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कांग्रेसी डीके शिवकुमार की गिरफ़्तारी से बीजेपी के येदियुरप्पा चिंतित क्यों?

कांग्रेस के जिस डी. के. शिवकुमार की वजह से बी. एस. येदियुरप्पा लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनने से महरूम रहे और एक समय तो उनकी इन उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा था, अब उसी शिवकुमार की गिरफ़्तारी से येदियुरप्पा ‘चिंतित’ हैं। जहाँ उनकी गिरफ़्तारी पर बीजेपी के नेता से लेकर कार्यकर्ता तक के ख़ुशियाँ मनाने की ख़बरें हैं वहीं येदियुरप्पा सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह इससे दुखी हैं। रिपोर्ट तो यहाँ तक है कि उन्होंने अनौपचारिक तौर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को कहा है कि वे न तो ख़ुशियाँ मनाएँ और न ही कोई ऐसा बयान दें।

कर्नाकट में कांग्रेस के संकटमोचक रहे डी.के. शिवकुमार को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी द्वारा गिरफ़्तार किए जाने की जानकारी मिली तो येदियुरप्पा ने मीडिया के सामने बयान दिया कि वह केंद्र द्वारा शिवकुमार की गिरफ़्तारी से ख़ुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह इससे निराश हैं और उम्मीद जताई कि जल्द ही वह छूटकर बाहर आएँगे। 

येदियुरप्पा का ऐसा बयान अजीब लगता है। ऐसा इसलिए कि डी.के. शिवकुमार ही येदियुरप्पा के ‘ऑपरेशन लोटस’ के रास्ते में सबसे बड़े रोड़ा थे और उन्हें मुख्यमंत्री बनने में काफ़ी मुश्किलें आईं। ऐसे में येदियुरप्पा ख़ुश होने की जगह ‘दुखी’ क्यों हैं? 

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जो लोग शिवकुमार और येदियुरप्पा के बीच के रिश्ते को जानते हैं उनके लिए येदियुरप्पा का यह रूख शायद चौंकाने वाला न लगे। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य में जो हालात हैं उसमें शिवकुमार की गिरफ़्तारी से येदियुरप्पा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ऐसा माना जाता है कि संभावित दिक्कतों को लेकर ही येदियुरप्पा ने यह बयान दिया है। येदियुरप्पा के सामने ये मुश्किलें इन कारणों से आ सकती हैं-

  1. जातिगत समीकरण
  2. बीजेपी में आंतरिक कलह
  3. कांग्रेस के लिए मौक़ा
  4. शिवकुमार के पास येदियुरप्पा का ‘गुप्त राज’

शिवकुमार की छवि बनेगी हीरो की!

जानकारों का कहना है कि येदियुरप्पा को पता है कि ईडी की कार्रवाई से कांग्रेस खेमे और उनकी जाति वोक्कालिगा के लोगों में शिवकुमार की छवि एक हीरो के रूप में बनेगी। कृषि से जुड़ी रही वोक्कालिगा जाति कर्नाटक में दूसरी सबसे बड़ी जाति है। पहली बार हाल के लोकसभा चुनाव में इस जाति के लोगों का विश्वास जीतने में बीजेपी सफल रही थी।  

माना जा रहा है कि अब येदियुरप्पा को डर है कि शिवकुमार की गिरफ्तारी से राज्य में उनकी जाति के लोगों का बीजेपी के ख़िलाफ़ मोहभंग होगा और फिर राज्य में सत्ता के समीकरण बिगड़ सकते हैं। उनकी जाति के लोगों में इससे नाराज़गी है। उन्होंने प्रदर्शन भी किया है। 

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सरकार गिरने का डर?

येदियुरप्पा इस बात से भी चिंतित हैं कि उनकी सरकार को बहुमत तो है लेकिन बहुत कम मार्जिन है। ऐसे में अब गिरफ़्तारी के बाद शिवकुमार जब बाहर आएँगे तो येदियुरप्पा सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उनकी चिंता इसलिए भी बढ़ गई है कि पार्टी के अंदर ही सत्ता के लिए नेताओं में आपसी संघर्ष की ख़बरें हैं। जब मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने शपथ ली थी उसी समय से पार्टी नेताओं में मतभेद की ख़बरें आ रही थीं और बाद में तीन उप मुख्यमंत्री बनाकर इस मामले से निपटने की कोशिश की गई। हालाँकि, पार्टी में विवाद अभी भी बना हुआ है और जब तब गतिरोध की रिपोर्टें आती रही हैं। 

बीजेपी मंत्री ने माँगी बिना शर्त माफ़ी

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलु ने शिवकुमार पर दिए बयान के लिए बिना शर्त माफ़ी माँगी है। उन्होंने 30 अगस्त को कहा था कि 'जो नमक खाता है उसे पानी पीना पड़ता है'। कन्नड़ की इस सुक्ति का मतलब है 'जैसी करनी वैसी भरनी'। बता दें कि गिरफ़्तारी से पहले शिवकुमार ने श्रीरामुलु के नाम लिए बिना उनके इस बयान का ज़िक्र किया था। 

इसके बाद अब श्रीरामुलु ने कहा है, 'कल जब शिवकुमार बोल रहे थे तब उनकी आँखों में आँसू थे। उन्होंने उस एक वाक्य का ज़िक्र किया है जिसे कभी पहले मैंने बोला था। जो कुछ भी मैंने कहा था उसके राजनीतिक मायने थे और मैंने कभी भी उनको व्यक्तिगत तौर पर आहत करने के लिए नहीं कहा था।'

कांग्रेस में पड़ी जान, क्या वापसी करेगी?

राज्य में गठबंधन सरकार के गिरने के बाद से निराश कांग्रेस में अब जान पड़ती दिख रही है और पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर गए हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद ओल्ड मैसूर का वोक्कालिगा क्षेत्र में तनाव है। उनके ग़ुस्साए समर्थकों ने सड़कों पर आगजनी की है। यहाँ तक ​​कि सरकार द्वारा संचालित केएसआरटीसी बसों को भी जलाया और सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचाया। यह येदियुरप्पा के लिए चिंता की बात है। 

कांग्रेस नेतृत्व में भी ग़जब की एकता देखने को मिली। राज्य के सभी कांग्रेस नेता शिवकुमार के बचाव में उतर गए। उन्होंने पूरे राज्य में प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गिरफ़्तारी के लिए येदियुरप्पा सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईडी ने मुख्यमंत्री को जानकारी देकर ही शिवकुमार को गिरफ़्तार किया है।

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क्या शिवकुमार के पास गुप्त राज हैं?

शिवकुमार कई बार दावा कर चुके हैं कि बीजेपी नेताओं के बारे में उनसे पास ऐसी जानकारियाँ हैं जो उनकी परेशानियाँ बढ़ा सकती हैं।वह यह भी दावा करते रहे हैं कि उनके पास एक गुप्त डायरी है जिसमें बीजेपी नेताओं के व्यापारिक सौदों के बारे में जानकारियाँ हैं। जानकारों का मानना है कि इससे येदियुरप्पा डर गए हैं। शिवकुमार के क़रीबियों का मानना है कि शिवकुमार को अब छेड़ दिया है, वह सब के बारे में काफ़ी कुछ जानते हैं और इससे बीजेपी में येदियुरप्पा और दूसरे नेता डर गये हैं।

राजनीति में हर बयान के अलग मायने होते हैं, ऐसे में शिवकुमार की गिरफ़्तारी पर येदियुरप्पा का दुख जताने के अलग मायने हो सकते हैं। ‘नेटवर्क 18’ के अनुसार राज्य बीजेपी का कहना है कि येदियुरप्पा ने शिवकुमार की गिरफ़्तारी पर शिष्टाचार में खेद जताया है और पार्टी को इससे चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है। सचाई चाहे जो भी हो लेकिन इस बात से तो इनकार नहीं ही किया जा सकता है कि गिरफ़्तारी से यदि शिवकुमार चिंतित होंगे तो येदियुरप्पा की चिंताएँ होंगी ही नहीं। इन चिंताओं का असर कर्नाटक में आने वाले दिनों में उथल-पुथल के रूप में दिखेगा।
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