तमिलनाडु में कपड़ा उद्योग की हालत पहले से ही कितनी ख़राब है, यह इससे समझा जा सकता है कि पिछले दो साल में 300 से ज़्यादा टेक्सटाइल मिलें बंद हो गई हैं। उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।

यह ख़बर भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि तमिलनाडु देश का प्रमुख कपड़ा उत्पादन केंद्र है। लेकिन सिर्फ़ तमिलनाडु ही नहीं, पूरे भारत के कपड़ा क्षेत्र पर अब बांग्लादेश की वजह से नई चुनौतियाँ आ गई हैं। बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ एक ऐसा समझौता किया है, जिससे भारतीय कपास और कपड़ों का निर्यात प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही ट्रंप के टैरिफ़ ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। हालाँकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ़ को रद्द कर दिया है, लेकिन ट्रंप इसे दूसरे तरीक़े से लागू कर रहे हैं। अब टेक्सटाइल से जुड़े पूरे उद्योग पर इसका ख़तरा मंडरा रहा है।

यह ख़तरा कितना बड़ा है, यह जानने से पहले यह जान लें कि टेक्सटाइल को लेकर हाल ही में रिपोर्ट क्या आई है। केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय ने इस महीने वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि 2021-22 से 2023-24 के बीच तमिलनाडु में 300 से ज़्यादा टेक्सटाइल मिलें बंद हो गईं। 2021-22 में राज्य में कुल 2773 टेक्सटाइल मिलें थीं, जिनमें से 2121 चल रही थीं। 2023-24 तक यह संख्या घटकर 2455 रह गई और सिर्फ 1672 मिलें ही काम कर रही थीं।
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2021-22 में 11460 कपड़ा और परिधान इकाइयां थीं, जिनमें से 8771 चल रही थीं। 2023-24 में यह संख्या 11467 हो गई, लेकिन सिर्फ 8503 ही काम कर रही थीं। इसमें टेक्सटाइल मिलें, बुनाई, प्रसंस्करण और गारमेंट बनाने वाली इकाइयां शामिल हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में लगभग दो लाख पावरलूम यानी बिजली से चलने वाली बुनाई मशीनें भी स्क्रैप कर दी गई हैं। यानी उन्हें बंदकर बेच दिया गया है।

बंद होने की बड़ी वजहें

कपड़ा उद्योग के जानकारों का कहना है कि कई वजहों से यह संकट आया है। ज़्यादातर मिलें छोटे और मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई की हैं, जो बड़े कारखानों से मुक़ाबला नहीं कर पातीं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार साउथ इंडिया स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन यानी एसआईएसपीए के सचिव जगदीश चंद्रन ने बताया, 'एमएसएमई को कच्चे माल, बैंक ब्याज और बिजली की लागत में नुक़सान हो रहा है। इसी वजह से कई छोटी मिलें बंद हो गईं।'

बिजली की महंगी दरें

तमिलनाडु में मिलों के लिए बिजली की क़ीमत 9.25 रुपये प्रति यूनिट है। यह दूसरे राज्यों से कम से कम 1 रुपये ज़्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार एसोसिएशन के एक प्रवक्ता ने कहा, 'केवल वे मिलें बची हैं जिन्होंने पवन और सौर ऊर्जा में निवेश किया है। तमिलनाडु की नवीकरणीय ऊर्जा नीति सबसे लचीली है, लेकिन बिजली की सालाना बढ़ोतरी बंद होनी चाहिए।'
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कच्चे माल की समस्या

कपास, पॉलिएस्टर या विस्कोज जैसे कच्चे माल उत्तर भारत से आते हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ जाती है। पहले कपास पर आयात शुल्क और गुणवत्ता नियंत्रण आदेश थे, जो अब हटा दिए गए हैं, लेकिन पहले इनसे उद्योग प्रभावित हुआ।

प्रोसेसिंग की लागत

यहां की प्रोसेसिंग इकाइयों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज यानी गंदा पानी बाहर न निकलने देने का पालन करना पड़ता है, जो महंगा है। जबकि गुजरात जैसे राज्य समुद्र में उपचारित पानी छोड़ने की अनुमति देते हैं।

उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में एक एकीकृत कपड़ा नीति लाई है, लेकिन सब्सिडी की सीमाएं हटानी चाहिए। इससे छोटे उद्यमों को मदद मिलेगी।

बांग्लादेश से मिल रही कड़ी टक्कर

2025 में भी भारत को बांग्लादेश से कड़ी चुनौती मिली थी। अमेरिका में कपड़ों के आयात के आंकड़ों (ओटेक्सा) के अनुसार, 2025 के पहले 7 महीनों में भारत ने 6.22 अरब डॉलर के कपड़े निर्यात किए, जो पिछले साल से 11.4% ज्यादा थे। बांग्लादेश ने 5.11 अरब डॉलर के कपड़े भेजे, लेकिन उसकी बढ़ोतरी 21.1% रही- यानी भारत से दोगुनी रफ्तार रही। यह दिखाता है कि बांग्लादेश का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है, जबकि भारत पीछे छूट रहा है।

बांग्लादेश का अमेरिका से समझौता

इस बीच, बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ एक बड़ा समझौता किया है, जिससे भारतीय कपड़ा उद्योग पर और दबाव पड़ सकता है। इस सौदे के तहत बांग्लादेश को अमेरिका में कपड़ों पर जीरो टैरिफ मिलेगा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ टैरिफ रद्द किए हैं, फिर भी भारतीय कपड़ों पर शुल्क लग सकता है।
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सबसे बड़ी बात है कि बांग्लादेश अब अमेरिका से ही कपास खरीदेगा, जबकि पहले वह भारत से कपास आयात करता था। इससे भारत दो तरफ से नुकसान में रहेगा- न तो बांग्लादेश को कपास बेच पाएगा, और न ही अमेरिका में बांग्लादेश से मुकाबला कर पाएगा।

सवाल उठ रहे हैं कि भारतीय कपड़ा उद्योग का क्या होगा? बांग्लादेश ने यह कदम क्यों उठाया? विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहता है और अमेरिका के साथ करीबी रिश्ते बना रहा है। मोदी सरकार पर अब चारों तरफ से सवाल हो रहे हैं। सरकार क्या जवाब देगी? क्या नई नीतियां लाएगी या सब्सिडी बढ़ाएगी?
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क्या हो सकता है असर?

कपड़ा उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है, जो लाखों लोगों को रोजगार देता है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में मिलों के बंद होने से बेरोजगारी बढ़ सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार को तुरंत क़दम उठाने चाहिए- जैसे बिजली दरें कम करना, कच्चे माल पर सब्सिडी देना और अंतरराष्ट्रीय समझौतों में भारत के हितों की रक्षा करना। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो भारतीय कपड़ा उद्योग पर और बड़ा संकट आ सकता है।