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विश्व बैंक : कोरोना के कारण भारत के विकास दर में आएगी 5% की कमी

विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि कोरोना संक्रमण की वजह से इस साल भारत की विकास दर में 5 प्रतिशत की कमी आएगी।
विश्व बैंक ने ‘दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट : कोविड-19 का असर’ नामक रिपोर्ट रविवार को जारी की। इस रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि कोरोना के कारण भारत की आर्थिक गतिविधियाँ बुरी तरह छिन्न-भिन्न हो जाएँगी और इसकी आर्थिक विकास की गति कम हो जाएगी। 
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क्या कहना है विश्व बैंक का?

यह रिपोर्ट जारी करते हुए विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के मुख्य अर्थशास्त्री हैन्स टिम्मर ने साफ़ शब्दों में कहा कि भारत की स्थिति अच्छी नहीं है। विश्व बैंक का मानना है कि कोरोना रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से ऐसा होगा। रिपोर्ट में कहा गया है,

‘लॉकडाउन में लोगों के आने-जाने और माल की ढुलाई पर रोक लग गई, इसका नतीजा यह होगा कि घरेलू माँग और आपूर्ति चेन छिन्न-भिन्न हो जाएगी और इससे विकास दर तेजी से कम होगी।’


दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट : कोविड-19 का असर’ रिपोर्ट का अंश

निवेश में कमी 

विश्व बैंक ने इस पर भी चिंता जताई है कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में निवेश में कमी आएगी और उसका असर वित्तीय सेवा क्षेत्र पर पड़ेगा। लेकिन इसने यह उम्मीद भी जताई है कि 2022 में कोरोना का असर कम हो जाएगा और उसके बाद स्थिति फिर से ठीक होने लगेगी। 
इस स्थिति से निपटने के लिए भारत क्या करे, इस सवाल के जवाब में हैन्स टिम्मर ने कहा कि इस देश को सबसे पहले कोरोना की रोकथाम करनी चाहिए और हर किसी को खाना मिले, यह सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा,

‘यह महत्वपूर्ण है कि भारत अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशें करे और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के मौक़ों बनाये। यह भी अहम है कि छोटे और मझोले उद्यमों को दिवालिया होने से बचाया जाए।’


हैन्स टिम्मर, मुख्य अर्थशास्त्री, दक्षिण एशिया, विश्व बैंक

इसके पहले, यानी बीते हफ़्ते विश्व बैंक ने कोरोना संकट को देखते हुए भारत को एक अरब डॉलर की आपातकालीन वित्तीय सहायता देने का एलान किया था। यह मदद इसलिए दी जाएगी ताकि अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा सके, उनका पता लगाया जा सके, उनकी जाँच हो, पर्सनल प्रोटेक्टिव उपकरणों की खरीद हो और आइसोलेशन वार्ड बनाया जाए। 

एडीबी

पिछले हफ्ते एशियाई विकास बैंक ने भी आशंका जताई थी कि कोरोना संक्रमण की वजह से भारत में आर्थिक विकास की गति धीमी हो जाएगी। उसका अनुमान था कि 2020 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि की दर गिर कर 4 प्रतिशत पर आ जाएगी। 
एडीबी ने एशियन डेवलपमेंट आउटलुक 2020 में यह भी कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था बुनियादी रूप से मजबूत है, इसलिए अगले साल भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा।

फ़िच रेटिंग्स

इसी तरह कुछ दिन पहले ही दुनिया की मशहूर रेटिंग एजेंसी फ़िच ने कहा कि भारत की विकास दर यानी जीडीपी आर्थिक वर्ष 2020-21 में 2% ही रह जायेगी। ग़ौर करने वाली बात यह है कि 15 दिन पहले ही फ़िच का आकलन था कि इस साल भारत की विकास दर 5.1% होगी।

एस एंड पी

फ़िच के पहले स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने कहा था कि भारत की विकास दर 3.5% तक गिर सकती है। इसी तरह मूडीज ने भी 2.5% का आँकड़ा बताया था। फ़िच का आँकड़ा इन दोनों से ही कम है।

गोल्डमैन सैक्स

इसी तरह अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर अगले साल यानी 2021 में घट कर 1.6 प्रतिशत पर आ जाएगी। ऐसा हुआ तो आज़ादी के बाद यह अब तक की न्यूनतम विकास दर होगी।
बता दें कि इसके पहले इसी कंपनी ने भारत के विकास दर का अनुमान 3.3 प्रतिशत लगाया था।
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