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आम्रपाली समूह की कंपनी में हिस्सेदारी थी धोनी की पत्नी की

क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी और उनकी पत्नी साक्षी एक बार फिर विवादों में हैं। आरोप यह है कि साक्षी जिस कंपनी की निदेशक हैं, उसे आम्रपाली समूह ने ग़ैरक़ानूनी तरीके से पैसे दिए। ये पैसे फ़्लैट ख़रीदने वालों के थे, लेकिन आम्रपाली ने ये पैसे ग़लत तरीके से निकाल कर अपनी समूह कंपनियों को दे दिए। यह आरोप भी लग रहा है कि धोनी के विज्ञापन का कामकाज देखने वाली कंपनी ने फ़र्जी क़रार के आधार पर करोड़ों रुपये आम्रपाली से लिए। धोनी इस कंपनी के निदेशक नहीं हैं, पर उसकी 15 फ़ीसदी हिस्सेदारी साल 2013 तक उनके पास थी। 
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सिर्फ़ ब्रांड अम्बेसेडर हैं धोनी?

हालाँकि धोनी ने आम्रपाली विवाद के शुरू होते ही यह कह कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी कि वह तो सिर्फ़ ब्रांड अम्बेसेडर रहे हैं और कंपनी के कामकाज से उन्हें कभी कोई मतलब नहीं रहा है। पर जब पूरे मामले की जाँच शुरू हुई और ऑडिट रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की गई तो यह साफ़ हो गया कि मामला उतना आसान भी नहीं है। 
साक्षी सिंह धोनी आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड यानी एएमडीपीएल की निदेशक हैं, जिसमें उनकी 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष 75 प्रतिशत हिस्सेदारी आम्रपाली समूह के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक यानी सीएमडी अनिल कुमार शर्मा के पास है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक़, आम्रपाली समूह ने 5,619 करोड़ रुपए समूह कंपनियों में ग़ैरक़ानूनी तरीके से बाँटे। साक्षी धोनी की कंपनी एएमडीपीएल को भी पैसे दिए गए। ये पैसे फ़्लैट खरीदने वालों के थे। इन पैसों से फ़्लैट बनना था, ताकि फ़्लैट ख़रीददारों को समय पर दिया जा सके। पर ये पैसे कंपनियों में बाँट दिए गए, फ़्लैट नहीं बने और ख़रीदारों को कुछ नहीं मिला।

साक्षी धोनी का कनेक्शन!

रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ के मुताबिक़, एएमडीपीएल की स्थापना वित्तीय वर्ष 2011 में ही हो गई थी, पर उसने अगले तीन साल यानी वित्तीय वर्ष 2012, 2013 और 2014 तक कोई कामकाज नहीं किया, इसने कोई पैसा नहीं कमाया। 

धोनी ने 2016 में आम्रपाली समूह के विज्ञापन से ख़ुद को अलग कर लिया। पर वह उसके तीन साल बाद यानी मार्च 2019 में सुप्रीम कोर्ट गए और कहा कि उन्हें उनकी फ़ीस के 40 करोड़ रुपये दिलवाए जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली मामले में बुधवार को जो टिप्पणी की, वह चौंकाने वाली है। अदालत ने कहा:

फ़ोरेंसिक ऑडिटर्स की रिपोर्ट से साफ़ है कि फ़ेमा यानी विदेशी मुद्रा अधिनियम का उल्लंघन के प्रथम दृष्टया साक्ष्य हैं, मनी लॉन्डरिंग की गई है। इसके मद्देनज़र हम प्रवर्तन निदेशालय और सम्बन्धित विभागों से कह रहे हैं कि वे इसकी जाँच करें और इसकी ज़िम्मेदारी तय करें, इसकी रिपोर्ट पेश करें। पुलिस अब तक की जाँच की रिपोर्ट भी पेश करे।


आम्रपाली समूह पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

फ़र्जी क़रार?

पर मामला इतना ही नहीं है। महेंंद्र सिंह धोनी से जुड़े मामले और भी हैं, अनियमितताओं के दूसरे आरोप भी हैं। धोनी के स्पॉनसरशिप और एनडोर्समेंट यानी विज्ञापन का कामकाज ऋति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड देखती है। इस कंपनी में धोनी की 15 फ़ीसदी हिस्सेदारी साल 2013 तक थी। लेकिन धोनी या उनकी पत्नी इसकी निदेशक नहीं रही हैं। आम्रपाली समूह की कंपनी आम्रपाली सफ़ायर डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने एक सादे काग़ज़ पर एक क़रार कर ऋति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को 6.52 करोड़ रुपये दिए। लेकिन इसके लिए कंपनी की अनुमति नहीं ली गई थी। इस पर फ़ोरेंसिक ऑडिट करने वाली कंपनी ने गंभीर टिप्पणी की है।  

यह साफ़ है कि यह क़रार सिर्फ़ ऋति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को पैसे देने के लिए किया गया था, यह क़रार नकली था। हमें लगता है कि फ़्लैट ख़रीदने वालों के पैसे ग़लत और ग़ैरक़ानूनी तरीके से दूसरों में बाँटे गए, ये पैसे उनसे वसूले जाएँ, क्योंकि यह क़रार नियम के मुताबिक़ नहीं था।


ऋति स्पोर्ट्स पर ऑडिटर की टिप्पणी

ऋति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट ने इंडियन एक्सप्रेस को इस पर जवाब दिया। उसने कहा कि आम्रपाली ने उसे जो पैसे दिए, वे उसके द्वारा दी गई सेवाओं के एवज़ में थे, वे बिल्कुल सही थे, वे पैसे उसे मिलने ही थे। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई और न ही पैसे ग़लत तरीके से निकाल कर बाँटे गए। उसे तो इसके अलावा और 40 करोड़ रुपये दिए जाने चाहिए। 

पहले भी विवादों में रही हैं साक्षी

लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब साक्षी धोनी विवादों के घेरे में आई हैं और उन पर आरोप लगे हैं। स्पॉट फिक्सिंग मामले के अभियुक्त विन्दु दारा सिंह से साक्षी की मिलीभगत थी, यह आरोप लगा था। दोनों की तसवीरें सार्वजनिक हुई थीं। विन्दु दारा सिंह और चेन्नई सुपर किंग्स के गुरुनाथ मयप्पन को स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ़्तार किया गया था। चेन्नई सुपर किंग्स को दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। धोनी उसके कैप्टन थे। साक्षी धोनी पर यह आरोप लगा था कि वह मैच की रणनीति की पूर्व जानकारी दारा सिंह को दिया करती थीं और दारा सिंह स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी में उसका इस्तेमाल करते थे। लेकिन साक्षी पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ था, उनसे कोई पूछताछ भी नहीं हुई थी। 
विंदु दारा सिंह के साथ साक्षी धोनी
लेकिन सवाल यह है कि धोनी और उनकी पत्नी पर इस तरह के आरोप लग ही क्यों रहे हैं। धोनी भारतीय क्रिकेट के सबसे सफ़ल कप्तानों में एक रहे हैं, ज़बरदस्त खिलाड़ी रहे हैं। पर उनकी चर्चा जितनी खेल की वजह से होने लगी है, उतनी ही दूसरी वजहों से भी। हाल ही में ख़त्म हुए क्रिकेट विश्व कप के दौरान धोनी ने भारतीय सेना के चिह्न वाले ग्लव्स पहन कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया था। इसे आईसीसी के नियमों के ख़िलाफ़ बताया गया था, बाद में धोनी ने वह ग्लव्स पहनना बंद कर दिया। उस समय यह भी कहा गया था कि धोनी ने बीजेपी के राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया है और वह जल्द ही उस पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इस तरह उन पर अपने निजी फ़ायदे के लिए भारतीय सेना के चिह्न का प्रयोग करने का आरोप लगा था। विश्व कप ख़त्म होने के बाद बीजेपी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने कहा था कि धोनी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

सवाल यह है कि राष्ट्रवाद का सहारा लेने वाले, भारतीय सेना के प्रतीक का इस्तेमाल करने वाले धोनी या उनकी पत्नी या उनसे जुड़ी कंपनी ऐसा करती ही क्यों है कि उस पर ग़ैरक़ानूनी काम करने के आरोप लगते हैं। ऐसा क्यों है कि धोनी बार बार विवादों के केंद्र में होते हैं। और इस बार तो उनकी पत्नी की कंपनी पर ही गंभीर आरोप लगे हैं। 

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