विपक्ष की कई पार्टियां टूटने के कगार पर हैं। कुछ में बगावत के आसार हैं। कुछ के सांसद अलग होकर बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन कर रहे हैं या करने वाले हैं। केंद्र सरकार लोकसभा में परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को दोबारा पेश करने की संभावनाएं तलाश रही है। टीएमसी और शिवसेना यूबीटी की बगावत के बावजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अभी भी संविधान संशोधन पारित कराने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े 362 से काफी दूर है। लेकिन विपक्षी पार्टियों में बगावत उसे जादुई आंकड़े के करीब ले जा रही है। जिसमें ताजा बगावत शिवसेना यूबीटी की है।
मोदी सरकार मुख्य रूप से दो बड़े संवैधानिक संशोधनों को पारित कराना चाहती है:

  • लोकसभा सीटों का विस्तार: लोकसभा की सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 815 करना और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन (delimitation) प्रक्रिया को शुरू करना। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 (50% बढ़ोतरी) और तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 हो सकती हैं। लेकिन कांग्रेस समेत विपक्ष ने इसके पास होने पर दक्षिण भारत के साथ अन्याय की आशंका पहले ही जता दी है। डीएमके ने इसी आधार पर लोकसभा में इस बिल का जोरदार विरोध किया था।
  • एक देश, एक चुनाव (Simultaneous Elections): यह बिल फिलहाल संसद की संयुक्त समिति (Joint Committee of Parliament) के पास विचाराधीन है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी और आरएसएस क्षेत्रीय दलों दलों को खत्म करना चाहते हैं।

दोनों सदनों में सीटों का मौजूदा समीकरण

संविधान के अनुच्छेद 368 के मुताबिक, किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत के साथ-साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत की आवश्यकता होती है। एनडीए अभी भी दो तिहाई बहुमत के आंकड़े से दूर है। असली लड़ाई लोकसभा में है। लेकिन राज्यसभा में वो दो तिहाई के बहुमत को मैनेज कर सकती है। 

ताज़ा ख़बरें

लोकसभा का गणित कुल सीटें: 540, खाली: 3

  • दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा: 362 सीटें
  • NDA की मौजूदा स्थितिः 292 सीटें 
  • तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों के पाला बदलकर 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने और एनडीए को समर्थन देने के बाद, एनडीए की ताकत 312 तक पहुंच गई है। 
  • शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों के औपचारिक रूप से अलग गुट या पार्टी (शिवसेना शिंदे) में शामिल होने पर यह संख्या 318 हो जाएगी।कितनी कमी है: दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए एनडीए को लोकसभा में अभी भी 44 और सांसदों के समर्थन की जरूरत है। 

डीएमके किधर जाएगी

डीएमके (22 लोकसभा सांसद) हाल ही में विपक्षी 'INDIA' ब्लॉक से अलग हो गई है, क्योंकि कांग्रेस ने तमिलनाडु में सी. जोसेफ विजय की टीवीके (TVK) सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। अगर डीएमके एनडीए का साथ देती है, तो भी दो-तिहाई बहुमत के लिए 24 सीटों की कमी रह जाएगी। हालांकि, डीएमके परिसीमन बिल (Delimitation Bill) के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रही है, क्योंकि इससे उत्तर भारतीय राज्यों को अधिक सीटें मिलेंगी। लेकिन अगर मोदी सरकार डीएमके की सलाह मान लेती है तो फिर डीएमके भी मोदी सरकार के इस बिल का समर्थन कर सकती है।

समाजवादी पार्टी क्या दे सकती है समर्थन

एनडीए के लिए इस गैप को भरने का एक आसान तरीका समाजवादी पार्टी (37 लोकसभा सांसद) के साथ कोई गुप्त समझौता हो सकता है, लेकिन एसपी फिलहाल 'इंडिया' ब्लॉक का हिस्सा है और उसने अप्रैल में परिसीमन से जुड़े बिलों के खिलाफ मतदान किया था। 
कांग्रेस में क्या लग सकती है सेंधः लोकसभा और राज्यसभा में भी मोदी सरकार को कांग्रेस के असंतुष्ट सांसद का समर्थन या सदन में वोटिंग के समय गैरहाजिर रहने का लाभ मिल सकता है। शशि थरूर जैसे लोगों पर बीजेपी की नज़र पहले से ही है।

एनसीपी शरद पवार पार्टी क्या करेगी

शरद पवार के नेतृत्व वाले 8 सांसदों का क्या रुख रहेगा। इसकी चर्चा नहीं है। हालांकि शरद पवार का खुद का रुख कमोबेश पीएम मोदी के समर्थन में रहता है। हालांकि वो इंडिया गठबंधन की बैठकों में भी शामिल रहते हैं। लेकिन मौका पड़ने पर उनके सांसद केंद्र सरकार का समर्थन कर देते हैं। ऐसा पहले कई बार हुआ है।
  • झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का रुख भी बदला है। उसके तीन सांसद मोदी सरकार के बिल का समर्थन कर सकते हैं। फिलहाल ये लोग इंडिया के साथ हैं। इसके बावजूद दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा एनडीए को इस बिल के लिए नहीं मिल पाएगा। ऐसे में उसे सपा और कांग्रेस के लिए अतिरिक्त मेहनत करना पड़ेगी।

राज्यसभा का गणित 

  • कुल सीटें: 245
  • दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा: 164 सीटें
  • NDA की मौजूदा स्थिति: वर्तमान में एनडीए के पास 148 सांसद हैं। राज्यसभा चुनाव कुछ सीटों पर हो रहे हैं और पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों पर उपचुनाव के बाद यह संख्या 155 तक पहुंच सकती है।
  • कितनी कमी है: राज्यसभा में दो-तिहाई आंकड़े के लिए एनडीए को 9 और सांसदों की जरूरत होगी, जिसके लिए उसे बीजू जनता दल (BJD - 5 सांसद) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP - 7 सांसद) के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ सकता है। खबरें हैं कि बीजेडी टूट रही है।