अजित पवार विमान हादसे में साज़िश के आरोप पर आख़िर महाराष्ट्र में एफ़आईआर क्यों दर्ज नहीं की जा रही है? अब इसके लिए उनके भतीजे रोहित को बेंगलुरु पुलिस में एफ़आईआर क्यों करानी पड़ी? आख़िर साज़िश का आरोप क्यों लग रहा है?
अजित पवार के प्लेन क्रैश पर रोहित पवार
अजित पवार विमान हादसे में कई कोशिशों के बाद भी महाराष्ट्र में एफ़आईआर दर्ज नहीं होने पर अब उनके भतीजे रोहित पवार ने बेंगलुरु में ज़ीरो एफ़आईआर दर्ज कराई है। रोहित ने एफ़आईआर में अजित पवार की मौत के मामले में आपराधिक साजिश का आरोप लागाया है। अब बेंगलुरु की हाई ग्राउंड पुलिस स्टेशन ने यह ज़ीरो एफ़आईआर महाराष्ट्र पुलिस को ट्रांसफर कर दी है।
ज़ीरो एफ़आईआर एक ऐसी पुलिस शिकायत है जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही अपराध असल में कहीं और हुआ हो। इस एफ़आईआर को 'ज़ीरो' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि जाँच के लिए इसे सही पुलिस थाने में भेजने से पहले, शुरू में इसे 0 सीरियल नंबर के साथ रजिस्टर किया जाता है।
पुलिस ने बताया है कि 23 मार्च को दर्ज हुई यह एफ़आईआर अब महाराष्ट्र के बारामती ग्रामीण पुलिस स्टेशन को भेज दी गई है। रोहित पवार का कहना है कि उनके चाचा अजित पवार की मौत कोई सामान्य एक्सीडेंट नहीं थी, बल्कि यह एक बड़ी आपराधिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिकायतें किए जाने के बावजूद इस मामले को महाराष्ट्र में रजिस्टर नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें बेंगलुरु में पुलिस से संपर्क करना पड़ा। रोहित ने किस किस तरह के आरोप लगाए हैं, यह जानने से पहले यह जान लें कि दुर्घटना क्या थी।
28 जनवरी को हुई थी दुर्घटना
इसी साल 28 जनवरी को मुंबई से बारामती जा रहे बॉम्बार्डियर लियरजेट 45 (VT-SSK) विमान ने बारामती एयरपोर्ट के पास क्रैश लैंडिंग कर दी। इस विमान को वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी चला रही थी। इस दुर्घटना में अजित पवार समेत पाँच लोगों की मौत हो गई थी।
रोहित पवार ने क्या शिकायत की?
रोहित पवार ने पहले फ़रवरी महीने में मुंबई के मरीन ड्राइव और बारामती पुलिस स्टेशन में भी शिकायत की थी, लेकिन वहाँ एफ़आईआर नहीं दर्ज हुई। रोहित ने कहा कि पुणे सीआईडी सिर्फ एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट के तौर पर केस देख रही है, इसलिए उन्होंने बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज कराई ताकि पूरी साजिश की स्वतंत्र जाँच हो सके। वे चाहते हैं कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो से अलग एक आपराधिक जाँच हो।
बड़ी आपराधिक साजिश का आरोप
रोहित पवार ने एफआईआर में लिखा है कि यह दुर्घटना सिस्टेमैटिक उल्लंघन का नतीजा थी। उन्होंने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के नियमों के हवाले से कहा-
- विमान VT-SSK को सुरक्षा के सारे नियम तोड़कर चलाया जा रहा था।
- कंपनी VSR ने विमान के असली उड़ान घंटे को लॉगबुक में कम लिखा।
- असल में यह विमान 8000 घंटे से ज्यादा उड़ चुका था, जबकि इसकी सुरक्षित सीमा इससे बहुत कम थी।
- एयरक्राफ्ट को पहले अमेरिका में रिटायर कर दिया गया था, फिर भारत में दोबारा इस्तेमाल किया गया।
- रजिस्ट्रेशन से पहले ही एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट दे दिया गया, यह गलत था।
मौसम और लैंडिंग में गड़बड़ी?
रोहित पवार ने मौसम को लेकर भी सवाल उठाए। अनौपचारिक रिपोर्ट में विजिबिलिटी 3000 मीटर बताई गई, लेकिन आधिकारिक METAR रिपोर्ट में सिर्फ 2000 मीटर थी और धुंध थी। विजुअल फ्लाइट नियम के मुताबिक यह दूरी पर्याप्त नहीं थी, फिर भी लैंडिंग की अनुमति दे दी गई।
क्रू चेंज और पायलट पर गंभीर आरोप
उड़ान से ठीक पहले पायलट टीम को बदल दिया गया। कंपनी ने कहा है कि ट्रैफिक डिले की वजह से बदला, लेकिन रोहित पवार इसे बेबुनियाद बताते हैं। मुख्य पायलट कैप्टन सुमित कपूर पर पहले भी शराब पीकर उड़ान भरने का आरोप लगा था।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए एफआईआर में लिखा है- "उड़ान के आखिरी सेकंड में को-पायलट शंभवी पाठक ने ‘ओह शिट ओह शिट’ कहा। मुख्य पायलट कपूर बिल्कुल चुप रहे। न कोई इमरजेंसी घोषणा, न डिस्ट्रेस कॉल, न कोई सुधार करने की कार्रवाई।” रोहित पवार का कहना है कि यह चुप्पी शराब से बेहोश होने या जानबूझकर कुछ न करने का संकेत है।
ये संदेह भी जताए
एफआईआर में ये बातें भी बताई गई हैं-
- उड़ान में 70 मिनट की देरी हुई।
- लैंडिंग से ठीक पहले रनवे बदल दिया गया।
- अप्रोच फेल होने के बावजूद ‘गो-अराउंड’ (दोबारा ऊपर जाना) नहीं किया गया।
- मुख्य पायलट की हाल ही में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी।
- अजित पवार का ट्रैवल शेड्यूल आखिरी समय में बदल दिया गया।
- रोहित पवार ने कहा कि ये सारी बातें मिलकर एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती हैं।
रोहित कई आरोप लगाते रहे हैं
रोहित पवार इस मामले में अब तक कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। उन्होंने इसमें कई गड़बड़ियों पर प्रजेंटेशन दी थी। तब रोहित ने आरोप लगाया था कि प्लेन में दो अतिरिक्त फ्यूल टैंक थे, जो गैरकानूनी थे। इससे क्रैश में तेज धमाका हुआ, जैसे बम फटा हो। बारामती जाने के लिए इतना फ्यूल क्यों? हैदराबाद में रिफिल हो सकता था। रोहित ने आरोप लगाया कि एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट 16 सितंबर 2021 का है, लेकिन रजिस्ट्रेशन 27 दिसंबर 2022 का है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेन अमेरिका से खरीदा गया था, लेकिन इंजन की लाइफ खत्म हो चुकी थी। इसके अलावा Supplemental Type Certificate पूरा नहीं किया गया।
बहरहाल, अब यह पूरा मामला बारामती ग्रामीण पुलिस के पास है। महाराष्ट्र पुलिस अब आगे की जाँच करेगी। इस केस पर सबकी नज़र टिकी हुई है क्योंकि इसमें एक बड़े नेता की मौत और गंभीर आरोप शामिल हैं।