जिन कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की हाल में विधायकी चली गई है और जिन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में शिवराज सरकार में मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था उन्होंने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है। राजेन्द्र भारती ने आरोप लगाया कि उन्हें भाजपा ज्वाइन करने के लिए 70 करोड़ रुपयों का ऑफ़र दिया गया। पूरे मामले की सीबीआई जांच कराये जाने की मांग भी उन्होंने की है।
राजेन्द्र भारती ने सोमवार की शाम भोपाल में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया, ‘मई 2024 में एक केन्द्रीय मंत्री के ओएसडी ने भाजपा ज्वाइन करने और नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ दर्ज कराये गये विभिन्न केस वापस लेने के एवज में 70 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव दिया था।’ ओएसडी का नाम और प्रस्ताव कहां दिया गया था? राजेन्द्र भारती ने यह नहीं बताया। उन्होंने कहा, ‘ये सारा कुछ, आने वाले समय में सार्वजनिक करूंगा।’

इसी महीने गई है विधायकी

बता दें कि इसी माह 2 अप्रैल को दिल्ली की एमपी-एमएलए मामलों को देखने वाली, राउज एवन्यू कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को करप्शन के एक मामले में तीन सालों की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। दतिया जिला सहकारी व ग्रामीण विकास बैंक में एफडी से जुड़े मामले में हेरफेर करने का दोनों को दोषी करार दिया गया है। भारती के साथ सह आरोपी बैंक के बाबू रघुवीर प्रसाद को भी दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है।
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कोर्ट ने भारती को 60 दिनों की मोहलत दी थी। मोहलत की अवधि में सजा निलंबित रखने का आदेश भी दिया था। कोर्ट का फैसला आते ही मध्य प्रदेश राज्य विधानसभा सचिवालय ने आधी रात के करीब कार्रवाई कर दी थी। कार्रवाई के तहत भारती की सदस्यता चली गई और दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इस पूरी कार्रवाई और करप्शन मामले में सजा को राजेन्द्र भारती ने हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है।

‘नरोत्तम मिश्रा के हथकंडे’

दतिया जिला सहकारी व ग्रामीण विकास बैंक से जुड़े करप्शन मामले में सजा से जुड़े सवालों के जवाब में राजेन्द्र भारती ने कहा, ‘नरोत्तम मिश्रा के साथ वे साल 2008 से संघर्ष कर रहे हैं। मिश्रा साल 2008 के चुनाव में डबरा सीट (रिजर्व होने के बाद) दतिया शिफ्ट हुए थे। चुनाव जीतने के लिए उन्होंने हर तरह के हथकंडे अपनाये। ये लड़ाई उसा का हिस्सा है।’

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद साल 2009 में राजेन्द्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा के विरूद्ध पेड न्यूज और फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायत निर्वाचन आयोग में की थी।

भारती ने बताया, ‘चुनाव के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को पैसे और गाड़ियां बांटते हुए पकड़ा था। इस मामले की भी एफआईआर कराई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इसी रंजिश के चलते उनके (राजेन्द्र भारती) और परिवारजनों के खिलाफ 400 के लगभग फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। व्यवसाय बंद कराए गए। भाई को जेल भिजवाया गया। हम डरे और बिके नहीं। साल 2023 के चुनाव में मिश्रा को हराकर इसका जवाब दिया।’
उन्होंने कहा, एफडी मेरी मां ने पिता के नाम से कराई थी। 10 लाख रुपयों की एफडीआर थी। बैंक के आंतरिक सुधार का मामला था। पुलिस जांच में केस नहीं बनने पर षड्यंत्र करके प्राइवेज इस्तगासा के माध्यम से प्रकरण बना दिया गया था। जाइंट रजिस्ट्रार की गलत रिपोर्ट पर केस आगे बढ़ा। उन्होंने कहा, ‘हम न तो पहले बिके और ना ही आगे बिकेंगे। लड़ेंगे और जीतेंगे।’
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10 लाख का अपराधी 70 करोड़ कैसे ठुकराएगाः भाजपा

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने राजेन्द्र भारती और कांग्रेस के दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है, ‘10 लाख का अपराधी 70 करोड़ कैसे ठुकराएगा?’ अग्रवाल ने यह भी कहा है, ‘यह केस दिग्विजय सिंह सरकार के समय दर्ज हुआ था और अदालत के निर्णय पर ही इसकी कार्यवाही आगे बढ़ी। जिस व्यक्ति पर गबन का अपराध सिद्ध हो चुका है, वह 70 करोड़ के ऑफर को ठुकराने की बात करे, बात किसी के भी गले नहीं उतरेगी।’

दो दर्जन कांग्रेस विधायक तोड़े थे

साल 2020 में मध्य प्रदेश में दो दर्जन विधायक टूटे थे। इसी के चलते कमलनाथ सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में हुई बगावत के बाद कांग्रेस ने 50-50 करोड़ में विधायकों को खरीदने के आरोप लगाये थे।