जम्मू कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एसआईए ने गुरुवार को जम्मू स्थित अंग्रेजी दैनिक कश्मीर टाइम्स के कार्यालय पर छापा मारा। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि एजेंसी को तलाशी के दौरान एके-47 राइफल के कई कारतूस, पिस्तौल की गोलियाँ और हैंड ग्रेनेड के पिन बरामद किए गए। रिपोर्टों के अनुसार एसआईए ने पूरे दफ्तर की गहन तलाशी ली, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। यह कार्रवाई उस एफ़आईआर के तहत हुई है जिसमें अखबार और उसके प्रमोटरों पर देश-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। अखबार के संपादकों ने इस कार्रवाई को प्रेस की आवाज़ को दबाने की एक और कोशिश क़रार दिया है।

कश्मीर पुलिस की एजेंसी की यह कार्रवाई तब हुई है जब कश्मीर टाइम्स के खिलाफ कथित तौर पर नाराज़गी फैलाने, अलगाववाद का गुणगान करने और भारत और केंद्र शासित प्रदेश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को खतरा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए एक एफ़आईआर भी दर्ज की गई थी। कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन का भी नाम एफ़आआईआर में है।
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उपमुख्यमंत्री क्या बोले?

उपमुख्यमंत्री सुरिंदर सिंह चौधरी ने छापे पर सावधानी बरतते हुए कहा, 'अगर किसी ने ग़लत किया है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ दबाव बनाने के लिए ऐसा करना गलत होगा।'

इल्तिजा मुफ्ती ने की तीखी आलोचना

पीडीपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने छापे को बेतुका और राज्य की 'दमनकारी नीति' का उदाहरण बताया। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, 'कश्मीर टाइम्स उन गिने-चुने अख़बारों में था जो सत्ता को आईना दिखाता था और दबाव में नहीं झुका। देश-विरोधी गतिविधि के नाम पर दफ्तर पर छापा मारना सरासर गुंडागर्दी है। कश्मीर में सच्चाई की हर खिड़की को देश-विरोधी का तमगा लगाकर बंद किया जा रहा है। क्या हम सब देश-विरोधी हैं?'

कश्मीर टाइम्स की स्थिति

1954 में दिग्गज पत्रकार वेद भसीन द्वारा शुरू किये गये कश्मीर टाइम्स पर एक तबक़े द्वारा लंबे समय से अलगाववादी विचारधारा के समर्थक होने का आरोप लगाया जाता रहा है। वेद भसीन जम्मू प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रह चुके थे। उनका कुछ वर्ष पहले निधन हो गया। इसके बाद उनकी बेटी अनुराधा भसीन जामवाल और दामाद प्रबोध जामवाल ने प्रबंधन और संपादकीय जिम्मेदारी संभाली।

फ़िलहाल, दोनों संपादक विदेश में हैं। 2021-22 से कश्मीर टाइम्स का जम्मू से मुद्रित संस्करण बंद है, हालाँकि ऑनलाइन संस्करण अभी भी सक्रिय है।
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आज़ाद प्रेस को चुप कराने की साज़िश: संपादक

विदेश से जारी संयुक्त बयान में अनुराधा भसीन जामवाल और प्रबोध जामवाल ने छापे की कड़ी निंदा की और इसे स्वतंत्र पत्रकारिता को खामोश करने की सुनियोजित कोशिश क़रार दिया। बयान में कहा गया है, 'हमें ऑफिशियल एक्शन को कन्फर्म करने के लिए कोई ऑफिशियल जानकारी या बयान नहीं मिला है। हमारा ऑफिस, जहां मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेड हुई थी, पिछले चार साल से बंद था और काम नहीं कर रहा था। हमारे खिलाफ लगाए गए अजीब आरोप बेबुनियाद हैं।'
उन्होंने कहा, 'सरकार की आलोचना करना देश-विरोध नहीं है। सरकार की बुराई करना सरकार के ख़िलाफ़ होना नहीं है। असल में, यह बिल्कुल उल्टा है। एक मज़बूत, सवाल उठाने वाला प्रेस एक हेल्दी डेमोक्रेसी के लिए ज़रूरी है। सत्ता को जवाबदेह ठहराने, करप्शन की जांच करने, हाशिए पर पड़ी आवाज़ों को उठाने का हमारा काम हमारे देश को मजबूत करता है। यह इसे कमजोर नहीं करता। हम पर लगाए जा रहे आरोप डराने, बदनाम करने और अंततः चुप कराने के लिए हैं। हम चुप नहीं होंगे।'
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बयान में आगे कहा गया है, 'हमें ठीक इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि हम यह काम करते रहते हैं। ऐसे समय में जब आलोचना करने वाली आवाज़ें बहुत कम होती जा रही हैं, हम उन कुछ इंडिपेंडेंट आउटलेट्स में से एक हैं जो पावर के सामने सच बोलने को तैयार हैं। हमारे खिलाफ लगाए गए आरोप डराने, गलत साबित करने और आखिर में चुप कराने के लिए हैं। हम चुप नहीं रहेंगे।'

इसने कहा है, 'पत्रकारिता कोई जुर्म नहीं है। जवाबदेही देशद्रोह नहीं है। और हम उन लोगों को जानकारी देना, जांच करना और उनके लिए वकालत करना जारी रखेंगे जो हम पर निर्भर हैं।'

संपादकों ने प्रशासन से आरोप वापस लेने और उत्पीड़न बंद करने की अपील की। साथ ही मीडिया साथियों, सिविल सोसाइटी और नागरिकों से एकजुटता की गुहार लगाई। उन्होंने जोर दिया कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है और सच्चाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बरकरार रहेगी।