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क्या चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर अब फँस गये मोदी?

चुनाव आचार संहिता के ‘उल्लंघन’ के मामले में क्या अब प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी? इसकी संभावना इसलिए बनती है कि यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुँच गया है। और इसलिए भी कि लंबे समय से इसकी शिकायत चुनाव आयोग के पास पड़े होने के बावजूद आयोग ने इसे अभी तक ख़ारिज़ नहीं किया है। 

यह मामला एक बार फिर से चर्चा में आया है क्योंकि चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के लिए प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करने पर चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाई है। पार्टी ने माँग की है कि कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वह 24 घंटे के अंदर ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करे। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वह मंगलवार को कांग्रेस की याचिक पर सुनवाई करेगी। 

कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि चुनाव आयोग ने मोदी और अमित शाह के ख़िलाफ़ पार्टी की शिकायत पर तीन हफ़्ते से कोई कार्रवाई नहीं की है।

विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी पर लंबे समय से चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने इनकी शिकायतें कई बार चुनाव आयोग से की, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। पुलवामा के शहीदों और बालाकोट हवाई हमले के नाम पर वोट देने की अपील से लेकर वोट डालने के दौरान ‘रोड शो’ करने की शिकायतें चुनाव आयोग के पास की गईं। 

पुलवामा के शहीदों के नाम पर वोट

प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के लातूर में शहीदों के नाम पर लोगों से सीधे वोट नहीं माँगा। मोदी ने अपने भाषण में कहा था, 'मैं फ़र्स्ट टाइम वोटर्स से कहना चाहता हूँ, क्या आपका पहला वोट पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करने वाले वीर जवानों के नाम समर्पित हो सकता है क्या? आपका पहला वोट पुलवामा में जो वीर शहीद हुए उन वीर शहीदों के नाम आपका वोट समर्पित हो सकता है क्या? ग़रीब को पक्का घर मिले उसके लिए आपका वोट समर्पित हो सकता है क्या?

बता दें कि पुलवामा के शहीदों के परिवार तो चुनाव लड़ नहीं रहे हैं, तो इसका साफ़ अर्थ यह है कि शहीदों के नाम पर वह किसके लिए वोट माँग रहे हैं।

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मोदी के ख़िलाफ़ शिकायत चुनाव आयोग की वेबसाइट से ग़ायब

पिछले हफ़्ते तब एक विवाद खड़ा हो गया था जब प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत ही चुनाव आयोग की वेबसाइट से ग़ायब हो गयी। यह शिकायत महाराष्ट्र के लातूर में मोदी के भाषण के ख़िलाफ़ कोलकाता के महेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति ने दी थी। वहाँ मोदी ने अपने भाषण में लोगों से अपील की थी कि वे अपना वोट 'पुलावामा के शहीदों' और बालाकोट हवाई हमला करने वाले सैनिकों को समर्पित करें। तब चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र चुनाव आयोग के मुख्य अधिकारी से भाषण की प्रति और स्पष्टीकरण माँगा था। 

वोटिंग के बाद ‘रोड शो’

23 अप्रैल को अहमदाबाद में वोटिंग के बाद मोदी के रोड शो को लेकर विपक्षी नेताओं ने विरोध दर्ज कराया था। तब चुनाव आयोग ने कहा था कि अहमदाबाद में उनके मिनी रोड शो की जाँच की जा रही है। अपना वोट डालने के बाद प्रधानमंत्री ने एक खुली जीप की सवारी की, सड़क पर चले और यहाँ तक कि एक छोटा भाषण भी दिया था। इसमें मोदी ने कहा कि ‘आतंकवाद का हथियार आईईडी है। लोकतंत्र की ताक़त मतदाता पहचान पत्र है। मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि मतदाता पहचान पत्र आईईडी की तुलना में बहुत अधिक शक्तिशाली है, इसलिए हमें अपने मतदाता पहचान पत्रों की ताक़त को समझना चाहिए।’ मोदी ने यह बात ‘आईईडी बनाम वोटर आईडी’ थीम पर कही, जो कि उनकी सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रचार को दर्शाती है।

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परमाणु बम की धमकी...

22 अप्रैल को बाड़मेर में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था, 'भारत ने पाकिस्तान की धमकियों से डरने की नीति को बंद कर दिया है। हर दिन वो (पाकिस्तान) परमाणु हथियार होने के बारे में दावा करते हैं। यहाँ तक ​​कि उनका मीडिया भी यही दावा करता है और पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार होने की रिपोर्ट लाता है। तो हमारे पास क्या है? क्या हम उन्हें (परमाणु हथियार) दिवाली के लिए बचा रहे हैं?' बालाकोट में भारतीय वायुसेना के हमलों का ज़िक्र किए बिना, मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार ने साहसिक कदम उठाकर पाकिस्तान के अहंकार को कुचल दिया। उन्होंने यहाँ तक कहा था, 'हमने पाकिस्तान की सारी हेकड़ी निकाल दी। उसे कटोरा लेके दुनिया में घूमने को मैंने मजबूर कर दिया है।'

गुजरात के सुरेंद्रनगर ज़िले में 17 अप्रैल को मोदी ने कहा था, 'पहले पाकिस्तान के आतंकवादी हमारे देश में आकर हमले करते थे और बदले की कार्रवाई करने पर परमाणु बम से हमले की धमकी देते हुए बिना कोई नुक़सान के चले जाते थे। लेकिन हमारे पास भी परमाणु बमों का भी बम है। मैंने उनसे कहा कि जो करना है करो (लेकिन हम बदला लेंगे)।' बता दें कि मोदी 14 फ़रवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ़ काफ़िले पर हुए आतंकवादी हमले का हवाला दे रहे थे जिसमें 40 जवान शहीद हो गये थे। 

श्रीलंका आतंकी हमले पर भारत में वोट माँगे 

श्रीलंका में आतंकी हमला हुआ, लेकिन इसका नाम लेकर भारत में वोट माँगे गये। 21 अप्रैल को राजस्थान के चितौड़गढ़ में अपनी चुनावी रैली में मोदी ने इन धमाकों का नाम लेकर वोट माँगा। मोदी ने कहा, 'भाइयो-बहनो, आप सब जब वोट देने जाएँगे, कमल के निशान पर बटन दबाएँगे तो मन में ये भी तय करिए कि आप जब बटन दबा रहे हैं आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए। आपकी एक उंगली में ताक़त है भाइयो-बहनो, आप कमल के निशान पर बटन दबाओगे। आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की मुझे ताक़त मिलेगी।'

पीएम के इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि श्रीलंका में हुए आतंकी हमले के बाद इस तरह वोट मांगना कहाँ तक ठीक है। बता दें कि श्रीलंका में ईस्टर के मौक़े पर चर्चों और होटलों में किए गए 8 बम धमाकों में 250 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है।

अमित शाह ने भी भुनाया था कार्रवाई को

बीजेपी अध्‍यक्ष ने बिहार के सीतामढ़ी में एक जनसभा में कहा था कि मोदी सरकार ने देश की सीमाओं को सुरक्षा दिया है और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुखता दी है। उन्होंने कहा था, 'इजरायल, अमेरिका के बाद भारत ऐसा तीसरा देश हो गया है जिसने आतंकवादियों के ख़िलाफ़ ऐसी बहादुरी से लड़ा है।' उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान की तरफ़ से अगर गोली आएगी तो यहाँ से गोला जाएगा, ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि देश की सुरक्षा गठबंधन वालों को मजाक लगता है लेकिन मोदी सरकार जवानों के ख़ून का बदला लेती है। 

चुनाव आयोग पर दबाव

इसी बीच दूसरे नेताओं ने भी बार-बार आचार संहिता के उल्लंघन वाले बयान देने शुरू कर दिये। जब लगातार उल्लंघन के ऐसे मामले आये तो सामाजिक संगठनों से चुनाव आयोग पर दबाव बना। हालाँकि चुनाव आयोग ने तब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीएसपी सुप्रीमो मायावती के ख़िलाफ़ कार्रवाई की और योगी 72 घंटे और मायावती 48 घंटे तक प्रचार नहीं कर सके। ऐसे ही भाषणों के लिए आज़म ख़ान और मेनका गाँधी पर भी कार्रवाई की गयी, लेकिन मोदी और अमित शाह के बारे में कोई फ़ैसला नहीं आ सका। तर्क तो यह दिया जा रहा है कि शायद मोदी कार्रवाई से बच जाएँ क्योंकि मोदी इस चालाकी से अपनी बात कह जाते हैं और कोई उनको पकड़ भी नहीं पाता। मसलन, मोदी ने बालाकोट का ज़िक्र किया लेकिन यह तो नहीं कहा किसी से कि वे अपना वोट बीजेपी के पक्ष में दें। उन्होंने तो बस यह कहा कि पहली बार वोट डालने वाले पुलवामा के शहीदों और बालाकोट के वीरों के नाम अपना वोट समर्पित करें। उन्होंने अपने हर भाषणों में ऐसा ही किया। तो सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग नैतिकता के आधार पर कार्रवाई कर भी पाएगा या नहीं?
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