अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में फिलिस्तीनी लोगों के समर्थन में प्रदर्शन हुआ। लेकिन ज़ी न्यूज़ ने साम्प्रदायिक नज़रिए से इसकी कवरेज की। NBDSA ने कार्रवाई करते हुए ज़ी न्यूज़ पर दो लाख का जुर्माना और सात दिनों में विवादित रिपोर्ट हटाने का आदेश दिया है। ज़ी न्यूज़ ऐसी हरकतें करता रहा है।
ज़हरीली साम्प्रदायिक रिपोर्टिंग के लिए ज़ी न्यूज़ पर दो लाख जुर्माना
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रों के प्रदर्शन की कवरेज को लेकर ज़ी न्यूज़ पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने माना कि चैनल की कवरेज ने प्रसारण आचार संहिता का उल्लंघन किया और प्रदर्शन को लेकर इस्तेमाल की गई भाषा और प्रस्तुति भड़काऊ तथा गैर-निष्पक्ष थी। NBDSA ने ज़ी न्यूज़ को संबंधित वीडियो फुटेज अपनी वेबसाइट, YouTube और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने तथा सात दिनों के भीतर अनुपालन की पुष्टि करने का निर्देश भी दिया है।
किस मामले में हुई कार्रवाई?
यह मामला 12 अगस्त 2025 को AMU में हुए छात्र प्रदर्शन की कवरेज से जुड़ा है। प्रदर्शन मुख्य रूप से फीस बढ़ोतरी के विरोध और छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में नारे भी लगाए गए थे। AMU के पूर्व छात्र और मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) में पीएचडी शोधार्थी तल्हा मन्नान ने इस कवरेज को लेकर शिकायत की थी। मन्नान ने प्रदर्शन में करीब 18 मिनट का भाषण भी दिया था। उनका आरोप था कि ज़ी न्यूज़ ने प्रदर्शन के व्यापक संदर्भ को सामने रखने के बजाय नारों के केवल कुछ सेकंड के फुटेज प्रसारित किए और उन्हें इस तरह पेश किया कि छात्रों की फिलिस्तीन के प्रति एकजुटता को आपराधिक या राष्ट्रविरोधी गतिविधि के तौर पर देखा जाने लगा।16 अगस्त 2025 को प्रसारित हुए थे कार्यक्रम
शिकायत ज़ी न्यूज़ पर 16 अगस्त 2025 को प्रसारित दो कार्यक्रमों से संबंधित थी। इनमें एक कार्यक्रम 'देशहित' था, जिसका शीर्षक था:
“AMU में 'फिलिस्तीन प्रेमी गैंग'.. 'योगी स्टाइल' में होगा इलाज!”
दूसरा कार्यक्रम 'DNA' था, जिसका शीर्षक था:
“फीस माफी वाले आंदोलन में फिलिस्तीन जिंदाबाद कहाँ से आ गया? Aligarh Muslim University”
शिकायतकर्ता का कहना था कि इन शीर्षकों और प्रसारण में इस्तेमाल भाषा ने पूरे प्रदर्शन को उसके वास्तविक मुद्दों से अलग करके पेश किया।NBDSA ने क्या माना?
मामले की सुनवाई के दौरान NBDSA ने प्रसारण और दोनों पक्षों की दलीलों की समीक्षा की। प्राधिकरण ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे—फीस बढ़ोतरी का विरोध और छात्रसंघ की बहाली—को कवरेज में पर्याप्त रूप से नहीं दिखाया गया। इसके बजाय कवरेज में फिलिस्तीन के समर्थन में लगाए गए नारों पर प्रमुखता से ध्यान केंद्रित किया गया। NBDSA के अनुसार इससे दर्शकों के बीच यह धारणा बन सकती थी कि पूरा प्रदर्शन ही फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर आयोजित किया गया था। प्राधिकरण ने स्क्रीन पर चलाए गए कुछ टिकरों को भी गंभीरता से लिया। इनमें “AMU में फिलिस्तीन प्रेमी गैंग” और “योगी स्टाइल में होगा इलाज” जैसे वाक्य शामिल थे।ज़ी न्यूज़ को क्या निर्देश दिया गया?
NBDSA ने ज़ी न्यूज़ पर ₹2 लाख का आर्थिक दंड लगाया। इसके साथ ही चैनल को विवादित प्रसारण की फुटेज को जहां उपलब्ध हो, वहां से हटाने का निर्देश दिया गया है।
इसमें शामिल हैं:
ज़ी न्यूज़ की वेबसाइट
YouTube चैनल
अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म
संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
ऐसे हाइपरलिंक जो विवादित प्रसारण तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं। चैनल को आदेश के अनुपालन की सात दिनों के भीतर पुष्टि करने को कहा गया है।शिकायतकर्ता की आपत्ति क्या थी?
तल्हा मन्नान का आरोप था कि चैनल ने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों के करीब 10–15 सेकंड के चुनिंदा हिस्सों को प्रसारित किया, जबकि प्रदर्शन का व्यापक संदर्भ फीस वृद्धि का विरोध और छात्रसंघ की बहाली छोड़ दिया गया। उनके मुताबिक इससे एक शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन को ऐसी छवि मिली, मानो उसका मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीन के समर्थन में राजनीतिक या राष्ट्रविरोधी गतिविधि करना हो। NBDSA की टिप्पणियां इस शिकायत के उस हिस्से से जुड़ी हुई थीं जिसमें प्रदर्शन के संदर्भ और प्रसारण की प्रस्तुति के बीच अंतर पर सवाल उठाया गया था।नागरिक अधिकार संगठनों ने फैसले का स्वागत किया
NBDSA के फैसले के बाद Association for Protection of Civil Rights (APCR) ने आदेश का स्वागत किया। संगठन ने कहा कि समाचार संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे सार्वजनिक घटनाओं को सही तथ्य, निष्पक्षता और पूरे संदर्भ के साथ पेश करें। APCR के मुताबिक किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन, राजनीतिक विचार या किसी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे के प्रति एकजुटता को केवल चुनिंदा फुटेज, उत्तेजक हेडलाइन या भड़काऊ टिकरों के आधार पर आपराधिक गतिविधि के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। Students Islamic Organisation of India (SIO) ने भी NBDSA के फैसले का स्वागत किया। संगठन ने आरोप लगाया था कि ज़ी न्यूज़ की कवरेज ने छात्रों के प्रदर्शन को आपराधिक और उग्रवादी रंग देने की कोशिश की थी।डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फुटेज को लेकर सवाल
दिलचस्प बात यह है कि कुछ रिपोर्टों के अनुसार आदेश जारी होने के बाद भी रिपोर्ट लिखे जाने के समय संबंधित फुटेज ज़ी न्यूज़ के YouTube चैनल पर उपलब्ध दिखाई दे रहा था। NBDSA के आदेश में इसे वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने तथा संबंधित लिंक हटाने का निर्देश दिया गया है।मीडिया की जवाबदेही पर फिर बहस
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब टीवी न्यूज़ चैनलों द्वारा छात्र आंदोलनों, विश्वविद्यालयों, अल्पसंख्यकों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दों की कवरेज को लेकर लगातार बहस होती रही है। NBDSA का यह आदेश इस सवाल को फिर सामने लाता है कि समाचार रिपोर्टिंग और संपादकीय टिप्पणी की सीमा कहां है और क्या किसी प्रदर्शन के चुनिंदा हिस्से को पूरे आंदोलन का प्रतिनिधि बताकर पेश करना निष्पक्ष पत्रकारिता माना जा सकता है।इस मामले में NBDSA ने आर्थिक दंड लगाने के साथ सामग्री हटाने का निर्देश देकर यह संदेश दिया है कि प्रसारण की स्वतंत्रता के साथ सटीकता, निष्पक्षता और संदर्भ की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।