश की थी लेकिन यह मुद्दा फ़ेल हो गया था और 11 सीटों में से 8 सीटें समाजवादी पार्टी को और बीजेपी को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं। यह तब हुआ था जब इससे चार महीने पहले ही नरेंद्र मोदी के नाम पर बीजेपी को देश और उत्तर प्रदेश में बंपर जीत मिली थी। 

बड़ा सवाल

असम में चुनाव होने हैं, वहां के मंत्री ने 'लव जिहाद' को लेकर बयान दिया है, मध्य प्रदेश में उपचुनाव हो रहे हैं वहां शिवराज सिंह चौहान ने बयान दिया है, उत्तर प्रदेश में चुनाव में सवा साल का वक़्त बचा है और हरियाणा में भी एक सीट पर उपचुनाव हो रहा है। यह सवाल उठता है कि ये सारे बयान ऐसे ही राज्यों से क्यों आ रहे हैं, जहां चुनाव या तो हो रहे हैं या होने वाले हैं। 

तनिष्क के विज्ञापन को लेकर हुए विवाद पर देखिए, वीडियो- 

हदिया का मामला 

केरल में युवक-युवतियों के घर से भाग जाने के कई संदिग्ध मामलों की जांच केरल की जांच एजेंसियों ने की थी और तब इन मामलों को 'लव जेहाद' का नाम दिया गया था। इनमें से 2018 का हदिया नाम की लड़की का मामला काफ़ी चर्चित हुआ था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दख़ल देना पड़ा था। कोर्ट ने कहा था कि 25 साल की हदिया अपने पति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है। 

केंद्र सरकार का इनकार 

हैरानी की बात यह है कि बीजेपी के मंत्री, मुख्यमंत्री 'लव जिहाद' के लिए क़ानून की बात करते हैं और केंद्र सरकार संसद में कह चुकी है कि 'लव जिहाद' जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है। केंद्र सरकार ने इस साल फ़रवरी में संसद में कहा था कि केरल में इस तरह का कोई भी मामला केंद्रीय एजेंसियों की जानकारी में नहीं आया है। देश में कई अदालतें जिनमें केरल हाई कोर्ट भी शामिल है उन्होंने भी इस तथ्य की पुष्टि की है। सरकार ने यह भी कहा था कि वर्तमान क़ानूनों के तहत लव जेहाद की कोई परिभाषा नहीं है। 

अब सवाल यह है कि जब सरकार ख़ुद ही संसद में कह चुकी है कि लव जेहाद को वर्तमान क़ानूनों के तहत परिभाषित नहीं किया जा सकता तो आख़िर किस बिना पर बीजेपी शासित राज्य इसे लेकर क़ानून बनाने जा रहे हैं।

तनिष्क के विज्ञापन पर विवाद 

हाल ही में तनिष्क ज्वैलरी के एक विज्ञापन को लेकर देश में बखेड़ा खड़ा कर दिया गया। इस विज्ञापन में एक गर्भवती हिंदू महिला की ‘गोद भराई’ की रस्म थी और उसका ससुराल एक मुसलिम परिवार में होना दिखाया गया। दक्षिणपंथी विचार वाले ट्रोलों ने विज्ञापन को 'लव जिहाद' से जोड़ दिया और इसका बहिष्कार किया। इसके बाद तनिष्क को यह विज्ञापन हटाना पड़ा। ट्रोलर्स ने तनिष्क के कर्मचारियों को धमकियां भी दीं। तब सवाल यह उठा कि क्या तनिष्क को ट्रोलर्स के सामने घुटने टेक देने चाहिए थे? 

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ऐसे मामलों में जहां अलग-अलग मज़हब के दो लोग शादी करें और कोई झगड़ा हो या किसी तरह का विवाद हो तो उसके निपटारे के लिए देश में क़ानून, अदालत और पुलिस है। मामले की जांच कर दोषी को कड़ी सजा दिलाने की बात तो सही है लेकिन उसे 'लव जिहाद' का नाम दे देना और उसके लिए बीजेपी शासित राज्यों के द्वारा क़ानून बनाने की बात कहने के पीछे मतलब चुनावों में हिंदू मतों का ध्रुवीकरण और नफ़रत की सियासत को बढ़ावा देना ही है। 
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