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महाराष्ट्र की 70% कंपनियाँ कारखाना खोलने की शर्तें मानने को तैयार नहीं : सर्वे

भारतीय उद्योग परिसंघ ने भले ही सरकार से कहा हो कि कुछ शर्तों के साथ औद्योगिक उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी जाए, ज़्यादातर ईकाइयाँ इन शर्तों को मानने को तैयार नहीं है।

इनकार

महाराष्ट्र की 70 प्रतिशत औद्योगिक ईकाइयों ने साफ़ शब्दों में कह दिया है कि वे कारखाना परिसर के अंदर कामगारों को टिकाने का इंतजाम नहीं कर सकती हैं। इसके अलावा लगभग 75 प्रतिशत इकाइयों ने कर्मचारियों को लाने- लेजाने के लिए परिवहन की व्यवस्था करने से इनकार कर दिया है।
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लॉकडॉउन के दौरान कारखाना खोलने और उत्पादन शुरू करने के लिए ये दो ज़रूरी शर्तें हैं। 

सर्वे

महाराष्ट्र ने शनिवार को एक सर्वे किया। इसमें 115 बड़ी औद्योगिक कंपनियों को शामिल किया गया और उनसे पूछा गया कि वे कारखाना खोलने के लिए इन शर्तोें को मानने को तैयार हैं या नही।
इनमें से लगभग सारी ईकाइयों ने कहा कि उत्पादन शुरू करने के लिए उन्हें कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की ज़रूरत होगी।
इसी सर्वे में 10 में से 7 ईकाइयों ने कहा कि वे कर्मचारियों को कारखाना परिसर के अंदर रहने की व्यवस्था नहीं कर सकतींं। 115 में से 29 कंपनियाँ ही मज़दूरों को लाने- ले जाने पर पैसे खर्च करने को तैयार हैं।
इसके अलावा 7 प्रतिशत कंपनियों मे कहा कि कर्मचारियों के शरीर का तापमान मापने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग का ज़रूरी उपाय उनके पास नहीं है। 

महाराष्ट्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कामकाज और उत्पादन शुरू करने के लिए 17 अप्रैल को दिशा निर्देश जारी किए थे। लेकिन मैन्युफ़ैक्चरिेंग सेक्टर समेत तमाम क्षेत्रों से जुड़ी ज़्यादातर कंपनियों ने कहा है कि वे इन शर्तों को पूरा नहीं कर सकतीं।  

बीच का रास्ता

सरकार ने इस सर्वे के नतीजे जानने के बाद उद्योग जगत से बात करने की पहल की है। उनके प्रतिनिधियों को बुलाया जा रहा है ताकि उनके विचार जाने जा सकें और बीच का रास्ता निकाला जा सके। 

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