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पार्टी नेताओं से बोले राहुल, मोदी के तानाशाही चेहरे को बेनक़ाब करो

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, राहुल गाँधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के ख़िलाफ़ और आक्रामक होते जा रहे हैं। साथ ही राहुल, कांग्रेस के पदाधिकारियों को भी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ आक्रामक होने और सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करने की हिदायत दे रहे हैं। 

शनिवार को हुई कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों और विधायक दल के नेताओं की अहम बैठक में राहुल ने पार्टी नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी के तानाशाही चेहरे को जोर-शोर से बेनक़ाब करने की हिदायत दी है। इससे पहले गुरुवार को हुई बैठक में राहुल ने कांग्रेस महासचिव और राज्यों के स्वतंत्र प्रभारियों की बैठक में पार्टी नेताओं को फ़्रंट फ़ुट पर खेलने की हिदायत दी थी। 

'लोगों को बताएँ जनविरोधी नीतियाँ'

राहुल ने बैठक में पार्टी नेताओं से कहा कि वे मोदी सरकार की युवा विरोधी, किसान विरोधी, महिला विरोधी और जनविरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ जनता के बीच एक सघन अभियान चलाएँ। इसके अलावा देश में बड़े पैमाने पर फ़ैली बेरोज़गारी, किसानों के असंतोष, संवैधानिक संस्थाओं पर हमले और जाँच एजेंसियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के मोदी सरकार के हथकंडों को अभियान चलाकर बेनक़ाब भी करें। बैठक में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल और संगठन के प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे।

राहुल ने पार्टी नेताओं से कहा कि मोदी तानाशाही रवैये से सरकार चला रहे हैं। उनके इस तानाशाही रवैये को बेनक़ाब करने के लिए सभी पार्टी नेताओं को जनता के बीच जाकर काम करना होगा।

न्यूनतम आमदनी योजना पर ख़ास जोर

राहुल ने सभी प्रदेश अध्यक्षों और विधायक दल के नेताओं को हिदायत दी है कि वे न्यूनतम आमदनी गारंटी योजना को कांग्रेस के बड़े विचार के रूप में जनता के सामने पेश करें। सभी नेता अपने-अपने स्तर से प्रदेश की जनता को यह बताएँ और भरोसा भी दिलाएँ कि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो हर व्यक्ति को उसके ख़ाते में एक न्यूनतम आमदनी मिलेगी। 

'सहयोगी दलों को जोड़ें नेता'

राहुल ने कहा कि सभी पार्टी नेता अपने-अपने राज्यों से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे पार्टी आलाकमान को सुझाएँ जिन्हें पार्टी अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल कर सके। इसके अलावा राज्यों में कांग्रेस के सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बैठाया जाए। जिन राज्यों में गठबंधन में दिक्कतें आ रही हैं उन दिक्क़तों को जल्द से जल्द दूर किया जाए। उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में भी तेज़ी लाई जाए।
प्रदेश अध्यक्षों, विधायक दलों के नेताओं की बैठक लेते राहुल गाँधी।

सोशल मीडिया की ताक़त पहचानें

राहुल ने सोशल मीडिया की ताक़त पहचानने पर भी जोर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं को शक्ति ऐप से जुड़कर पार्टी की विचारधारा, नीति और  कार्यक्रमों को जनता के बीच ले जाने के लिए कहा है। सभी को सोशल मीडिया पर ज़्यादा से ज़्यादा सक्रिय रहने की हिदायत दी है।

ग़ौरतलब है कि पिछले साल राहुल ने सोशल मीडिया में पार्टी की पैठ बनाने के लिए डाटा एनालिसिस विभाग का गठन किया था। इस विभाग ने कांग्रेस के लिए शक्ति समेत कई ऐप बनाए हैं। पार्टी इन ऐप से कार्यकर्ताओं को जोड़कर पार्टी की नीतियों और विचारधारा को जनता के बीच पहुँचा रही है।
राहुल ने इस बात पर जोर दिया कि सभी अध्यक्ष और विधायक दल के नेता ज़्यादा से ज़्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शक्ति ऐप से जोड़कर सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियाँ बढ़ाएँ।

ताबड़तोड़ बैठकें कर रहे राहुल 

राहुल गाँधी क़रीब 2 हफ़्ते से पार्टी से जुड़े अलग-अलग संगठनों की एक के बाद एक बैठक ले रहे हैं। खासकर प्रियंका गाँधी वाड्रा को महासचिव बनाने के बाद इन बैठकों में तेज़ी आई है। पहले राहुल ने अपने आवास पर सभी राज्यों के प्रभारियों और वहाँ के सचिवों को बुलाकर राज्यों के हालात पर चर्चा की थी। उसके बाद सभी की सामूहिक बैठक ली थी और शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेताओं की बैठक के बाद अब जल्द ही पार्टी के सभी 64 सचिवों की बैठक होने वाली है।

लोकसभा चुनाव की तैयारियों को तेज़ करने के लिए राहुल गाँधी जल्द ही पार्टी के फ़्रंटल संगठनों यानी युवक कांग्रेस, एनएनसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवादल और मजदूर कांग्रेस के साथ भी बैठक करने वाले हैं।

चुनावी तैयारियाँ तेज़ करने की कोशिश

एक के बाद एक हो रही इन बैठकों के जरिए राहुल गाँधी पूरी पार्टी को चुनावी तैयारियों से मजबूती से जोड़ देना चाहते हैं, इसीलिए पार्टी के अलग-अलग संगठनों के नेताओं से बात करके इस बात पर जोर दे रहे हैं कि चुनाव अभियान में तेज़ी लाई जाए ताकि बीजेपी का मजबूती से मुक़ाबला किया सके।

यूसुफ़ अंसारी
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