मध्य प्रदेश में फिर से दलित के साथ अमानवीय अत्याचार का शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। कटनी जिले के मटवारा गाँव में एक दलित युवक के साथ अमानवीय और दिल दहला देने वाली इस घटना ने पूरे राज्य सहित देश को स्तब्ध कर दिया है। अवैध खनन का विरोध करने पर चार लोगों ने कथित तौर पर राजकुमार चौधरी नामक युवक को लाठी-डंडों से पीटा, जातीय गालियां दीं और उसके चेहरे पर पेशाब कर दिया। 

यह घटना 14 अक्टूबर की शाम को हुई, जब पीड़ित अपनी मां के साथ घर लौट रहा था। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है, लेकिन आरोपी अभी फरार हैं। 
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मटवारा गाँव में सरपंच रामानुज पांडेय द्वारा ग्राम पंचायत भवन निर्माण के लिए किये जा रहे अवैध बजरी खनन के मामले ने तूल पकड़ लिया। एक गरीब दलित किसान पीड़ित राजकुमार चौधरी ने अपनी खेत के पास रामगढ़ा पहाड़ी पर सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध उत्खनन का विरोध किया। शिकायत के अनुसार उन्होंने बताया कि 13 अक्टूबर की शाम को उन्होंने खनन करने वाले राम बिहारी हलधर को रोका, तो उसे जातीय अपशब्दों से अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।

दलित के साथ बेरहमी से मारपीट

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अगले दिन 14 अक्टूबर को जब राजकुमार अपनी मां के साथ गाँव के मुक्तिधाम क्षेत्र से गुजर रहे थे तभी सरपंच रामानुज पांडेय, उनके बेटे पवन पांडेय, भतीजे सतीश पांडेय और रिश्तेदार राम बिहारी पांडेय ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि इन चारों ने राजकुमार को लोहे की रॉड, लाठियों और मुक्कों से बेरहमी से पीटा। जब राजकुमार की मां उन्हें बचाने के लिए दौड़ीं, तो उन्हें बालों से खींचकर जमीन पर पटक दिया गया और पीटा गया। 

सबसे घृणित कृत्य तब हुआ जब पवन पांडेय ने कथित तौर पर राजकुमार के चेहरे पर पेशाब किया। राजकुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्होंने मुझे जातीय गालियां दीं और सरपंच के बेटे ने मेरे चेहरे पर पेशाब किया।

पीड़ित को गंभीर चोटें आईं, जिनके कारण उन्हें तीन दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। उनकी मां को भी चोटें आई हैं। 

पुलिस कार्रवाई: चारों आरोपी फरार

पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित की शिकायत पर चारों आरोपियों रामानुज पांडेय, पवन पांडेय, सतीश पांडेय और राम बिहारी पांडेय के खिलाफ मारपीट, आपराधिक धमकी और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालाँकि, आरोपी सरपंच रामानुज पांडेय और उनके साथी गांव के ही निवासी हैं और अभी फरार हैं। पुलिस टीमें उन्हें तलाश रही हैं।
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हालाँकि, सरपंच ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार रामानुज पांडे ने कहा, 'कोई अवैध खनन नहीं हो रहा था। हम पंचायत भवन का नवीनीकरण कर रहे थे और उसके लिए बजरी की ज़रूरत थी। ये दावे झूठे हैं और मुझे बदनाम करने के इरादे से किए गए हैं।'

सीधी कांड की यादें ताज़ा

यह घटना 2023 के सीधी जिले के कुख्यात 'पेशाब कांड' की याद दिला रही है, जहां एक आदिवासी युवक पर ऊँची जाति के व्यक्ति ने पेशाब कर दिया था। उसका वीडियो भी बनाया गया था और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस घटना ने देश भर में आक्रोश पैदा किया था और विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बना। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की 2023 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हुई है, जिसमें 57,789 मामले दर्ज हुए। मध्य प्रदेश में ही 8,232 मामले थे जो उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद तीसरा स्थान है।
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मध्य प्रदेश में बढ़ते जातीय अत्याचार

मध्य प्रदेश लंबे समय से जातीय हिंसा और अवैध खनन के मामले चर्चा में रहा है। सीधी कांड के बाद सरकार ने आरोपी प्रशांत शुक्ला की संपत्ति का हिस्सा ध्वस्त किया था, लेकिन ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में सरपंचों की मनमानी और खनन माफिया का गठजोड़ दलितों के लिए खतरा बन गया है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वाले गरीबों को दबाने की यह साजिश है। कटनी में दलित और आदिवासी समुदायों ने विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।