कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने की अटकलों के बीच, राज्य की राजनीति में मची उथल-पुथल शुक्रवार शाम को थमती नजर आई। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने बयान दिया कि कहीं कोई संकट नहीं है। इसी तरह डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी कहा कि वो और सिद्धरमैया मिलकर काम करेंगे। इससे पहले डीके के वफादार माने जाने वाले 10 से अधिक विधायकों ने कथित तौर पर नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर दिल्ली में डेरा डाल दिया था। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को पहले ही खारिज कर दिया था। 

रणदीप सुरजेवाला का बयान

कांग्रेस सांसद और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने शुक्रवार शाम को एक्स पर लिखा- कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के साथ चर्चा हुई और वे इस बात पर सहमत हुए कि निर्णायक रूप से पराजित और गुटबाज़ी से ग्रस्त कर्नाटक भाजपा, मीडिया के एक वर्ग के साथ मिलकर, कर्नाटक और उसकी कांग्रेस सरकार के खिलाफ जानबूझकर एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि
इसका एकमात्र उद्देश्य उन शानदार उपलब्धियों और कांग्रेस सरकार की पाँच गारंटियों को कमज़ोर करना है, जो एक शानदार मॉडल बन गई हैं। सुरजेवाला ने कहा- कुछ कांग्रेस नेताओं और विधायकों के अनावश्यक बयानों ने भी अटकलों को और बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने उन्हें नेतृत्व के मुद्दे पर कोई भी सार्वजनिक बयान देने या निहित स्वार्थों द्वारा प्रचारित किए जा रहे एजेंडे में न आने की सख्त चेतावनी दी है।विभिन्न पार्टी पदाधिकारियों की राय पर नेतृत्व ने ध्यान दिया है।

डीके शिवकुमार का बयान

कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि "सभी 140 MLA मंत्री, सीएम बनने के लायक हैं। वे सब कुछ बन सकते हैं...CM ने कहा है कि वो 5 साल पूरे करेंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। हम सब उनके साथ काम करेंगे...।" इस बीच खबर है कि दिल्ली आए सभी 10 विधायक वापस बेंगलुरु लौट चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि इन विधायकों की मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से नहीं हो पाई। खड़गे पहले ही कर्नाटक दौर पर निकल चुके थे।
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हालांकि कर्नाटक में कथित उठापटक की खबरों को हवा देने वाला मीडिया सूत्रों के हवाले से बता रहा था कि इन 10 विधायकों ने खड़गे के आवास पर बुधवार देर रात मुलाकात की थी। विधायकों ने पार्टी से उस "सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले" को लागू करने का आग्रह किया है, जिसके तहत 2023 में सरकार बनने के समय ढाई साल बाद शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने कभी आधिकारिक तौर पर इस फार्मूले की पुष्टि नहीं की थी। शुक्रवार को सुरजेवाला ने साफ कर दिया कि 10 विधायकों में से किसी की भी मुलाकात खड़गे से नहीं हुई। हालांकि इन विधायकों की मुलाकात सुरजेवाला से जरूर हुई थी। 

डीकेएस ने दिए संकेत, सिद्धारमैया ने नकारा 

इस राजनीतिक हलचल से पहले खुद डी.के. शिवकुमार ने कर्नाटक कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अध्यक्ष का पद छोड़ने के संकेत दिए थे। उन्होंने हाल ही में एक पार्टी कार्यक्रम में कहा, "मैं हमेशा के लिए इस पद पर नहीं रह सकता। मुझे मार्च में छह साल पूरे हो जाएंगे। दूसरों को भी मौका मिलना चाहिए।" हालांकि, उन्होंने अपने समर्थकों को यह भी आश्वासन दिया कि वह पार्टी में "नेतृत्व की भूमिका में" और "अगली कतार में" बने रहेंगे।
शुक्रवार के घटनाक्रम से पहले डीके शिवकुमार का गुरुवार को एक ट्वीट चर्चा में रहा। जिसका अर्थ है- जहाँ प्रयास है, वहाँ फल है; जहाँ भक्ति है, वहाँ भगवान हैं। नीचे उनका ट्वीट हैः
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने 'नवंबर क्रांति' कहे जा रहे नेतृत्व परिवर्तन के कयासों को "मीडिया की उपज" करार दिया। सिद्धारमैया ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार को लोगों ने पाँच साल का जनादेश दिया है, और उनका पूरा ध्यान जनता से किए गए पाँच गारंटियों को पूरा करने पर है।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब सिद्धारमैया का कार्यकाल लगभग आधा हो चुका है, और डीके शिवकुमार के समर्थक कथित समझौते को लागू करने के लिए दबाव बना रहे हैं। फिलहाल, कांग्रेस आलाकमान ने इस मामले में कोई रुचि नहीं ली। सुरजेवाला को मामला संभालने के लिए कहा गया। आलाकमान की तरफ से कोई सहारा या संकेत नहीं मिलने से कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को संकट में डालने की मुहिम फिलबाल नाकाम होती नज़र आ रही है।