मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर फैसला सुनाने वाले दो जजों की बैंच में एक जज के बेटे को सरकारी वकील बनाये जाने पर कांग्रेस भड़क गई है। दरअसल, भोजशाला फैसला आने के एक दिन पहले, एम्पैनलमेंट संबंधी यह सरकारी आदेश जारी हुआ है। इस आदेश की टाइमिंग को आधार बनाकर कांग्रेस ने हमला बोला है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बीते शुक्रवार 15 मई को भोजशाला को लेकर फैसला सुनाया है। आदेश में मुख्य रूप से ‘भोजशाला को मस्जिद नहीं, मंदिर करार दिया गया है।’ 
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जिन दो जजों की बेंच ने धार भोजशाला को लेकर फैसला सुनाया है, उनमें जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी शामिल थे। फैसला 15 मई को आया था। इसके ठीक पहले मध्य प्रदेश सरकार के विधि विभाग ने शासकीय अधिवक्ताओं के पैनल संबंधी आदेश 14 मई को जारी किये हैं।
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पैनल में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ हेतु जारी सरकारी वकीलों की सूची में 13वें क्रम पर जस्टिस विजय शुक्ला के पुत्र सुजय शुक्ला का नाम है। जबलपुर सहित अन्य बेंचों के लिए सरकारी पैनल वाले अधिवक्ताओं की सूची जारी की गई है।
अखिल भारतीय कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की छत्तीसगढ़ इकाई के इंचार्ज एवं राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अमीनुल खान सूरी ने सोमवार को एक एक्स (ट्वीट) करते हुए इस पूरे मसले पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने अपने एक्स में कहा है, ‘इतिहास गवाह है, जब न्याय की कुर्सी पर बैठे लोग निष्पक्षता से हटते दिखाई देते हैं, तब लोकतंत्र की आत्मा घायल होती है। कमाल मौला मस्जिद मामले में ऐतिहासिक फैसला देने वाली संयुक्त पीठ में शामिल न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला के पुत्र सुजय शुक्ला को लगभग उसी दिन सरकारी पैनल अधिवक्ता नियुक्त किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है?’

अमीनुल खान सूरी ने आगे लिखा है- ‘इतना ही नहीं, यह जानकर और भी आश्चर्य होता है कि सुजय शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल सुनील जैन जी के सहायक भी हैं, जिन्होंने इसी मामले में एएसआई का पक्ष रखा था।’ ‘ऐसे में जनता के मन में यह प्रश्न स्वाभाविक है - क्या यह केवल संयोग है? या फिर सत्ता, व्यवस्था और प्रभाव का सुनियोजित प्रयोग?’ ‘जब न्यायपालिका से जुड़े इतने बड़े फैसले के आसपास ऐसे नियुक्ति आदेश सामने आते हैं, तो सवाल उठना लोकतंत्र की सेहत के लिए आवश्यक है।’ ‘न्याय केवल होना नहीं चाहिए, न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए। अगर न्याय के मंदिर में भी पक्षपात की आहट सुनाई देने लगे, तो लोकतंत्र का भरोसा कमजोर होता है।’ उन्होंने कहा कि ‘शुक्ला जी को अपने बेटे के भविष्य का कितना ध्यान रखना पड़ा है, यह इन परिस्थितियों से स्पष्ट होता दिखाई देता है। देश जानना चाहता है - क्या यह योग्यता थी, या व्यवस्था की कृपा?’
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पूरे मसले पर सरकार या भाजपा की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। ‘सत्य हिन्दी’ ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला के पुत्र सुजय शुक्ला से संपर्क किया, ‘उन्होंने कहा, इस बारे में वे कोई टिप्पणी करना नहीं चाहते हैं।’ सुजय ने यह भी कहा, ‘वे इस समय फ्लाइट में है, लिहाजा और बात नहीं कर सकेंगे।’
उधर, इस फैसले से हिन्दू समुदाय खुश है। भोजशाला में बीते तीन दिनों से पूजा-अर्चना का काम शुरू हो गया है। रविवार को वाग्देवी की नई प्रतिमा सिर पर उठाकर लोग भोजशाला पहुंचे थे। परिसर को गंगाजल से धोया गया था। पूजा-अर्चना की गई। कोर्ट के निर्णय को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोग सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। धार के शहरकाजी ने फैसला आने वाले दिन ही इसकी घोषणा की थी।