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निशांक ने की थी आत्महत्या, सिर तन से जुदा वाली बात निकली झूठ 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बी.टेक छात्र की संदेहास्पद मौत की गुत्थी सुलझा ली गई है। पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ़ टिप्पणी अथवा इस्लाम धर्म के कथित अपमान की वजह से निशांक को मौत के घाट उतारे जाने का संदेह गलत साबित हुआ है। तमाम प्रमाणों के बाद एसआईटी ने मौत का कारण आत्महत्या होना ही माना है। आत्महत्या की वजह छात्र के द्वारा बड़े पैमाने पर कर्ज लेना सामने आया है। 

बता दें, भोपाल से लगे नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा के मूल निवासी निशांक राठौर की बीते रविवार को रायसेन जिले के बरखेड़ा चौकी रेलवे ट्रैक पर क्षत-विक्षत लाश मिली थी।

भोपाल के एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ रहे एवं भोपाल में ही रह रहे निशांक का राजधानी से 48 किलोमीटर दूर शव मिलने का यह मामला सनसनीखेज और संदेहास्पद बन गया था। क्योंकि उसके पिता उमाशंकर रघुवंशी ने कहा था कि, ‘धार्मिक कट्टरता को दर्शाने वाले तीन वॉट्स एप संदेश निशांक की मौत वाले दिन ही उन्हें मिले हैं।’ 

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पुलिस की शुरूआती छानबीन और जिस ट्रेन से कटकर निशांक की मौत हुई थी, उसके ड्राइवर ने पूछताछ में बताया था कि ट्रैक पर निशांक अकेला ही दिखाई दिया था। 

उमाशंकर रघुवंशी को बेटे निशांक के फोन से जो तीन संदेश भेजे गये थे उनमें कहा गया था, ‘नबी से गुस्ताख़ी नहीं’, ‘राठौर साहब बहुत बहादुर था आपका बेटा’ और ‘गुस्ताख-ए-नबी की इक सजा, सिर तन से जुदा।’

सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश

इसके बाद निशांक की मौत को इस तरह का रंग दिया गया कि उसकी हत्या धार्मिक वजह से हुई है और इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर अभियान चलाया गया। बिना किसी प्रमाण के ही निशांक की मौत को सांप्रदायिक बना दिया गया। 

इस मामले को धार्मिक उन्माद में कत्ल की संभावनाओं से जोड़ा गया था। हिन्दू संगठन भी सक्रिय हो गये थे। भोपाल से लेकर पूरे मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से भी पूरे मामले को लेकर आवाज़ उठी।

यह भी संदेह जताया गया कि नुपूर शर्मा एंगल तो कहीं इस मामले में शामिल नहीं है। सवाल उठाये गये कि यदि निशांक कर्ज में ही डूबा था और उसे आत्महत्या ही करनी थी तो उसने भोपाल के किसी करीबी रेलवे ट्रैक को चुनने की बजाय 48 किलोमीटर दूर का ट्रैक क्यों चुना? इसके अलावा भी कई प्रश्न खड़े किये गये थे। 

दरअसल, निशांक के सेल फोन से एक फोटो भी मौत के कुछ देर पूर्व एडिट हुई थी। सोशल मीडिया पर भी फोटो और अन्य बातें अपलोड हुई थीं। कुल मिलाकर इस सबसे पूरा मामला संदेहास्पद होने के साथ-साथ चर्चा का केन्द्र भी बन गया था। 

मध्य प्रदेश सरकार ने मामला जांच के लिए एसआईटी को सौंप दिया था। एसआईटी पड़ताल में जुटी हुई है। साइबर सेल की मदद उसने ली है।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया है कि साइबर सेल ने अपनी रिपोर्ट एसआईटी को सौंप दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि निशांक के फोन से किसी भी तरह की छेड़छाड़ के प्रमाण नहीं मिले हैं।

मौत के कुछ देर पहले निशांक ने विवादित पोस्ट सर्च की। मौत से 6 मिनट पहले निशांक ने पिता को फोन लगाया। पिता ने फोन रिसीव नहीं किया। मौत के ठीक पहले निशांक ने मोबाइल से कुछ डेटा भी डिलीट किया है। 

सूत्रों के अनुसार, साइबर सेल ने निशांक के लैपटॉप को भी खंगाला है। उसमें भी किसी भी तरह के छेड़छाड़ के प्रमाण नहीं मिले हैं। 

निशांक के ही हैं फिंगर प्रिंट 

सूत्रों ने बताया है कि मौत के पहले के 51 मिनट में निशांक का सेल फोन 25 बार लॉक-अनलॉक हुआ है। फोन को अनलॉक करने के लिये हर बार निशांक के ही फिंगर प्रिंट का उपयोग हुआ है। 

फोन को अनलॉक करने के बाद निशांक जिन-जिन एप्लीकेशन को ऑपरेट करता था, वही एप्लीकेशन उसी क्रम में उपयोग होती नजर आयी हैं। शाम 6 बजकर 2 मिनट के बाद निशांक का फोन अनलॉक नहीं हुआ। जांच दल मान रहा है तब (6.02 के बाद) उसकी मौत हो चुकी थी। 

15 ऐप से कर्ज लिया 

सूत्रों के अनुसार, छानबीन में 15 ऐप से लोन लिये जाने का ब्यौरा भी जांच दल को मिला है। स्लाइस, धानी, एम-पॉकेट एप्लीकेशन से लोन लिया गया है।

रायसेन पुलिस ने भी आरंभिक जांच में बताया था कि निशांक के क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग में पैसा व्यय करने के प्रमाण मिले हैं। दोस्तों से कर्ज लेने संबंधी सबूत और कर्ज देने वाले दोस्तों द्वारा पैसा वापसी का तक़ाजा करने की जानकारियां भी पुलिस की जांच में सामने आयीं थीं।

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एसआईटी के अधिकारियों ने मीडिया से अभी अधिकारिक तौर पर कोई बात नहीं की है। जांच करने वाले अधिकारियों का कहना शनिवार शाम तक अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे। 

अफसरों ने ऑफ द रिकार्ड कहा है, ‘मामला आत्महत्या का है। कर्ज होने और उधारी की वापसी के दबाव में निशांक ने अपनी जिंदगी को खत्म करने का दुःखद कदम उठाया, यह जांच से पता चला है।’
एसआईटी की जांच से पता चला है कि आत्महत्या के दोष को छिपाने के लिए निशांक ने ही पिता को धार्मिक कट्टरता वाले संदेश भेजे थे। 
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संजीव श्रीवास्तव
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